
Ranchi: कृषि अधारित सहकारिता बैंक में एजुकेशन लोन के नाम पर 30 करोड़ से अधिक की राशि प्लेसमेंट एजेंसियों व कौशल विकास से जुड़ी संस्थाओं के खाते में चली गयी. इतनी राशि लंबी अवधि के एजुकेशन लोन के नाम पर ऐसे संस्थानों के माध्यम से बांट दी गयी, जो कौशल विकास और प्लेसमेंट के नाम पर खेल कर रहे हैं.
लोन की राशि पहले तो कथित छात्रों के खाते में भेजी गयी और वहां से षडयंत्र के तहत वह राशि उन संस्थानों के खाते में चली गई. इस तरह शिक्षा लोन के नाम पर दी गई यह पूरी राशि संस्थानों के पास चली गयी. पिछले दो वर्षों की बात करें तो सहकारिता बैंक में 30 करोड़ से अधिक के लोन की डकैती हो चुकी है. इस घोटाले का खुलासा होने के बाद कई अधिकारी अब अपनी कालिख मिटाने में जुट चुके हैं, इधर, जांच करने की तैयारी भी की जा रही है. इस घोटाले को लेकर सहकारिता अध्ययन मंडल ने निबंधक सहयोग समितियां व विभागीय पदाधिकारियों से जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है. इसके बाद विभागीय स्तर से इसकी जांच शुरू की जा रही है.
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सहकारिता अध्ययन मंडल के प्रदेश अध्यक्ष बिजय सिंह ने बताया कि एक भी लोन पर संचिका में निदेशक मंडल से स्वीकृति नहीं ली गई है. दो वर्षों में 1512 लोगों के लोन स्वीकृत हुए हैं, जिससे और भी बड़े घोटाले की बू सामने आ रही है. उन्होंने बताया कि शिकायत मिल रही है कि इन सभी लोन स्वीकृति में 25 प्रतिशत तक की रिश्वतखोरी हुई है. उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि सरकार घोटालेबाजों को नियंत्रित करें, नहीं तो यह बैंक घोटाले की भेंट चढ़ जाएगा.
फर्जी एजुकेशन लोन की बनाया जाता है जरिया
एजुकेशन लोन लेने के नाम पर फर्जी तरह से पूरे कागजात बनाए जाते हैं. ऐसे काम के लिए किसी सक्रिय गिरोह की मदद ली जाती है. जिन संस्था को पैसे चाहिए वे अपने स्तर से प्रयास कर छात्रों के नाम पर लोन दिलाते हैं और बाद में उसी लोन की रकम को ले जाते हैं. इसके लिए ऐसे कथित छात्रों को कुछ कमीशन भी दिया जाता है.
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