Chatralok sabha election 2019

वोट कम और माफी ज्यादा मांग रहे चतरा से BJP प्रत्याशी सुनील सिंह, हो रहा भारी विरोध-देखें वीडियो

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Dilip Kumar

Palamu: झारखंड की 14 में से 13 लोकसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी चुनाव लड़ रही है. सभी सीटों पर उम्मीदवार अपनी जीत के दांवे भी कर रहे हैं. लेकिन परिस्थितियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं.

चतरा संसदीय सीट पर इसकी एक बानगी देखने को मिल रही है. यहां भाजपा उम्मीदवार और इसी सीट से सांसद रहे सुनील सिंह का भारी विरोध हो रहा है. जगह-जगह कार्यकर्ता, समर्थक और जनता सुनील सिंह का खुलकर विरोध कर रहे हैं. कई जगहों का वीडियो भी वायरल हुआ, जिससे सुनील सिंह की राह काफी कठिन नजर आ रही है.

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विरोध से काफी आहत हैं सुनील सिंह

चतरा लोकसभा के भाजपा के प्रत्याशी सुनील सिंह इन दिनों अपने खिलाफ हो रहे लगातार विरोध से आहत हैं. और अपने आप को काफी असहाय महसूस कर रहे हैं.

निवर्तमान सांसद श्री सिंह वोट कम और क्षेत्र की जनता से माफी ज्यादा मांग रहे हैं. इन्हें जनता की इतनी जलालत झेलनी पड़ रही है, जिसका इन्हें खुद अंदाजा तक नही था.

मोदी लहर में पहुंचे थे संसद

2104 में भाजपा ने इन्हें चतरा से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था. मोदी लहर पर सवार होकर इन्होंने चुनावी वैतरणी को बड़े ही सहज ढंग से पार कर ली और 178026 वोट से चुनाव जीतकर संसद की चौखठ तक पहुंचे.

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चुनाव पूर्व सर्वे भी था सांसद के खिलाफ

भारतीय जनता पार्टी द्वारा चुनाव पूर्व कराये गये सर्वे भी इनके खिलाफ था. लेकिन काफी जद्दोजहद के बीच अंतिम समय में भाजपा का टिकट झटकने में सुनील सिंह पुनः कामयाब हो गये.

बताया जाता है कि दिल्ली दरबार में इनकी लॉबी काफी मजबूत थी, जिसके कारण चर्चा में रहे तमाम प्रत्याशियों को पटखनी देने में सफल रहे.

इन्हें खुद अंदाजा नहीं था कि क्षेत्र में जनता की इतनी जलालत का सामना करना पड़ेगा. इसबार भी मोदी लहर के भरोसे ये अपनी चुनावी नैया पार करना चाहते हैं. लेकिन इस बार राह आसान दिखाई नहीं पड़ रही है. इनके कार्यकर्ता भी विरोध नहीं झेल पा रहे हैं.

भाजपा नेत्री को जलाना पड़ा था विरोध में लगे पोस्टर

अभी हाल ही का वाक्या है, लोकसभा क्षेत्र के लेस्लीगंज प्रखंड के चैरा गांव में सांसद के खिलाफ ग्रामीणों ने चैराहे पर बैनर टांग रखा था. बैनर में लिखा था ‘लापता सांसद के पक्ष में वोट मांगकर शर्मिंदा न करे.’ ‘सड़क नहीं तो-वोट नहीं’ जैसी बातें लिखी गई थी. जिसे भाजपा महिला मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मंजुलता ने पोस्टर को फाड़कर आग के हवाले कर दिया.

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खुलकर हो रहा है विरोध

क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं होने से जनता का गुस्सा लाजिमी है. इसके लिये ग्रामीण सांसद को जिम्मेवार मान रहे हैं. फिर से सुनील सिंह को टिकट दिये जाने से ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है.

सांसद प्रत्याशी सुनील सिंह के क्षेत्र भ्रमण के दौरान कई बार ग्रामीण खुलकर विरोध दर्ज कर चुके हैं. और सांसद भी चुपचाप हाथ जोड़े शर्मिंदगी महसूस करते देखे गए.

पिछड़े इलाके में होती है चतरा की पहचान

चतरा लोकसभा की गिनती देश के पिछड़े लोकसभा क्षेत्र में होती है. गरीबी, पलायन, नक्सलवाद इस क्षेत्र की पहचान है. इस कलंक को मिटाने के लिये सांसद के द्वारा कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया. पिछले चुनाव में इन्होंने नामांकन के लिये रेल से आने की बात कही थी, लेकिन यह इनका आश्वासन कोरा निकला.

एक भी उद्योग-धंधे इनके कार्यकाल में नहीं लगे. अलबत्ता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कोल परियोजना को खुलवाने में राज्यसभा सांसद की अहम भूमिका रही थी. किसी कारणवश ये उद्घाटन नहीं कर सके. इटखोरी महोत्सव, नगर महोत्सव को ही इन्होंने बड़ा विकास समझ लिया.

खबर प्रकाशित कर नहीं बनायी सड़क

सांसद ने अखबार में खबर प्रकाशित करवाई थी कि क्षेत्र की दो सड़कें डालटनगंज एनएच-33 से सगालीम, तरहसी, मनातू, चक, रानीगंज, इमामगंज होते शेरघाटी तक और दूसरी बगरा एनएच-22 से लावालौंग, रामपुर, रिमी, द्वारिका पांकी, सगालिम होते हुए लेस्लीगंज से जोड़ना था, लेकिन यह भी इनका आश्वासन झूठा निकला.

एक भी योजना का शिलान्यास नहीं

सांसद सुनील सिंह ने पांकी विस क्षेत्र में सांसद मद की एक भी योजना का शिलान्यास नहीं किया गया. आरोप यहां तक है कि अपने चहेते दलालों के माध्यम से सांसद मद की योजनाओं का शिलान्यास करवाया गया. और पार्टी कार्यकर्ताओं को योजनाएं न देकर, जो इनके चहेते थे उनके कहने पर सांसद कोटे की राशि की बंदरबाट कर दी.

राजेन्द्र साहू भी करेंगे परेशान

भाजपा के बागी राजेन्द्र साहू भी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. इन्हें वैश्य समाज के वोटों पर भरोसा है. अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे हैं. इन्होंने भी पूरी ताकत झोंक दी है. अगर राजेन्द्र साहू का असर रहा तो सुनील सिंह के लिए मुश्किलें बढ़ सकती है.

स्थानीय नेता भी बड़ा मुद्दा

इस बार चतरा लोकसभा से स्थानीय प्रत्याशी की मांग शुरू से जोड़ पकड़ने लगी थी. और उम्मीद थी कि किसी स्थानीय प्रत्याशी को ही भाजपा अपना उम्मीदवार बनायेगी. लेकिन नतीजा उम्मीद के विपरीत रहा.

चंदवा में लोकसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन से ही सांसद सुनील सिंह के खिलाफ विरोध के स्वर फूटने लगे थे और मंडल स्तर से जिला स्तर तक सुनील सिंह के खिलाफ केंद्र को रिपोर्ट गई थी. लेकिन ये अपनी पकड़ के कारण तमाम विरोधियों को किनारे करते हुए पुनः टिकट लेने में सफल रहे.

आजाद भारत के इतिहास में 1957 से आज तक कोई भी स्थानीय व्यक्ति चतरा का सांसद नही बना. यह कलंक कब मिटेगा यह भविष्य के गर्भ में है.

विरोध के भय से अभी तक पांकी नहीं पहुंचे

सांसद सुनील सिंह को पांकी के लोहरसी रोड स्थित रेणु टाकीज में कार्यकर्ताओं की बैठक में 10 अप्रैल को शामिल होना था. लेकिन सांसद नहीं आये. किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य प्रेम सिंह एवं पांकी विस क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों के साथ औपचारिकता पूरी कर बैठक को समाप्त किया गया.

उन्हें पुरजोर विरोध की सूचना सूत्रों से मिल गई थी. क्षेत्र के सराधू, टनड़वा में भी इन्हें पुरजोर विरोध का सामना करना पड़ा. भाजपा समर्थक सुनील सिंह वापस जाओ, सुनील सिंह मुर्दाबाद जैसे नारे उनके समक्ष ही लगाने लगे थे.

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