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RTI में सीओ कार्यालय ने कहा- जमीन सरकारी है, फिर भी CO ने कर दी निबंधक से रजिस्ट्री की सिफारिश

Ranchi/Bokaro: दो मार्च 2020 को राज्य के मुखिया हेमंत सोरेन गोड्डा में लोगों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा था कि झारखंड में किसी तरह का भ्रष्टाचार अब बर्दास्त नहीं किया जायेगा. वो जमीन से संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के बारे ऐसा कह रहे थे. उन्होंने कहा था कि म्यूटेशन और जमीन संबंधित काम के लिए लोगों को सीओ कार्यालय का चक्कर कटवाया जाता है. रिश्वतखोरी होती है और लोगों को परेशान किया जाता है. हाल ही में सरकार की तरफ से ऐसे ही मामलों को लेकर कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई है. ऐसा ही एक मामला न्यूज विंग के पास आया है. बोकारो जिले के कसमार प्रखंड में सरकारी जमीन की रजिस्ट्री कर देने की सिफारिश वहां की तत्कालीन सीओ मोनिया लता ने अनुमंडल निबंधक (रजिस्ट्रार) से कर दी.

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2012 में सीओ कार्यालय ने इस जमीन को बताया था सरकारी लैंड

जिस जमीन की रजिस्ट्री करने की सिफारिश सीओ मोनिया लता ने लिखित रूप से रजिस्ट्रार से कर दी. उस जमीन को उन्हीं के कार्यालय ने 2012 में सरकारी बताया था. आरटीआइ के माध्यम से सीओ कार्यालय से पूछा गया था कि मौजा कमलापुर, हल्का 5, थाना नंबर 76, खाता नंबर 39/120, रकबा 1.20 एकड़ और खाता नंबर 13/1 और 13/3, रकबा 11.54 एकड़ भूमि की वर्तमान में जमाबंदी किसके नाम से चल रही है. जमाबंदी किस आधार पर कायम की गयी है और इस पर मालिकाना हक किसका बनता है.

इस सवाल का जवाब आरटीआइ के माध्यम से सीओ कार्यालय ने दिया. जबाव में कहा गया कि जिस जमीन के बारे पूछा गया है उसकी जमाबंदी नहीं चल रही है. इसलिए किस आधार पर जमाबंदी की गयी और इस पर मालिकाना हक किसका है, जैसे सवाल ही नहीं बनते हैं.

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बिना म्यूटेशन के ही कर दी रजिस्ट्री की सिफारिश

11 नवंबर 2019 को कसमार प्रखंड की सीओ की हैसियत से मोनिया लता ने अवर निबंधक (बेरमो) को एक सिफारिश पत्र लिखा. सीओ ने अपने पत्र में लिखा कि यह जमीन सर्वे के मुताबिक आदिवासी खाते की है. 24 अप्रैल 1918 के केवाला संख्या 265सी के मुताबिक बाबू जगरनाथ सिंह के नाम पाया गया. जगरनाथ सिंह ने बाद में जमीन निवारण चंद्र अड्डी और दूसरों को 05 सितंबर 1955 को दे दी. 1955 से लेकर 2016 तक लगान रसीद भी कट रही है और इस जमीन पर निवारण चंद्र अड्डी का कब्जा है. इसलिए जमीन की रजिस्ट्री की जा सकती है. जबकि आरटीआइ के माध्यम से इसी कार्यालय ने इस जमीन को सरकारी बताया था. कहा गया था कि इस जमीन पर किसी का मालिकाना हक नहीं है. साथ ही सीओ के पद पर रहते हुए गलत तरीका अपनाते हुए मोनिया लता ने निबंधक से जमीन की रजिस्ट्री कर देने की सिफारिश की.

इस जमीन को लेकर कसमार प्रखंड में और भी खेल हुए, पढ़िए अगली किस्त में.

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