
Palamu : स्वतंत्रता सेनानी नीलांबर-पीतांबर और पांकी विधायक डा. शशिभूषण मेहता की तस्वीर पर असामाजिक तत्वों ने कालिख पोत दी है.
पलामू जिले के सदर और लेस्लीगंज के सीमावर्ती इलाके में मलय नदी के समीप महावीर मोड़ पर इस घटना को अंजाम दिया गया है. इसके अलावा तरहसी सीमा से लगने वाले इलाके लेस्लीगंज के साहद में लगे बोर्ड को उखाड़ कर फेंक दिया गया.
राज्य सरकार द्वारा गत 8 मार्च को लेस्लीगंज का नाम बदलकर नीलांबर-पीतांबरपुर किया गया है. लेस्लीगंज का नाम बदलकर नीलांबर-पीतांबरपुर किए जाने के मामले को पांकी विधायक डा. शशिभूषण मेहता ने विधानसभा में उठाया था. इसके बाद सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया.
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सीमावर्ती क्षेत्रों में लगाए गए हैं बोर्ड
लेस्लीगंज का नाम बदलकर नीलांबर-पीतांबरपुर किए जाने की जानकारी देने के लिए पांकी विधायक द्वारा सीमावर्ती इलाकों में जगह जगह सड़क किनारे बोर्ड लगाए गए हैं. लेस्लीगंज-सदर प्रखंड की सीमा पर महावीर मोड़ पर भी बोर्ड लगाया गया है. शुक्रवार को यहां लगे बोर्ड की तस्वीर पर कालिख पोती नजर आयी.
पांकी विधायक चार पर दर्ज कराएंगे प्राथमिकी
पांकी विधायक डा. शशिभूषण मेहता ने कहा कि एक साजिश के तहत लेस्लीगंज इलाके में जगह-जगह लगाए गए पहचान बोर्ड को निशाना बनाया गया है.
लेस्लीगंज के महावीर मोड़ पर जुरू के अनुप जायसवाल के निर्देश पर नेपाली ठाकुर और राधे यादव ने कालिख पोतने का काम किया है. इसी तरह तरहसी सीमा पर नंदन यादव द्वारा वहां लगे पहचान बोर्ड को उखाड़ कर फेंक दिया गया है. इन सभी के खिलाफ लेस्लीगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज करायेंगे.
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आदिवासी के नाम पर लेस्लीगंज का नाम कुछ लोगों को बर्दाश्त नहीं
पांकी विधायक ने कहा कि आदिवासी के नाम पर लेस्लीगंज का नाम किए जाने पर कुछ लोगों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है. यही कारण है कि ओछी राजनीति करते हुए स्वतंत्रता सेनानी नीलांबर-पीतांबर भाइयों की तस्वीर पर कालिख पोतने का कार्य किया गया है.
लेस्लीगंज के एसडीपीओ अनुप बड़ाइक ने बताया कि नीलांबर-पीतांबरपुर नाम से लगाए गए पहचान बोर्ड में कालिख पोते जाने की जानकारी उन्हें नहीं है. इस मामले में पता लगाया जा रहा है. अगर इस संबंध में विधायक द्वारा लिखित शिकायत दर्ज करायी जाएगी तो मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी.
1857 की क्रांति में नीलांबर-पीतांबर भाइयों ने दिखायी थी वीरता
नीलांबर-पीतांबर दोनों सगे भाई थे. वे चेरो खेरवार अनुसूचित जनजाति समाज से आते थे. उन्होंने 1857 की क्रांति में अपनी वीरता से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे. नीलांबर-पीतांबर के नेतृत्व में काफी संख्या में ग्रामीणों ने अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई लड़ी थी.
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