
Muzaffarpur : बिहार के मुजफ्फरपुर जिला स्थित एक बालिका आश्रय गृह में यौन शोषण से इंकार करने पर एक लड़की की हत्या किये जाने का मामला गहराता जा रहा है. मामले को लेकर लगातार कुछ ना कुछ खुलासा हो रहा है. इसी को लेकर एक नयी कड़ी सामने आयी है. वह कड़ी है मधु कुमारी. मधु मुजफ्फरपुर और बेतिया में सेक्स वर्करों के लिए पुनर्वास योजना चलाती थी. जिसे अब पुलिस तलाश रही है. पुलिस ने बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं पुलिस अब मधु की तलाश में लगी है.
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कैसे बनी मधु ब्रजेश की करीबी
इधर सूत्रों के मुताबिक मधु सेक्स वर्करों को पटना के ब्यूटी पॉर्लरों में भेजती थी. इस तरह वह देह व्यापार से जुड़े अवैध कारोबार की सूत्रधार बनी हुई थी. कहा जा रहा है कि मधु ब्रजेश ठाकुर के काले करतूतों में शामिल है. मधु ‘लालटेनपट्टी’ उजड़ने के बाद पहली बार ब्रजेश ठाकुर के संपर्क में आई थी. जिसके बाद मधु ब्रजेश ठाकुर के संगठनों की देखरेख व चलाने का काम करती थी. ब्रजेश ठाकुर ने वहां के समुदाय आधारित संगठन वामा शक्ति वाहिनी का गठन कर उसे चलाने के लिए मधु को दे दी. संगठन की प्रमुख सहयोगी के तौर पर मधु की बहन माला, कल्लो बेगम व अन्य महिलाएं काम करने लगी. उनलोगों ने बिकने वाली लड़कियों को मुक्त कराना, एचआइवी एड्स के लिए जागरूक करना व लड़कियों के हित में किये जाने वाले काम को अपना मुख्य उद्देश्य बताया. जिसके बाद ब्रजेश ठाकुर ने मधु के बल पर उस इलाके में अपनी पैठ बनायी और बालिका गृह खोल लिया. और वहां से शुरू हुआ लड़कियों के आने का सिलसिला.
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काउंसिलिंग की जगह होता था यौन शोषण
मामले की जांच कर रही मुजफ्फरपुर महिला थाना की अध्यक्ष ज्योति कुमारी ने सीबीआई को फाइलें सौंप दी है. उन्होंने इस बारे में बताया कि बालिका गृह की पीड़ित बच्चियों के दर्द को बयान में दर्ज करना बहुत ही मुश्किल था. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जो बात थी वह यह की जो उन बच्चियों का रक्षक होने की बात करता था वही उनका भक्षक बन बैठा था. पूछताछ में लड़कियों ने बताया था कि जब बी काउंसिलिंग होती थी उनके साथ गलत काम किया जाता था. उल्लेखनीय है कि लड़कियों को अवसाद से निकालने के लिए उनकी काउंसिलिंग की जाती थी. क्योंकि उन्हें सदमे से उबारने के लिए मानिसक ताकत और हौसला देने के लिए नियमित काउंसिलिंग का प्रावधान है. लेकिन काउंसिलिंग की जगह उनका यौन शोषण होता था.
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एनजीओ को काली सूची में डाला गया
गौरतलब है कि 2013 से मई 2018 के बीच उक्त बालिका गृह से छह लड़कियों के गायब होने की बात सामने आई है जिसकी जांच में वहां के रजिस्टर को जब्त किया जा चुका है. उक्त बालिका गृह की 21 लड़कियों की जांच किए जाने पर उनमें से 16 के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी. नारी निकेतन में 40 से अधिक लड़कियां रह रही थी और इस मामले में जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बालिका गृह के संचालक और वहां काम करने वाली महिला कर्मियों समेत कुल दस लोग गिरफ्तार किये गये हैं. बालिका गृह को सील कर दिया गया है और वहां की लड़कियों को अन्य जिलों के नारी निकेतनों में भेज दिया गया है तथा उसे चलाने वाले एनजीओ को काली सूची में डाल दिया गया है.
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