JharkhandRanchiTop Story

सामान के लिए कैरी बैग देना शोरूम की जिम्मेवारी, ना करें अलग से भुगतान

Priyanka

Ranchi: अमूमन आप जब कभी शॉपिंग के लिए जाते हैं, तो बड़े-बड़े शोरूम हो या छोटी दुकान आपसे कैरी बैग के पैसे वसूलते हैं. इन कैरी बैग की कीमत 2 रुपये से लेकर 10-15 रुपये तक होती है. जो बैग के साइज और मटेरियल (मसलन पेपर का बना है, या जूट या फिर कपड़े का) पर भी निर्भर करता है.

ये आज कंपनी की कमाई का एक जरिया बन चुका है. कैरी बैग के पैसे चुकाने की हम सभी को आदत सी हो गयी है. और छोटी रकम सोच कर हम इस पर गौर भी नहीं करते.

advt

इसे भी पढ़ेंःबाटा ने कैरी बैग के वसूले तीन रुपये, अब देने पड़ेंगे नौ हजार

आमतौर पर ग्राहक इन बातों पर ध्यान नहीं देते और अपने अधिकारों के लिए सजग नहीं होते हैं. लेकिन हकीकत ये है कि कैरी बैग के पैसे लेना गलत है.

नियम ये कहता है कि शोरूम हो या किसी भी तरह की शॉप उसे ग्राहकों को कैरी बैग मुफ्त में देना चाहिए. जबकि ऐसा होता नहीं है. लेकिन एक ग्राहक की सजगता के कारण कैरी बैग के पैसे लेने के मसले को फिर से सुर्खियों में ला दिया.

तीन रुपये के बदले नौ हजार का जुर्माना

चंडीगढ़ के इस ग्राहक की सजगता के कारण हो सकता है कि कैरी बैग के नाम पर हो रही लूट से ग्राहकों को निजात मिल पाये. दरअसल दिनेश प्रसाद रतुड़ी ने 5 फरवरी, 2019 को बाटा के शोरूम से 399 रूपये में जूते खरीदे थे.

और जब उनसे काउंटर पर कैरी बैग के लिए पैसे मांगे गए तो उन्होंने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि कैरी बैग देना कंपनी की जिम्मेदारी है. हालांकि, आखिर में कोई विकल्प न होने पर उन्हें बैग खरीदना पड़ा. कैरी बैग सहित उनका बिल 402 रूपये बन गया.

बाद में दिनेश ने इसकी शिकायत कंज्यूमर फोरम में की. जिसके बाद बाटा को कैरी बैग की कीमत लेने के एवज में 9 हजार रुपये चुकाने पड़े.

इसे भी पढ़ेंः चौकीदार जयंत सिन्हा चुनाव में नजर आ रहे हैं नामजद फरार वांरटी के साथ

चंडीगढ़ में जिला स्तरीय उपभोक्ता फोरम ने बैग के पैसे लेने को गलत ठहराते हुए जुर्माने के साथ-साथ मामले की शिकायत और मुकदमे की खर्च की राशि भी देने को कंपनी को चुकाने को कहा.

पर्यावरण संरक्षण का दिया गया हवाला

हालांकि, इस शिकायत पर बाटा ने अपना पक्ष रखते हुए पर्यावरण संरक्षण का हवाला दिया. उसने कहा कि ऐसा पर्यावरण सुरक्षा के मकसद से किया है. लेकिन, उपभोक्ता फोरम का कहना था कि अगर कंपनी पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ऐसा कर रही थी तो उसे ये बैग मुफ़्त देना चाहिए था.

कैरी बैग देना दुकान की जिम्मेवारी

जाहिर है, अगर हम किसी दुकान से सामान खरीद रहे हैं, तो सामान को ले जाने के लिए कैरी बैग देना शोरूम की ही जिम्मेदारी होती है. करीब दो-ढाई साल पहले से इस तरह से कैरी बैग के पैसे लेने का चलन शुरू हुआ है, जब से प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सख्ती से बैन लगा है. ऊपर से किसी मॉल में आप अपना बैग लेकर जा सकते हैं, तो कहीं नहीं ऐसे में कंफ्यूजन होता है.

इसे भी पढ़ेंः 13 राज्यों की 95 सीटों पर वोटिंग कल, हेमा मालिनी, राज बब्बर समेत कई दिग्गजों का तय होगा भाग्य

 

कैरी बैग प्रचार का जरिया

गौर करनेवाली बात ये भी है कि जिन कैरी बैग के हम पैसे देते हैं, उनपर कंपनी या दुकान का नाम लिखा होता है. यानी ये उनके प्रचार का एक तरीका भी है.

ऐसे में ये ग्राहकों का दोहरा हनन है. एक तो ग्राहक उस कैरी बैग के पैसे चुका रहा, जो उसका हक है. दूसरा ये कि ग्राहकों की बगैर जानकारी में आये कंपनी अपना प्रचार भी कर रही है. हालांकि, अगर कैरी बैग सादा हो तो भी कंपनी उसके लिए पैसे नहीं ले सकती है.

इसे भी पढ़ेंःसाउथ कश्मीर के रिटर्निंग ऑफिसर की घसीटकर पिटाई, सेना पर आरोप

प्रशासन क्यों है खामोश

ग्राहकों को अपने अधिकार की जानकारी नहीं हो, ये बात फिर भी समझ में आती है. लेकिन ऐसा तो नहीं है कि प्रशासन या नगर निगम को इस नियम की जानकारी नहीं हो. ना ही इस बात से इनकार किया जा सकता है कि शोरूम में कैरी बैग के लिए वसूले जा रहे पैसे के विषय में प्रशासन को जानकारी ना हो.

अब सवाल ये उठता है कि जानकारी होते हुए भी प्रशासन खामोश क्यों रहा और है. क्यों नहीं इस तरह के मॉल्स के खिलाफ कार्रवाई की गई. क्यों नहीं इस गैर-कानूनी वसूली को रोका गया.

इसे भी पढ़ेंः धनबल के इस्तेमाल को लेकर वेल्लोर सीट पर चुनाव रद्द, त्रिपुरा में आगे बढ़ी तारीख

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: