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कई माह से नहीं मिला मानदेय, आर्थिक तंगी झेल रहे पारा शिक्षक की मौत

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  • 45 वर्षीय पारा शिक्षक पिछले महीने से बीमार था
  • प्रखंड के 190 पारा शिक्षक आर्थिक तंगी की मार झेलने को मजबूर

Pakur: पाकुड़ के मोहनपुर स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय के पारा शिक्षक महेंद्र प्रसाद भगत आर्थिक तंगी झेलते हुए शनिवार को चल बसे. पिछले महीने से बीमार महेंद्र भगत पिछले कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण सही ढंग से इलाज भी नहीं करा पा रहे थे.

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आर्थिक स्थित हो गयी थी खराब

महेंद्र वर्ष 2008 से इस विद्यालय में कार्यरत थे. काफी दयनीय स्थिति में रहे इस पारा शिक्षक को फरवरी, मार्च व मई का मानदेय नहीं मिल पाया था. जिस कारण आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी. परिजनों ने बताया कि पक्की नौकरी व वेतनमान की आस में शादी तक नहीं की थी. बीते माह पारा शिक्षक को गम्भीर बीमारी ने जकड़ा. जिसका इलाज सामर्थ्य के अनुरूप किया जा रहा था. आर्थिक स्थिति कमजोर रहने से परिजन विवश हो गये थे.

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सरकारकी गलत नीति के कारण हुई मौतः प्रखंड अध्यक्ष

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पारा शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष मानिक मंडल ने बताया कि सरकार की गलत नीति के कारण पारा शिक्षक की मौत हो गयी. बीते तीन माह से मानदेय न दिये जाने से प्रखंड के 190 पारा शिक्षक आर्थिक तंगी की मार झेलने को मजबूर हैं. परिवार के भरण-पोषण में काफी कठिनाई झेलनी पड़ रही है. इसको लेकर जल्द ही कमिटी की बैठक कर आवश्यक निर्णय लिया जायेगा. वहीं इस संबंध में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी दीनबन्धु मोदी ने बताया कि इसकी जानकारी नहीं मिली है. पारा शिक्षकों को शायद दो माह का मानदेय उपलब्ध करा दिया गया होगा. पारा शिक्षक की मौत एक दुखद घटना है. पारा शिक्षकों का मानदेय भुगतान जल्द हो, इसके लिए प्रयास किया जायेगा.

फरवरी से रुका है पारा शिक्षकों का मानदेय

राज्य में महेंद्र के पहले भी कई पारा शिक्षकों की मौत हो चुकी है. पारा शिक्षकों को फरवरी माह से ही मानदेय नहीं मिला है. विगत दिनों अप्रैल माह का मानदेय दिया गया. लेकिन इसके साथ ही परियोजना ने 10 जून तक मई का मानदेय देने की बात की थी. जो पारा शिक्षकों को नहीं मिला. जबकि इस संबध में परियोजना अधिकारियों का कहना है कि जिलावार इस संबध में पत्र जारी किया जायेगा. तब पारा शिक्षकों को मानदेय मिलेगा. परियोजना अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि पारा शिक्षकों के बकाया मानदेय भुगतान में अभी और समय है.

आंदोलन के दौरान भी हो चुकी है पारा शिक्षकों की मौत

सिर्फ मानदेय ही नहीं कड़कडाती ठंड में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के दौरान भी पारा शिक्षकों की मौत हुई थी. इसके बाद भी मुख्यमंत्री ने पारा शिक्षकों के प्रति कोई सकारात्मक पहल नहीं की. इन्हें नियमित मानदेय देने की बात तो की गयी, लेकिन अभी तक ये हाशिये पर जिंदगी बिता रहे हैं. मानदेय रोके जाने के बाद राज्य के अलग अलग हिस्सों से लगातार पारा शिक्षकों के मौत की खबरें आ रही हैं, फिर भी न ही इनका बकाया भुगतान हो रहा और न ही इनके लिए सरकार कोई पहल कर रही है.

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