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एसडीएम मैडम कहती रहीं No लाठीचार्ज, सिपाही पारा शिक्षकों पर बरसाते रहे लाठियां, एसडीएम ने कहा- गलत तो हुआ ही है

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Ranchi: 15 नवंबर स्थापन दिवस समारोह के दौरान यह साफ तौर पर दिखा कि पुलिस के सिपाहियों पर प्रशासन और पुलिस को कोई जोर नहीं था. पुलिस वालों ने जिसे चाहा उसपर लाठियां बरसायीं. पत्रकारों को टारगेट कर पीटा. समारोह के लिए तैनात मजिस्ट्रेट की बात भी पुलिस के जवानों ने हवा में उड़ायी. इस बात के पुख्ता सबूत न्यूज विंग के पास हैं. एक वीडियो न्यूज विंग के पास है, जिसमें साफ तौर से टेंट के अंदर एडडीएम गरिमा सिंह लाठी चार्ज कर रहे पुलिस वालों को कहती रहीं NO लाठीचार्ज… NO लाठीचार्ज… लेकिन पुलिस के जवानों ने उनकी एक नहीं सुनी. वो पारा शिक्षकों पर लाठियां बरसाते रहे. एडसीएम मैडम के बॉडीगार्ड भी एसडीएम की बात बार-बार दोहराया. उन्होंने कहा कि लाठी नहीं चलानी है. लेकिन, कोई असर नहीं हुआ. पारा शिक्षकों को दौड़-दौड़ा कर पुलिस वालों ने पिटायी की. इस वीडियो को देखने के बाद ऐसा लगता है जैसे स्थापना दिवस की पूरी व्यवस्था कंट्रोल से बाहर थी. पुलिस और प्रशासन के बीच का तालमेल सही नहीं था. पुलिस के जवान मनमानी कर रहे थे. रैफ के जवानों ने भी मनमानी की.

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मेरे मना करने के पांच-छह सेकेंड बाद बंद हो गया था लाठीचार्जः एसडीएम

मामले पर न्यूज विंग से बात करते हुए एसडीएम गरिमा सिंह ने कहा कि यह मामला शायद टेंट के अंदर का है. वहां पर स्थिति ऐसी हो गयी थी कि चीजें दो-दो सेकेंड में बदल रही थी. मैंने NO लाठीचार्ज… NO लाठीचार्ज इसलिए कहा कि वो लोग गलत काम तो कर ही रहे थे. इसलिए मैंने टेंट में अंदर जाकर बोला था. मेरे बोलने से मुझे लगता है कि पांच सेंकेड में पुलिस वालों ने लाठी चलानी बंद कर दी थी. ऐसा नहीं है कि मैंने बोला था और लाठीचार्ज होता रहा.

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जब नहीं थी लाठीचार्ज की अनुमति, तो किससे आर्डर से हुआ लाठीचार्ज

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जब वहां मौजूद मजिस्ट्रेट जो साफ तौर से NO लाठीचार्ज… NO लाठीचार्ज कह रही हैं तो किसके आदेश से पुलिस के जवानों ने पारा शिक्षकों पर लाठियां चलानी शुरू की. क्या पुलिस के जवान अपनी मर्जी से काम कर रहे थे. क्या उन्हें किसी के आदेश या निर्देश की जरूरत नहीं थी या उन्हें पहले ही कहा गया था पारा शिक्षकों को देखते ही मारना शुरू कर देना है, किसी के आदेश या निर्देश का इंतजार नहीं करना है. ऐसे में क्या यह कहना गलत नहीं होगा कि आला अधिकारियों के काबू में आयोजन की व्यवस्था नहीं थी.

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