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धनबाद : नगर निगम से गायब हुई करीब 6 करोड़ रुपये कीमत की सिटी बसें !

यह कारनामा है धनबाद नगर निगम की बसों को सुनियोजित तरीके से गायब करने का.

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Dhanbad : धनबाद नगर निगम के सयानों ने नागरिक सुविधाओं के बहाने निगम का करोड़ो का माल उड़ाने के कारनामों में अब एक और कारनामा जुड़ गया है. यह कारनामा है धनबाद नगर निगम की बसों को सुनियोजित तरीके से गायब करने का.

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जेएनएनयूआरएम ने दी थी सिटी बसें

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जवाहरलाल नेहरू अर्बन रीन्यूड मिशन के तहत केंद्र सरकार के शहरी विकास विभाग द्वारा धनबाद नगर निगम को पहले 40 और फिर चरणों में कुल 70 बसें दी गई. इन बसों को चलाने का जिम्मा झारखंड टुरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन ने लिया. बसों को धनबाद के विभिन्न रूटों पर चलाने के लिए जेटीडीसी ने प्राइवेट ड्राइवर रखे. जेटीडीसी सिर्फ 24 बसें ही चला पायी. 9 अगस्त 2010 को बसें को परिचालन शुरू हुआ. शुरुआत में कुछ आकर्षण के बाद में बसों को पैसेंजर कम मिलने लगे. इसका किराया और बाद में इसकी सेवा सुविधाजनक नहीं मिलने पर लोगों ने परंपरागत सवारी वाहनों का ही रुख किया. नतीजा हुआ ड्राइवरों के वेतन के भी लाले पड़ने लगे. बसें ब्रेक डाऊन भी होने लगीं. आखिर 15 सितंबर 2014 को जेटीडीसी ने सिटी बसों का परिचालन बंद कर दिया. इसके बाद बसों को प्राइवेट ऑपरेटर के माध्यम से चलाने के कई प्रयास हुए. बसें पड़ी पड़ी कबाड़ा होती रही.

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अंततः निगम को बसें चलाने की दी गयी जिम्मेवारी

राज्य सरकार से फैसले के बाद जब धनबाद नगर निगम को बसें चलाने की जिम्मेवारी दी गयी. लूट खसोट के लिए कुख्यात यहां के अधिकारी, कर्मी और जनता की सेवा के नाम पर साम, दाम, दंड, भेद से चुनाव जीतनेवाले अपना जुगाड़ बनाने में लग गये. मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल के कृपा पात्र कुछ पार्षदों ने सभी बसों को कंडम करार देने की समुचित कार्रवाई की. इसके बाद इसकी मरम्मत के नाम पर कीमती पार्ट पूर्जे तेजी से गायब करने का खेल शुरू हुआ. कुछ बसों का ढांचा छोड़कर सारे पार्ट पूर्जे गायब कर दिए गये.

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कई बसों के उपयोगी पूर्जे की जगह कंडम पूर्जे लगा दिए गये. कई बसें तो पूरी ही गायब कर दी गई. इनमें से एक बस को गोविंदपुर से ढूंढ निकाला गया था. हालांकि सिटी बसों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये में खर्च किए गये. इन सबके बीच मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल शहर में फिर से सिटी बस चलवाने की सुविधा देने का श्रेय लूटने आ गये. 70 में से 30 सिटी बसों को जून 2016 में फूल माला लगाकर हरी झंडी दिखाई गई. नागरिकों को नयी सुविधा देने का एक बार फिर दावा किया गया.

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उच्च स्तरीय जांच से खुलेंगे कई राज

बताया गया कि सात एनजीओ को बस चलाने का जिम्मा दिया गया. सवाल है ऐसे आपरेटर थे कौन? आपरेटर थे स्थानीय रूटों पर बस चलानेवाले. इनको प्रति टिप 40 से 45 रुपया में बसें चलाने दी गयी. इस पर आडिट ने कड़ी आपत्ति प्रकट की. जानकारी मिली है कि इन आपरेटरों ने इन बसों को रूट पर चलाने से ज्यादा ध्यान इसकी मरम्मत के नाम पर इसके पार्ट पूर्जे गायब करने में दिया. लिहाजा, बसें एक एक कर कंडम होती सड़क से हटती गयी. अब तो बहुत मुश्किल से ही सिटी बसें सड़क पर दौड़ती हुई पायी जाती है. सूत्र बताते हैं कि करीब 30 लाख रुपये प्रति बसों की दर से 20 से अधिक सिटी बसों के कीमती पार्ट पूर्जे गायब कर दिए गये हैं. उच्चस्तरीय जांच से ही सच्चाई का पता चल पायेगा.

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जवाब देने से कतरा रहे हैं जिम्मेवार

मामले को लेकर धनबाद नगर निगम के नगर आयुक्त चंद्रमोहन प्रसाद से कई बार संपर्क किया गया. उन्होंने बार बार यह बताया कि मीटिंग में हैं. मोबाइल पर इस संबंध में मैसेज करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला.

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