
Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में आजसू भाजपा से अलग होकर लड़ रही है. आजसू झारखंड के 81 विधानसभा में से 53 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इतनी सीटों पर उम्मीदवार उतारने और भाजपा से अलग होकर लड़ने का एक बड़ा फायदा हो सकता है.
पिछले 19 सालों के मुकाबले आजसू पार्टी इस बार अधिक मजबूत बन कर सामने आ सकती है. आजसू पार्टी ने इससे पहले 2005 में 40 और 2009 में 54 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2014 में मात्र आठ सीट पर चुनाव लड़ कर पांच सीटें जीती थीं.
आजसू हर बार कम से कम इतनी सीटें तो लेकर आती है, जिससे वो सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके. चुनावी समीकरण के अनुसार आजसू इस बार फिर सरकार बनाने में अधिक महत्पूर्ण भूमिका में होगी. चुनाव प्रारंभ होने के समय से ही आजसू के नेता यह दावा कर रहे हैं कि इस बार वे दहाई के आंकड़े में विधानसभा पहुंचेंगे.
आजसू पार्टी इस बार 54 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, पर 19 ऐसी सीटें हैं जहां अधिक मजबूत है. इन सीटों पर पार्टी पहले या दूसरे नंबर रह सकती है. इसके अलावा कई सीटों पर आजसू अपने विरोधियों का भी समीकरण बिगाड़ सकती है.
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इन सीटों पर आजसू पार्टी विपक्षियों को दे रही है कड़ी टक्कर
आजसू पार्टी इस बार जिन 54 सीटों पर चुनाव लड़ रही है उनमें से अधिकतर सीटों में जोरदार टक्कर दे रही है. आजसू इस बार सिल्ली, रामगढ़, गोमिया, जुगसलाई, छत्तरपुर, लोहरदगा, हुसैनाबाद, घाटशिला, चक्रधरपुर, मांडर, ईचागढ़, डुमरी, कोडरमा, ईचागढ़, मांडू, सिमरिया, बड़कागांव, चंदनकियारी और पाकुड़ में अधिक मजबूती से चुनाव लड़ रही है. इन सीटों में आजसू पहले या दूसरे स्थान पर रह सकती है. अंतिम चरण के पाकुड़, जामा और बोरियो में भी आजसू को अपने लिए आस दिखाई दे रही है.
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आजसू की अब तक की चुनावी स्थिति
2005 में आजसू 40 सीटों पर लड़ी और उसे मात्र 2 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. जबकि भाजपा 63 पर लड़ कर 30 सीटें हासिल करने में कामयाब रही. 2009 के चुनाव में भाजपा 67 सीटों पर लड़ी. आजसू 54 सीटों पर लड़ी और मात्र 5 ही जीत पायी. 2014 में भाजपा 72 सीटों पर लड़ी और 37 सीटों पर जीत गयी. वहीं आजसू 8 सीटों पर लड़ी और 5 सीटें जीतें जीत लीं.
2014 में पहली बार आजसू ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था और सीटों का बंटवारा किया था. इसके पहले वह अलग ही चुनाव लड़ती थी, हालांकि चुनाव बाद भाजपा के साथ आ जाती थी. आजसू ने हर चुनाव में इतनी सीटें तो जीती ही हैं कि हर बार भाजपा को इनकी जरूरत पड़ती है. झारखंड में 5-6 सीटों को आजसू ने सत्ता की चाबी बना दिया है. इसी दम पर आजसू हमेशा किंगमेकर के तौर पर नजर आती है.
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