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44 करोड़ का कैंसर विभाग डॉक्टरों के अभाव में बना रेफरल अस्पताल

kumar Gaurav 

Ranchi : रांची रिम्स कैंपस में कैंसर डिर्पाटमेंट 44 करोड़ की लागत से बनाया गया है. जहां ईलाज कराने प्रतिमाह 450 से 500 नये कैंसर के मरीज आते हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर में करोड़ों खर्च और अलग विभाग होने के बावजूद रिम्स में आनेवाले मरीजों को रिम्स का ऑन्कोलॉजी विभाग किसी को कैंसर मुक्त नहीं कर पाता. डॉक्टरों  के आभाव और रिम्स प्रशासन का कैंसर विभाग के प्रति उदासिन रवैये के कारण सालाना 25 करोड़ रुपये अन्य अस्पतालों को कैंसर मरीजों के ईलाज के नाम पर देती है.

रिम्स का कैंसर विभाग सिर्फ दो डॉक्टर डॉ अनूप कुमार और अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ  रश्मि सिंह के भरोसे है. इसके अलावा इतने सिर्फ तीन नर्स ही कार्यरत हैं. नर्सों के आभाव के कारण महिलाओं के कीमो के दौरान महिला प्यून से काम चलाना पड़ता है. कैंसर का ईलाज कराने अस्पताल में प्रतिमाह 450 से 500 नए मरीज आते हैं पर ज्यादातर मामलों में डॉक्टर उन्हें सीएमसी वैल्लोर, एम्स और टाटा कैंसर अस्पताल रेफर कर देते हैं.

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चार से पांच सुपर स्पेशलिटस्ट डॉक्टर  बहाल कर ले तो राज्य सरकार के बच जाएंगे 22 से 25 करोड़

राज्य से प्रति वर्ष कैंसर से ईलाज के लिए राज्य सरकार अन्य अस्पतालों को सलाना 20 से 25 करोड़ देती है. लेकिन राज्य सरकार एक से दो लाख रुपये प्रतिमाह देकर चार से पांच सुपर स्पेशलिटस्ट डॉक्टर बहाल कर ले तो राज्य सरकार के इतने पैसे बच जाएंगे. हालांकि विभाग ने इसके लिए पद सृजित भी किया है, स्वास्थ्य विभाग की सचिव ने रिम्स निदेशक को डॉक्टरों कि नियुक्ति करने के लिए विज्ञापन निकाल कर बहाल करने हो भी कहा है, लेकिन रिम्स प्रबंधन के उदासिन रवैये के कारण अधिकतर मरीजों को अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है.

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कैंसर के ईलाज के लिए रिम्स में मात्र दो डॉक्टर 

स्वास्थ्य विभाग करोड़ों के फंड स्वास्थ्य सुधार की दिशा में काम कर रही है पर कैंसर के ईलाज के लिए रिम्स में मात्र एक डॉक्टर है. पूरा कैंसर विभाग एक डॉक्टर और एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे चल रहा है. हर माह करीब 500 कैंसर के मरीज रिम्स मे ईलाज कराने आते हैं. डॉक्टरों  के आभाव में कैंसर के मरीजों को अन्य बड़े और महंगे अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है.

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अधिकतर मामलों में दिल्ली एम्स, सीएमी वैल्लोर और टाटा कैंसर अस्पताल जाने की सलाह

रिम्स में प्रति माह करीब 500 कैंसर के मरीज आते हैं. जिनका ईलाज रिम्स में किया जाता है, पर अधिकतर मामलों में डॉक्टर  मरीजों को दिल्ली एम्स, टाटा कैंसर अस्पताल, सीएमसी वैल्लोर जैसे अस्पतालों में जाकर ईलाज कराने की सलाह दे देते हैं. राज्य से करीब हर माह सैंकड़ों मरीज वैल्लोर अपने किडनी, कैंसर जैसे बीमारियों का ईलाज कराने जाते हैं.

टाटा ट्रस्ट खोलेगी कैंसर अस्पताल

राज्य सरकार ने टाटा ट्रस्ट को एक रुपये के टोकन मनी पर रिनपास में 23.5 एकड़ जमीन 30 साल के लिए कैंसर अस्पताल खोलने के लिए दिया गया है. टाटा ट्रस्ट के दवारा खोले जाने वाले कैंसर अस्पताल में सीजीएचएस के दर पर ईलाज होगा. झारखंड के मरीजों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी. बता दें कि इससे पहले टाटा को जमीन देने पर वित्त विभाग ने आपत्ति दर्ज करायी थी, ये कहा था कि मुंबई स्थित कैंसर अस्पताल 4.5 एकड़ में है, तो रांची में इतने जमीन की आवश्यकता क्यों. हालांकि कैबिनेट की ओर से 23.5  एकड़ जमीन देने पर स्वीकृति दे दी गयी है.

हमने रिम्स निदेशक को निर्देशित किया है, विभाग को जिस जिस तरह के डाॅक्टर चाहिए, विज्ञापन निकाल कर रिक्रूट करें.
निधि खरे, स्वास्थ्य सचिव

हमने विभाग के क्लियरेंस के लिए भेजा है. उसके आने पर विचार करेंगे.
रिम्स अधीक्षक

 

 

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