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पलामू: 19 वर्षों में भी नहीं हो सका एक नहर का निर्माण, एक करोड़ 35 लाख हो चुके हैं खर्च

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Dilip Kumar

Palamu:  पलामू जिले में खेत हो या फिर गला, दोनों बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. ऐसा नहीं है कि खेतों और गले तक पानी पहुंचाने के लिए सरकारी राशि खर्च नहीं की गयी है. बावजूद सरकार और नौकरशाह के लापरवाह रवैये के कारण योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी हैं.

नतीजा अलग राज्य बनने के बाद से जहां खेत सिंचाई के मुक्कमल व्यवस्था से, वहीं लोग ठोस पेयजलापूर्ति के लिए तरस रहे हैं.

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 2000 में शिलान्यास के बाद नहीं पूरी हुई परता में लघु नहर योजना

पलामू जिले की वृहद उत्तर कोयल मुख्य नहर हुसैनाबाद अनुमंडल के मोहम्मदगंज भीम बराज से निकली है. मुख्य नहर के 21 आरडी से परता लघु नहर का निर्माण कार्य 19 वर्षों में भी पूरा नहीं हो सका. जबकि इस योजना पर अबतक 1 करोड़ 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं.

मालूम हो कि वर्ष 2000 में संजय कुमार सिंह विधायक चुने गये थे. उन्होंने इसी वर्ष परता लघु नहर निर्माण का पहली बार शिलान्यास किया था. तब किसानों की आस जगी थी कि अब उनके खेतों तक भी पानी पहुंच पायेगा, उनकी स्थिति बदलेगी.

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नेता और अधिकारी बदलते रहे, लेकिन योजना को नहीं दिया मूर्त रूप

सन 2000 में इसके निर्माण के लिए 20 लाख रुपये की निविदा निकाली गई थी. पैसा निकल गया. मगर निर्माण नहीं हो सका. वर्ष 2005 में कमलेश कुमार सिंह विधायक चुने गये. संयोग से वह झारखंड के सिंचाई मंत्री थे.

उन्होंने 45 लाख रुपये की लागत से परता लघु नहर के निर्माण की निविदा निकलवाई. उन्होंने कार्य स्थल पर 2006 में शिलान्यास किया. 45 लाख रुपये तो निकल गयें. मगर लघु नहर का काम पूरा नहीं हुआ. इसी तरह अनुमंडल स्तर के कई पदाधिकारी और चले गए, लेकिन उन्होंने इस योजना को पूरा कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी.

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1500 फीट निर्माण के बाद योजना हुई बंद 

पुनः 2009 में संजय कुमार सिंह यादव को जनता ने विधान सभा भेजा. उन्होंने भी परता लघु नहर की निविदा निकलवाई.

अब इसकी लागत 70 लाख रुपये थी. 2011 में नहर का निर्माण सिर्फ 15 सौ फिट तक ही हो पाया. साथ ही विभिन्न जगहों पर पुलिया का निर्माण कर पैसे की निकाशि कर ली गई.

पांच हजार एकड़ की जगह डेढ़ सौ एकड़ में होती है सिंचाई  

किसानों ने बताया कि यह योजना शुरु से ही लूट खसोट का श्रोत बनती रही. किसी दल की सरकार या जन प्रतिनिधि ने ईमानदारी के साथ प्रयास नहीं किया. उन्होंने बताया कि इसके निर्माण हो जाने से तीन पंचायत की पांच हजार एकड़ भूमि सिंचित होती. फिलहाल करीब डेढ़ सौ एकड़ में सिंचाई होती है. उन्होंने बताया कि किसानों के लिए इसके अलावा अन्य कोई साधन भी नहीं है.

पंसस के आग्रह पर कोई कार्रवाई नहीं 

दो पंचायतों के पंचायत समिति सदस्यों रामप्रवेष सिंह व विजय कुशवाहा ने बताया कि किसानों व इससे जुड़े जनप्रतिनिधियों ने जल पथ प्रमंडल मेदिनीनगर के कार्यपालक अभियंता के साथ साथ कई सिंचाई मंत्री व उपायुक्त से मिलकर लघु नहर का निर्माण पूरा कराने की मांग की.

मगर अबतक स्थिति जस की तस है. किसानों ने बताया कि परता लघु नहर का निर्माण होगा. यह सुन सुन कर उनके कान पक गये. उन्होंने सोचा था कि सिंचाई की व्यवस्था होगी तो उनके हालात सुधरेंगे. मगर युवावस्था से बुढ़ापा आ गया. स्थिति नहीं बदली.

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