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भाजपा के पूर्व सांसद अजय मारू ने फर्जी तरीके से खरीदी जमीन : विधानसभा उपसमिति

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Ranchi : पूर्व सांसद सह वर्तमान भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य अजय मारू ने कथित रूप से सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर हरमू मुक्ति धाम के पास जो जमीन खरीदी है, उस पर विधानसभा की उपसमिति ने भी सवाल खड़े कर दिये हैं. विधानसभा की उपसमिति ने माना है कि उक्त जमीन की खरीदारी फर्जी तरीके से की गयी है. इस मामले में विधानसभा की उपसमिति ने एक पत्र जारी किया है. जारी पत्र में कहा गया है कि थाना नंबर 5, खाता नंबर 33, प्लॉट नंबर 591 के बाबत जमींदार द्वारा दाखिल रिटर्न के मूल खतियान की प्रति सौंपें. साथ ही, 1956 से अब तक की पंजी पांच की मूल प्रति भी सौंपें. समिति ने उक्त जमीन का राजस्व लगान निर्गत करने पर रोक लगाने को भी कहा है.

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बिक्री और निबंधन पर रोक लगाने की अनुशंसा

विधानसभा की उपसमिति ने मॉल की दुकानों एवं प्रॉपर्टी की बिक्री और निबंधन पर अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा है. साथ ही, अवर निबंधक से भी पूछा है कि क्या निबंधन अधिनियम 1908 के तहत एक ही जमीन की दो डीड जारी करने का अधिकार है? सीएनटी एक्ट के इस प्रावधान की कॉपी प्रस्तुत करने को कहा गया है कि  राजस्व लगान रसीद के आधार पर अदिवासी जमीन की बिक्री एवं निबंधन गैर आदिवासी द्वारा किया जा सकता है या नहीं. उपसमिति ने यह भी माना है कि ऑफिशियली डीड नहीं है.

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क्या है मामला

भाजपा के नेता व पूर्व सांसद अजय मारू ने प्रेस खोलने के लिए हरमू मुक्ति धाम के पास जमीन ली थी. लेकिन, उसमें सिटी मॉल बना दिया. जबकि, रजिस्ट्री डीड में साफ कहा गया है कि उक्त प्रयोजन अर्थात रांची प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड (प्रेस) के लिए जमीन का उपयोग नहीं किये जाने पर विक्रेता को जमीन वापस कर दी जायेगी. अजय मारू ने रांची प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड के लिए 4 कट्ठा 8 छटांक आदिवासी जमीन हरमू मुक्तिधाम के समीप खरीदी थी. यह जमीन महादेव कच्छप, अजीत कच्छप, सुनील कच्छप, दुर्गा कच्छप और अनिल कच्छप से 6 लाख 75 हजार रुपये में ली गयी थी. इसमें स्पष्ट कहा गया था कि विक्रेताओं ने अपने मकान की मरम्मत, निर्माण और परिवार की आय बढ़ाने के लिए छोटा व्यवसाय स्थापित करने के नाम पर डीसी से स्वीकृति ली थी.

अब ताज होटल बनाने की तैयारी

अजय मारू ने उक्त जमीन पर मॉल तो बना लिया है, अब मॉल के एक हिस्से पर होटल ताज खोलने की तैयारी की जा रही है. एक ही बिल्डिंग में मॉल व होटल रहेगा. जबकि, डीड में साफ है कि जमीन रांची प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड को मिली है और इसमें सिर्फ प्रेस की ही स्वीकृति मिली है. दिलचस्प यह भी है कि रांची प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड अब अजय मारू के हाथों में नहीं है. मारू इसे बेच चुके हैं. रजिस्ट्री के 10 साल के बाद भी रांची प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड जमीन का उपयोग नहीं कर पायी है.

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विधानसभा की उपसमिति ने एकपक्षीय बात कही है : अजय मारू

अजय मारू ने न्यूज विंग से बात करते हुए कहा, “विधानसभा की उपसमिति ने एकपक्षीय आदेश दिया है, जबकि इस मामले में उपसमिति को सभी विषयों पर जांच करने के बाद ही कोई आदेश देना चाहिए. जिस जमीन के मामले में उपसमिति ने आदेश परित किया है, उसका खाता नंबर में कुल रकबा 1.55 एकड़ है. जबकि, 36 कट्ठा जमीन पर मॉल और होटल का निर्माण किया गया है. शेष जमीन कहां है, यह बात भी समिति को बतानी चाहिए थी. यह जमीन मेरी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कंपनी के नाम पर खरीदी गयी थी. उस कंपनी के बोर्ड में भी अब मैं नहीं हूं. जहां मॉल का निर्माण हुआ है, उसमें कुछ जमीन मेरी है, जो रैयती है. शेष जमीन उपायुक्त की स्वीकृति के बाद औद्योगिक प्रयोजन के लिए है. इस मामले में अगर गलत हुआ हो, तो जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन, मैं जान रहा हूं कि इस पूरे मामले में मैंने कहीं गलत नहीं किया है.”

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