Jharkhand

JPSC 14वीं परीक्षा में OMR शीट से छेड़छाड़ का खुलासा, CCTV में कम उत्तर भरते दिखे अभ्यर्थियों के मिले 100 में 100 जवाब

JPSC 14वीं परीक्षा में OMR शीट से छेड़छाड़ का खुलासा, CCTV में कम उत्तर भरते दिखे अभ्यर्थियों के मिले 100 में 100 जवाब

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर सीआईडी की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की वास्तविक गतिविधियों और उनकी मूल ओएमआर शीट में दर्ज उत्तरों के बीच बड़ा अंतर पाया गया है। सीआईडी के अनुसार, कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र पर जितने सवालों के जवाब भरे थे, मूल ओएमआर शीट में उससे कहीं अधिक उत्तर दर्ज मिले। आशंका है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद खाली छोड़े गए गोलों को योजनाबद्ध तरीके से भरा गया था।

जांच में बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से बरामद चयनित और नामित अभ्यर्थियों की सूची को भी अहम साक्ष्य माना जा रहा है। सीआईडी ने इस सूची में शामिल अभ्यर्थियों की जानकारी का परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज और जेपीएससी की मूल ओएमआर शीट से मिलान किया। इस तुलनात्मक जांच में कई उम्मीदवारों के उत्तरों में असामान्य अंतर सामने आया।

जांच के मुताबिक, ओम प्रकाश राणा (रोल नंबर 2601102299) सीसीटीवी फुटेज में ओएमआर शीट पर उत्तर भरते हुए दिखाई नहीं दिए, जबकि उनकी मूल ओएमआर शीट में पेपर-1 के 91 और पेपर-2 के 92 उत्तर भरे मिले। इसी तरह दिलीप कुमार राणा (रोल नंबर 2601101092) फुटेज में केवल 30 से 40 प्रश्नों के उत्तर भरते नजर आए, लेकिन उनकी ओएमआर शीट में क्रमशः 95 और 93 उत्तर दर्ज पाए गए।

वहीं, वंदना कुमारी (रोल नंबर 2601216843) दोनों पालियों में करीब 40 और 30 प्रश्न हल करती दिखाई दीं, जबकि उनकी ओएमआर शीट में 98 और 92 उत्तर भरे मिले। उमाकांत उरांव (रोल नंबर 2601255984) को कैमरे में लगभग 30 और 39 प्रश्नों के उत्तर भरते देखा गया, लेकिन उनकी शीट में 93 और 83 उत्तर दर्ज थे।

इसी तरह मनोज कुमार (रोल नंबर 2601279289) सीसीटीवी में अधिकांश समय निष्क्रिय नजर आए और करीब 72 तथा 74 प्रश्न भरते दिखे। इसके बावजूद उनकी दोनों ओएमआर शीट में सभी 100-100 प्रश्नों के उत्तर दर्ज मिले। रौशन केरकेट्टा (रोल नंबर 26011149170) के मामले में भी ऐसा ही अंतर सामने आया। वह दोनों पालियों में करीब 30 और 25 प्रश्नों के उत्तर भरते दिखाई दिए, जबकि उनकी मूल ओएमआर शीट में 87 और 88 उत्तर दर्ज पाए गए।

कार्बन कॉपी नहीं दे सके अभ्यर्थी

सीआईडी की जांच में ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अधिकारियों ने संबंधित अभ्यर्थियों से उनकी कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा था, लेकिन कोई भी अभ्यर्थी इसे प्रस्तुत नहीं कर सका। उमाकांत उरांव, रौशन केरकेट्टा और मनोज कुमार ने कार्बन कॉपी गुम होने की बात कही। वहीं, ओम प्रकाश राणा और दिलीप कुमार राणा ने भी अलग-अलग कारण बताते हुए इसे उपलब्ध नहीं कराया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं होना भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू है। सीआईडी को संदेह है कि अभ्यर्थियों ने अपनी कार्बन प्रतियां पहले ही बिचौलियों को सौंप दी थीं।

लैपटॉप में मिली सूची और CCTV फुटेज का किया गया मिलान

सीआईडी के मुताबिक, बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से मिली सूची में शामिल इन छह अभ्यर्थियों की परीक्षा संबंधी गतिविधियों और मूल ओएमआर शीट के बीच पाया गया अंतर संभावित सुनियोजित छेड़छाड़ की ओर संकेत करता है। जांच में यह आशंका जताई गई है कि परीक्षा के बाद ओएमआर शीट के खाली गोलों को भरा गया था।

फिलहाल इस मामले में सीआईडी विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। ओएमआर शीट, सीसीटीवी फुटेज और लैपटॉप से मिली सूची के बीच सामने आए तथ्यों ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा की निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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