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राजधानी के कर्बला चौक पर सिलिंग की जिस जमीन से डायमंड कंस्ट्रक्शन ने खींचा था हाथ, उस पर बन गया संतुष्टि अपार्टमेंट !

तत्कालीन टाउन प्लानर घनश्याम अग्रवाल के समय पास हुआ है प्रमोटर प्रणामी इस्टेट्स का नक्शा

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Ranchi: राजधानी के कर्बला चौक के पास सिलिंग की जमीन पर संतुष्टि अपार्टमेंट बन कर तैयार है. इसके प्रमोटर हैं प्रणामी इस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड. 110 कट्ठा में बने जी प्लस-11 अपार्टमेंट में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होने की बातें कही जा रही हैं. संतुष्टि अपार्टमेंट के लिए जो जमीन प्रणामी इस्टेट्स को डेवलप करने के लिए दी गयी है, वह शहर अंचल के कोनका मौजा में है.

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इस अपार्टमेंट के 95 फीसदी खरीददार एक ही समुदाय के हैं. संतुष्टि अपार्टमेंट की कीमत बाजार में 75 लाख रुपये से 1.50 करोड़ तक है. एमएस प्लॉट संख्या 371, 372, 376, 377, 379, 380 और 382 में संतुष्टि अपार्टमेंट के नाम से बहुमंजिली इमारत बनायी गयी है. सिलिंग युक्त जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी नीतिश कुमार अग्रवाल के नाम है. वह कांके रोड के कुंज अपार्टमेंट निवासी हैं, इनके पिता विजय कुमार अग्रवाल प्रणामी इस्टेट्स के प्रमोटर हैं. इस जमीन को राजकुमारी देवी सरावगी, अंजना सरावगी, आलोक कुमार सरावगी, रश्मी सरावगी, संतोष कुमार जैन, विजय कुमार जैन ने अपने नाम करवा रखा है.

2014 में जमीन की खरीद-बिक्री की गयी है. यहां यह बताते चलें कि जमीन के नेचर में गड़बड़ी को लेकर डायमंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने प्लॉट पर अपार्टमेंट बनाने के फैसले से अपना हाथ खींच लिया था. इस जमीन पर अपार्टमेंट बनाने का भवन प्लान तत्कालीन टाउन प्लानर घनश्याम अग्रवाल ने पास किया है. उन्होंने कहा कि जमीन के स्वामित्व संबंधी जानकारी उन्हें नहीं है, क्योंकि नगर निगम के लैंड सेक्शन और विधि सेक्शन से होते हुए फाइल उन तक पहुंची थी. इसी आधार पर नक्शा भी पास किया गया.

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क्या है शहरी भू-हदबंदी कानून 1976

शहरी भू-हदबंदी कानून 1976 अविभाजित बिहार के समय लागू किया गया था. रांची, जमशेदपुर और धनबाद के शहरी इलाकों में सैकड़ों एकड़ जमीन सिलिंग एक्ट की वजह से कानूनी दांवपेंच में फंस गयी थी. राज्य भर में शहरी क्षेत्र के वैसे जमीन, जो 30 कट्ठा से अधिक थे. उन रैयतों की जमीन को सिलिंग एक्ट के तहत जोड़ दिया गया था. झारखंड सरकार की तरफ से जवाहर लाल नेहरू शहरी पुनरुद्धार योजना के तहत ऐसी जमीनों को शहरी भू-हदबंदी कानून से मुक्त करने की घोषणा की गयी थी. यह योजना केंद्र की तरफ से 11वीं पंचवर्षीय योजना में शुरू की गयी थी. इसके अंतर्गत रांची नगर निगम, धनबाद नगर निगम और जमशेदपुर नगर निगम में आठ हजार करोड़ की परियोजनाएं ली गयी थीं.

11 बैंकों ने किया है प्रोजेक्ट को फायनांस

प्रणामी इस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड के संतुष्टि प्रोजेक्ट को 11 बैंकों ने फायनांस किया है. इसमें भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, एचडीएफसी हाउसिंग फायनांस, कैनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक समेत अन्य बैंक शामिल हैं. इन बैंकों की तरफ से प्रोजेक्ट को एप्रूव करते हुए कर्ज दिया गया है. इस प्रोजेक्ट में दो बेडरूम, तीन बेडरूम और चार बेडरूम के फ्लैट बनाये गये हैं. प्रमोटर की तरफ से 45 सौ वर्ग फीट से लेकर पांच हजार रुपये वर्ग फीट की दर से फ्लैटों की बुकिंग की गयी थी. इसे झारखंड की राजधानी का सबसे महंगा फ्लैट माना जा रहा है.

न्यूज विंग की तरफ से जब मामले की तहकीकात की गयी, तो पता चला कि जस्टिस राय की दो भतीजी, जो दिल्ली और ब्रिटेन में रहती हैं, उन्होंने प्रणामी इस्टेट्स के साथ लैंड डेवलपमेंट का समझौता किया था. जमीन की मुख्य मालकिन का अब देहांत हो गया है. जमीन की खरीद बिक्री 2014 में बिल्डर संतोष जैन और उनके पार्टनर की तरफ से की गयी थी. इसके बाद संतोष जैन और आलोक सरावगी ने प्रणामी इस्टेट्स को लैंड डेवलपमेंट को जवाबदेही सौंप दी. 2015 के मध्य से जमीन पर निर्माणकार्य शुरू किया गया है.

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क्या कहते हैं प्रणामी इस्टेट्स के संचालक

प्रणामी इस्टेट्स के संचालक विजय अग्रवाल ने न्यूजविंग को बताया कि बगैर क्लीयरेंस का नक्शा पास नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि जमीन का स्वामित्व बदल गया है. उन्होंने कहा कि अर्जुन मुंडा के मुख्यमंत्री रहते हुए स्वामित्व में तब्दीली की गयी है. अब जमीन में किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है. यह पूछे जाने पर कि जमीन का प्लॉट नंबर और खाता नंबर क्या है, उन्होंने कहा कि यह उन्हें मालूम नहीं है.

फाइल देख कर बताना होगा. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट पूरी तरह कंप्लीट हो गया है. अब फिनिशिंग का काम चल रहा है. प्रोजेक्ट में 104 फ्लैट बनाये गये हैं. यह पूछे जाने पर कि प्रोजेक्ट की कुल लागत क्या है, उन्होंने कहा कि यह देख कर बताना होगा. सबका रेट अलग-अलग है.

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