
Lohardaga: शुक्रवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दमनकारी रघुवर सरकार द्वारा पारा शिक्षकों व पत्रकारों पर लाठी चार्ज के खिलाफ मुख्यमंत्री का पुतला फूंका. मौके पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्य्क्ष मोजमिल अहमद ने कहा कि अमर शहीद बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि और झारखंड राज्य के स्थापना दिवस के दिन राज्य के पारा शिक्षकों के आंदोलन पर पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक दमन, लाठीचार्ज, अश्रुगैस फायरिंग किया जाना राज्य की रघुवर सरकार का तानाशाही होने का परिचायक है. यह सरकार जन आंदोलनों-शिक्षक-कर्मचारियों के आंदोलनों और कई तरह के न्यायपूर्ण मांगो को लेकर आंदोलनरत संगठनों को लाठी गोली से दबाना चाहती है. उन्होंने कहा कि एक कमजोर, डरपोक, अलोकप्रिय, जनविरोधी सरकार ही ऐसा कर सकती है. सरकार संवेदनहीन हो गयी है, इसलिए संवाद के बजाय संगीनों के साये में शासन चला रही है. यह घोर अलोकतांत्रिक कदम है.
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मीडियाकर्मियों पर लाठीचार्ज कायरतापूर्ण कार्रवायी
उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों और घटना को कवर कर रहे मीडिया के साथियों पर लाठीचार्ज करवाना नाकाम रघुवर सरकार कि कायरतापूर्ण व घिनौनी हरकत है. पारा शिक्षकों की न्यायोचित मांगों को पूरा करने की जगह उन पर लाठीचार्ज करवाना रघुवर सरकार कि असंवेनशीलता का परिचायक है. जिला सचिव रंथु उरांव ने कहा कि रघुवर सरकार ने हक व विरोध की आवाज को दबाने के लिए डंडे व पुलिस को अपना हथियार बना लिया है. अपना हक व अधिकार मांग रहे पारा शिक्षकों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया जाना काफी दुर्भाग्यपूर्ण व शर्मनाक है. यह रघुवर सरकार कि तानाशाही का जीता जागता उदाहारण है.
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झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्रमुख मांगे
◆ पारा शिक्षकों का स्थायीकरण किया जाये.
◆ सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार समान कार्य के लिए पारा शिक्षकों को समान वेतन दिया जाये.
◆ जिस पुलिस अफसर के आदेश से लाठीचार्ज किया गया उसे अविलंब बर्खास्त किया जाये एवं उस पर मुकदमा किया जाये.
◆ मीडिया के साथियों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उन्हें बर्खास्त किया जाये एवं उन पर मुकदमा दर्ज किया जाये.
कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला उपाध्यक्ष महावीर भगत, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष ऐनुल अंसारी , केंद्रीय सदस्य विष्णु प्रसाद साहू, जिला उपाध्यक्ष फ़ैयाज़ कुरेशी, अफरोज आलम, जसीम अंसारी, साबिर कुरैशी, शिव उराँव, इम्तियाज़ खान, सैयद सलीम, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला सचिव तासिम अहमद, बबलू खान, बाबू खान,शंकर विश्वकर्मा रुस्तम खान, हैदर अहमद, अयाज़ आलम, शंकर उराँव, उपेंद्र सिंह, संजय लोहरा, एनुल अंसारी, दशरथ गिरी,संजय विश्वकर्मा, वारिश अंसारी सहित अन्य उपस्थित थे.




