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आरटीआई से ना सूचना देंगे और ना भ्रष्टाचार होगा उजागर

लगातार बढ़ रही है आरटीआई से मांगी गई जानकारी की पेंडिंग सूची

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Ranchi: हवाई चप्पल पहनने वाला एक आम आदमी सरकार की कार्यशैली पर उंगली उठाये, सिस्‍टम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये, यह सरकारी नुमाइंदों को पसंद नहीं. झारखंड में आरटीआई कानून से मांगी जाने वाली पेंडिंग मामलों की सूची बढती जा रही है. झारखंड का राज्य सूचना आयोग आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुनवाई के लिए लंबी तारीखें दे रहा है.

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केस 1

सुनील राम लोहरदगा के रहने वाले हैं. पुलिस बहाली की नौकरी, इनकी जगह किसी और को दे दी गई. इस मामले को लेकर पिछले 6 साल से सूचना मांग रहे हैं. आधा युग बीत गया. सूचना नहीं मिली. संबंधित अधिकारी कहते हैं ‘सूचना लेकर क्‍या करोगे.’ धमकी भी दी जाती है. अब कहा जा रहा है, जो सूचना आपने मांगी है, उसका आप खुद आकर अवलोकन कर लो. लेकिन लिखित में कागज नहीं देंगे.

केस -2

लातेहार के लालमोहन सिंह कहते हैं कि अभी तक दो दर्जन से अधिक आरटीआई फाइल किये हैं. कई जानकारियां मिली हैं. भ्रष्टाचार के बड़े मामले उजागर हुए हैं. अब वो सूचना देने से मना करते हैं. मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकारियों की मिलीभगत से मामलों को लंबा खींचा जा रहा है.

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11 की जगह एक सूचना आयुक्त की नियुक्ति

जानकारी के अनुसार राज्य सूचना आयोग में लंबित मामलों की संख्यार 8 हजार से भी ज्यादा है. सूचना का अधिकार कानून के तहत लोगों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने के लिए झारखंड सरकार गंभीर नहीं है. झारखंड राज्य सूचना आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त समेत, कुल 11 सूचना आयुक्तों के पद स्वीकृत हैं. लेकिन यहां एक मुख्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप और एक ही सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी से काम चलाया जा रहा है.

हर दिन 40 मामले आते हैं, निष्पादित होते हैं महज 10

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सूचना आयोग के लिए कुल 74 पद सृजित किये गये हैं. 55 पद अभी भी खाली हैं. झारखंड सूचना आयोग में हर रोज औसतन 40 मामले आते हैं लेकिन हर दिन औसतन 10 मामलों की ही सुनवाई हो पाती है. इस वजह से पेंडिंग मामलों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है.

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12 पदाधिकारियों के खिलाफ जुर्माना लगा, लेकिन वसूला एक से भी नहीं

झारखंड राज्य सूचना आयोग से आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड राज्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप की बेंच में 24 अप्रैल 2015 से 17 दिसंबर 2016 तक 1994 मामलों का निष्पादन किया गया. इस दौरान 1282 मामले लंबित रह गये.
इस दौरान 12 जन सूचना पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. उन पर जुर्माना भी लगाया गया. लेकिन अभी तक किसी भी जन सूचना अधिकारी से जुर्माना वसूला नहीं गया है. इनमें से सिर्फ एक पर अनुशानात्मक कार्रवाई की गई है, लेकिन जुर्माना नहीं वसूला गया है.

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आरटीआई कार्यकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

आरटीआई कार्यकर्ता लखीचरण मुंडा का कहना है कि मुख्या सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप की कोर्ट में सुनवाई के दौरान वे असहज महसूस करते हैं. लोहरदगा के आरटीआई कार्यकर्ता शकील अख्त र ने कहा है कि मुख्य सूचना आयुक्त खुद भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. उन्हें हटाने के लिए आंदोलन की जरूरत है. वहीं सर्वेश सिंह चंडेल का कहना है कि आरटीआई के तहत यह तय नहीं है कि क्या सूचना देना है, क्या नहीं देना है. कानून में ही छेद है. आरटीआई कानून को सशक्त बनाने की जरूरत है.

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