
New Delhi: राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 की त्वरित एंटीबॉडी जांच किट का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है. इन किट्स पर उस वक्त तक के लिए रोक लगा दी गयी है जब तक कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) इसकी सटीकता की फिर से जांच नहीं कर लेती है.
आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक आइसीएमआर द्वारा गठित टीमें उन त्वरित एंटीबॉडी जांच किट का विश्लेषण कर रही हैं, जो दो चीनी कंपनियों से खरीदी गयी थीं.
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गलत नतीजे दे रही थी किट
उन्होंने बताया कि इस जांच का उद्देश्य इसकी (त्वरित एंटीबॉडी जांच किट की) दक्षता का पता लगाना है क्योंकि कुछ राज्यों से ये खबरें आयी थीं कि ये त्रुटिपूर्ण हैं और गलत नतीजे दे रही हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शुक्रवार को कहा था कि जांच किट के नतीजे जगह-जगह पर अलग-अलग आ रहे हैं और ‘‘इन पर विश्वास नहीं किया जा सकता.’’
शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनके हवाले से कहा, ‘‘यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इसकी सटीकता पर टिप्पणी नहीं की है. आइसीएमआर अपनी प्रयोगशाला में जांच और किट की दक्षता की समीक्षा कर रही है तथा जल्द ही नये दिशानिर्देश जारी किये जायेंगे.’’
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दूसरी खेप भेजने को कहा जायेगा
एक अधिकारी ने बताया, ‘‘शुक्रवार को राज्यों के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक बैठक होने के बाद उनसे उस वक्त तक त्वरित एंटीबॉडी जांच किट का उपयोग रोकने को कहा गया, जब तक कि आइसीएमआर इसकी सटीकता पर मुहर नहीं लगा देती है.’’
आइसीएमआर के महामारी एवं संचारी रोग विभाग प्रमुख डॉ रमन आर गंगाखेडकर ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा था कि त्वरित जांच और आरटी-पीसीआर जांच के नतीजों में अत्यधिक अंतर देखा जा रहा है जो कुछ राज्यों में छह से 71 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि त्वरित जांच किट की खेप त्रुटिपूर्ण पायी गयी तो कंपनी को उसकी जगह दूसरी खेप भेजने को कहा जायेगा.
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