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#ElectionCommission: लोकसभा चुनाव में किस बूथ पर किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले, आयोग ने चार माह आठ दिन बाद भी जारी नहीं किया प्रमाणित आंकड़ा

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Praveen Kumar

Ranchi: 17वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आये करीब 5 महीने बीत चुके हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने 2019 लोकसभा चुनावों में कितने वोट पड़े और कितने गिने गये, इसका प्रमाणित आंकड़ा अभी तक अपनी बेबसाइट पर जारी नहीं किया है.

साथ ही किस बूथ किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले यह भी जारी नहीं किया गया है. जानकार कहते हैं कि चुनाव आयोग को ये पक्का करना होता है कि कहीं कोई गलती तो नहीं हुई? क्योंकि अगर गलती हो गयी, तो किसी क्षेत्र का नतीजा भी बदल सकता है.

चुनाव आयोग के द्वारा चुनाव परिणाम जारी होने के बाद आंकड़े की री-चेकिंग की जाती है. इसमें किसी प्रकार की गलती की गुंजाइश नहीं होती है.

इसके बाद आयोग इलेक्शन के डेटा को अपनी वेबसाइट पर प्रमाणित घोषित करता है. साथ ही चुनाव अयोग के द्वारा फार्म 20 भी जारी किया जाता है.

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इसमें किस उम्मीदवार को किस बूथ पर कितने मत मिले, इसकी जानकारी रहती है. चार माह बीत जाने के बाद भी चुनाव आयोग ने इसे जारी नहीं किया है.

हालांकि चुनाव आयोग ने 25 मई, 2019 को एक प्रेस नोट जारी करते हुए लिखा है कि राष्ट्रपति को 17 वीं लोकसभा के लिए नव निर्वाचित सदस्यों की सूची सौंपी गयी है. इसके साथ एक तस्वीर भी साझा की गयी है. जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्तों के साथ अशोक लवासा और सुशील चंद्रा हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में तीन माह के अंदर जारी कर दिया गया था आंकड़ा

चुनाव आयोग के द्वारा 2014 में लोकसभा चुनाव का प्रमाणित चुनाव डेटा एकत्र करने करीब तीन माह लगे थे. इसके बाद चुनाव से संबंधित सभी तरह के डेटा जारी कर दिये गये थे.

लेकिन आयोग के द्वारा जारी 1 मई के प्रेस नोट में कहा गया कि नयी आइटी प्रणाली के कारण मतों की गणना के अंतिम आंकड़े परिणामों की घोषणा के कुछ दिनों के बाद आयोग को उपलब्ध हुए.

सभी राज्यों में मतदाताओं के डेटा का सामंजस्य पूर्ण हो चुका है और सभी 542 सीटों के सूचकांक प्रपत्रों की जल्द ही रिटर्निंग अधिकारियों से ईसीआई तक पहुंचने की उम्मीद है.

संकलन के बाद इसे तुरंत चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक किया जायेगा. लेकिन चार माह आठ दिन बाद भी आयोग ने प्रमाणित चुनाव डेटा को प्रकाशित नहीं किया.

वहीं इलेक्शन कमीशन ने 1 जून, 2019 को एक प्रेस रिलीज जारी कर यह भी बताया कि हर लोकसभा क्षेत्र के लिए एक ‘इंडेक्स कार्ड’ होता है, जो ‘फाइनल वोट ब्रेकअप’ बताता है.

ये इंडेक्स कार्ड चुनाव अधिकारी बनाते हैं. चुनाव अधिकारियों की ओर से चुनाव आयोग को भेजने के बाद इंडेक्स कार्ड जमा कर दिये जाते हैं.

फिर इनकी जांच होती है और फिर चुनाव के फाइनल प्रमाणित डेटा सार्वजनिक किये जाते हैं.

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15 दिन के अंदर इंडेक्स कार्ड जमा करने को कहा गया था

चुनाव आयोग के मुताबिक सभी चुनाव अधिकारियों को मतगणनावाले दिन के बाद से 15 दिन के अंदर अपने इंडेक्स कार्ड जमा करने को कहा गया था.

क्योंकि चुनाव नतीजों का ऐलान 23 मई को हो गया था, इसलिए चुनाव आयोग को ये इंडेक्स कार्ड 10 जून तक मिल जाने चाहिए थे.

1 जून की प्रेस रिलीज में चुनाव आयोग ने कहा था कि प्रमाणित डेटा 2-3 महीने में जारी कर दिये जायेंगे, लेकिन चार महीने 8 दिन बीत गये ये डेटा जारी नहीं किये गये हैं.

मतदान से अधिक वोटों की गिनती का मामला

कई लोकसभा सीटों पर मतदान से अधिक मतों की गिनती हुई थी. जिसमें झारखंड़ के खूंटी लोकसभा सीट का मामला भी है. इसे लेकर खूंटी के कांग्रेस उम्मीदवार कालीचरण मुंडा ने हाइकोर्ट में मामला दायर कर रखा है.

जिसमें जिला निर्वचान पदाधिकारी, मुख्य निर्वचान पदाधिकारी झारखंड और भारत निर्वाचन आयोग को पार्टी बनाया गया है. कालीचरण मुंडा कहते हैं कि ईवीएम में 8 लाख 28 हजार 961 मत पड़ थे जबकि गिनती के समय ईवीएम में 8 लाख 30 हजार 426 वोट की गिनती की गयी.

जिससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा होता है. या जान बूझ कर भाजपा उम्मीदवार अर्जुन मुंडा को चुनाव जितने के लिए जिला निर्वचान पदाधिकारी और मुख्य निर्वचान पदाधिकारी झारखंड ने आकड़ों में गड़बड़ी की है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 17 वीं लोकसभा चुनाव के दौरान 370 से ज्यादा सीटों में ईवीएम में पड़े वोटों और गिनती किये वोटों की संख्या में अंतर पाया गया था. क्विंट की रिपोर्ट में कहा गया है कि 220 चुनावी क्षेत्रों में जितने वोट पड़े उससे ज्यादा गिनती में आ गये और बाकी में कम.

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