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गिरफ्तार पारा शिक्षक भेजे गए जेल, लगी आठ संगीन धाराएं, रांची के बाद दूसरे जिलों के पारा शिक्षक भी होंगे बर्खास्त

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Ranchi: झारखंड स्थापना दिवस (15 नवंबर) के दिन गुरुवार को मोरहाबादी मैदान में राज्य के पारा शिक्षकों के उग्र प्रदर्शन एवं मुख्यमंत्री को प्रदर्शन के दौरान काला झंडा दिखने के मामले में रांची पुलिस ने 280 पारा शिक्षकों को शुक्रवार शाम जेल भेज दिया. इनमें 16 महिला पारा शिक्षिकाएं भी शामिल हैं. पुलिस ने पारा शिक्षकों पर आठ धाराएं लगायी हैं. उनपर धारा 144, 341, 342, 323, 307, 353, 337 और 338 लगा है. पारा शिक्षकों को होटवार स्थित बिरसा करावास भेजा गया है. दूसरी ओर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग पारा शिक्षकों की 15 नवंबर के दिन की उपस्थिति मंगा कर उन सभी पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है.

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जानिये लगी हैं कौन सी धाराएं, क्या है अपराध और क्या है सजा

विरोध प्रदर्शन कर रहे 280 पारा शिक्षकों पर कुल आठ धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है. पारा शिक्षकों पर धारा 144, 341, 342, 323, 307, 353, 337 और 338 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

धारा 341-  गलत तरीके से रोकना, इसमें एक महीने तक जेल हो सकती है, या पांच सौ रुपये का आर्थिक दंड, या दोनों. यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.

धारा 342- किसी व्यक्ति को ग़लत तरीके से प्रतिबंधित करना. सजा – एक वर्ष कारावास या एक हजार रुपए जुर्माना या दोनों. यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है.

धारा 144– धारा 144 शांति व्यवस्था को बनाये रखने के लिए लगायी जाती है. इस धारा को विशेष परिस्थितियों जैसे दंगा, लूटपाट, आगजनी, हिंसा, मारपीट को लेकर, फिर से शान्ति स्थापित करने के लिए किया जाता है. इस धारा को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी जिलाधिकारी द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी किया जाता है जिसके बाद उस तनावपूर्ण इलाके में ये धारा लागू कर दी जाती है. उल्लंघन करनेवाले आरोपी को एक साल कैद की सजा भी हो सकती है. वैसे ये एक जमानती अपराध है जिसमें जमानत हो जाती है.

धारा 323- जानबूझ कर किसी को चोट पहुंचाना. एक साल का कारावास या एक हजार रुपए जुर्माना या दोनों.

धारा 307- अगर कोई किसी की हत्या की कोशिश करता है, लेकिन जिस शख्स पर हमला हुआ है, उसकी जान नहीं जाती तो इस तरह के मामले में हमला करनेवाले शख्स पर धारा 307 के अधीन मुकदमा चलता है. हत्या की कोशिश करनेवाले आरोपी को आइपीसी की धारा 307 में दोषी पाए जाने पर कठोर सजा का प्रावधान है. आम तौर पर ऐसे मामलों में दोषी को 10 साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं. जिस आदमी की हत्या की कोशिश की गई है अगर उसे गंभीर चोट लगती है, तो दोषी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

धारा 353- किसी भी ऐसे व्यक्ति पर, जो लोक सेवक हो, उस समय जब लोक सेवक के नाते वह अपने कर्तव्य का निष्पादन कर रहा हो, या उस व्यक्ति को लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के आशय से, या लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में किए गये या किए जाने वाले किसी कार्य के परिणामस्वरूप हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा.

धारा 337 – जो भी कोई किसी व्यक्ति को उतावलेपन या उपेक्षापूर्वक ऐसे किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो, चोट पहुंचाता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड जो पांच सौ रुपए तक हो सकता है, या दोनों से दंडित किया जाएगा. यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है. यह अपराध न्यायालय की अनुमति से पीड़ित व्यक्ति (जिसको चोट पहुंची है) के द्वारा समझौता करने योग्य है.

धारा 338 – जो भी कोई किसी व्यक्ति को उतावलेपन या उपेक्षापूर्वक ऐसे किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो, गंभीर चोट पहुंचाना कारित करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या एक हजार रुपए तक का आर्थिक दण्ड, या दोनों से दण्डित किया जाएगा. यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.

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आंदोलनकारी पारा शिक्षकों के विरुध होगी विभागीय कार्यवाहीः सचिव

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव एपी सिंह ने कहा कि विभाग ने 12 नवबंर को नोटिस जारी कर दिया था कि स्थापना दिवस के दिन जो भी शिक्षक स्कूल में अनुपस्थित रहेंगे उन पर विभागीय कार्यवाही करते हुये उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी. नोटिस के आलोक में विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों से 15 नवंबर की उपस्थिति स्कूलवार विभाग में सौंपने का आदेश निर्गत कर दिया है. सूची आने के बाद अनुपस्थिति पारा शिक्षकों की सेवा समाप्त विभाग की ओर से की जायेगी. पारा शिक्षकों का स्थापना दिवस के दिन प्रदर्शन करना किसी तरह से कानून संगत नहीं है. विभाग कानून तोड़नेवाले पारा शिक्षकों के खिलाफ न्यायसंगत कार्यवाही करेगा.

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