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धनबाद डीसी का काम नहीं, चीख रहा है हूटर

Ranjan Jha
Dhanbad : अपनी सुस्त चाल से पहचान बनानेवाले केएन झा की विदाई के बाद युवा डीसी ऐंजेयुलू दोड्डे उनकी जगह आए तो लगा कि धनबाद में इनके काम का शोर होगा. कुछ दिनों तक इनके तेवर भी हैरान करनेवाले थे. लेकिन काम के बदले इनके वाहन में लगे हूटर और बाद में इनके वाहन के आगे चलनेवाले स्कॉट वाहन के हूटर की कर्कश चीख ने यहां के लोगों के नाहक कान पकाए….और लोग अब भी पक रहे हैं. लोगों को याद नहीं कि धनबाद में पहले आए किसी डीसी ने हूटर के कर्कश शोर से इस कदर पकाया हो. बेमिसाल थे केबी सक्सेना..वह तो कोलियरी के वेतन कार्यालय में मजदूर बनकर लाइन में लग जाते थे. कई सूदखोरों को उन्होंने इसी वेशभूषा में पकड़ा. रिक्शावाला बनकर लाइन में लगे और सस्ती रोटी की दुकान में मापतौल में गड़बड़ी पकड़ी. एमएम झा ने माफिया विरोधी अभियान चलाकर पहचान बनायी. हालांकि यह अभियान उनकी जिंदगी से लेकर उनके परिजनों तक के लिए घातक कदम साबित हुआ. डा जेएस बरार धनबाद शहर का चेहरा बदलने के लिए याद किए जाते हैं. वहीं..धनबाद से नेताओं को मोटी थैली पहुंचानेवालों में बहुत से डीसी का नाम लिया जाता है. अगर कोई अधिकारी समझता हो कि पब्लिक उनके बारे में कुछ नहीं जानती तो यह समझना गलत है.

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तुमको जेल भेज देंगे…

धनबाद में डीसी बनने के बाद अधिकारियों की मीटिंग में गलती करने पर दोड्डे साहब का कड़ी कार्रवाई की बात करना लोगों को पसंद आया. लगा कि अब जिले की सरकारी योजनाओं में लूटपाट करनेवालों की खैर नहीं. मगर ऐसी बात डीसी लगातार बैठकों में बोलने लगे. उनका तकिया कलाम हो गया…तुमको जेल भेज देंगे. आखिर किसी को आप जेल कैसे भेज दीजिएगा. आपकी मर्जी का कानून है क्या?…हम चोर हैं क्या… पब्लिक ने हमें चुनकर भेजा है…मुखिया की एक मीटिंग में एक बुजुर्ग मुखियाजी ने आपे से बाहर होकर जब जवाब दिया तो लोग दंग रह गये. ताज्जुब कि उसके बाद दोड्डे साहब ने गलती से भी यह बात नहीं दोहराई.

Sanjeevani

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दोड्डे साहब की उपलब्धियां क्या है

सरकारी आंकड़ों का खेल और हाल के वर्षों में प्रचलन में आया पावर प्वाइंट प्रजेंटेंशन देखें तो विकास और बदलाव दंग करनेवाले दिखेंगे. इस खेल और तकनीक में माहिर लोग अपना लोहा मनवा ही लेते हैं. पर जमीनी हकीकत बेहद निराश करनेवाली होती है. धनबाद शहर और गांव में शायद ही कोई मिले जो दोड्डे साहब का उल्लेखनीय कार्य बता सके. हालांकि धनबाद में ज्वाइनिंग के समय कुछ दिनों तक जनप्रतिनिधि समुचित रिस्पॉन्स नहीं मिलने से क्षुब्ध थे. मगर, अब इनकी सबसे ट्यूनिंग बन गयी है. बस आमलोग ही इनकी उपलब्धि पूछने पर संकट में पड़ जाते हैं.

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हूटर नहीं बजा सकते

सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट 192(2) के तहत कोई भी वाहन निर्धारित ध्वनि वाले हार्न के अलावा किसी अन्य प्रकार के हार्न या साउंड सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर सकता. हालांकि सरकार पुलिस और ट्रांसपोर्ट अफसरों को हूटर के इस्तेमाल की इजाजत देती है. सरकार के पास इसका लेखा जोखा होना चाहिए कि राज्य भर में कितने वाहन में हूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है. एंबुलेंस और फायर बिग्रेड की गाड़ियों में आवश्यकतानुसार ही सायरन का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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डीसी क्यों करें हूटर का इस्तेमाल

धनबाद के एक वरीय अधिवक्ता और कानून के जानकार कहते हैं कि डीसी अपने घर से बमुश्किल पांच सौ मीटर दूर स्थित अपने कार्यालय तक आने के लिए हूटर का इस्तेमाल अपने वाहन या स्कॉट वाहन में क्यों करेंगे ? इसका लॉजिक भी होना चाहिए. यह हो सकता है कि उनके घर से दफ्तर और दफ्तर से घर आने जाने के दौरान ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था खासतौर पर मुस्तैद की जाए. हालांकि इस बात का ख्याल रखा जाए कि उनके आने जाने से आमजनों को जरा भी असुविधा नहीं हो. डीसी को समझना चाहिए कि उनकी किसी जिले में प्रतिनियुक्ति आमजनों को अधिक से अधिक सुविधा मुहैया करने के लिए होती है ना कि हूटर बजाकर आमजनों को रुतबे का धौंस जमाकर भयभीत करने के लिए होती है. किसी डीसी के हूटर बजाने या साथ में चल रहे सुरक्षा वाहन में हूटर बजने का कारण क्या हो सकता है? या तो डीसी खुद भयभीत हैं या आमजन को भयभीत करना चाहते हैं. यह जनसेवक की भावना के सर्वथा प्रतिकूल है. वह भी ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री तक वीआईपी सिस्टम को खारिज करने की बात करते हों.

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इनका व्यवहार परेशानी का सबब

हाल की बात है. माडाकर्मियों ने हड़ताल की घोषणा की. उन्हें सालों साल से वेतन नहीं मिला है अभाव और बीमारी का इलाज कराने में असमर्थ रहने से लगातार माडाकर्मियों की मौत हो रही है. अभावों से बुरी तरह जूझ रहे माडाकर्मियों ने हर जन प्रतिनिधि से लेकर वरीय पदाधिकारियों तक अपनी बात रखी पर नतीजा कुछ नहीं निकला.अंततः माडाकर्मियों ने हड़ताल की घोषणा कर दी. हड़ताल का मतलब था कि कोलियरी इलाके में जलापूर्ति ठप होगी. स्थिति विकट होना स्वाभाविक था. हड़ताल से पहले माडाकर्मियों को डीसी ने वार्ता के लिए बुलाया तो कर्मी बहुत उत्साहित हुए. उन्हें लगा कि शायद हड़ताल की नौबत ना आए. डीसी कोई रास्ता निकाल दें. निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक माडाकर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल डीसी दोड्डे से बात करने गया तो उनके तेवर दंग करनेवाले थे. लोगों ने इसकी कल्पना नहीं की थी. वहां पहुंचे मीडिया के प्रतिनिधि भी हक्का…बक्का हुए. वार्ता शुरू होते ही उन्होंने कर्मियों के प्रतिनिधियों को फटकार लगानी शुरू की. ..नेता बनते हो..सब नेतागीरी झाड़ देंगे..फिर पुराना जुमला…हड़ताल हुई तो सबको जेल भेजेंगे. फिर मीडिया के लोगों को भी बेरुखी से कहा…आउट. सवाल है जब डीसी उनकी मांगों पर बात नहीं कर धमकी की भाषा का इस्तेमाल करें तो मरता क्या करे? बेशक डीसी जेल भेज दें पर जब मांगों पर विचार ही नहीं किया जाए तो करें क्या? या तो डीसी की बात मानकर वेतन बिना तिल-तिल कर मरें या हड़ताल कर दबाव बनाएं. डीसी के रवैये के कारण ही माडाकर्मियों ने हड़ताल पर जाने की ठानी. नतीजा, कोलियरी इलाके में पानी के लिए हाहाकार मच गया.

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परिचय और पहले के कार्य

सन् 2011 बैच के तेलुगु क्षेत्र से आईएएस टॉपर ए दोड्डे बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं. इनके पिता इनकी प्रेरणा का स्रोत रहे. उन्होंने जीवन में कठिन संघर्ष किया. मानवीय मूल्यों की बात करनेवाले दोड्डे एपीजे अब्दुल कलाम का सम्मान करते हैं. राष्ट्रीयता, भारतीय सेना और शहीदों को खास समझते हैं. एक कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू करनेवाले दोड्डे धनबाद आने से पहले रामगढ़ में डीसी थे. उन्होंने वहां सरकार के विकास कार्य में कंप्यूटर के इस्तेमाल को कारगर बनाकर वाहवाही लूटी.

(न्यूज विंग ने धनबाद डीसी से उनके कार्यकाल के पांच ऐसे काम पूछे जिसे वो विकास का पैमाना मानते हैं. लेकिन व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. फोन करने पर उन्होंने फोन कट कर दिया)

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