
Nikhil Kumar
Ranchi : कठौतिया कोल मांइस के अंतर्गत 82.76 एकड़ भूमि जो जंगल-झाड़ी की थी, उसे गैरमजरूआ भूमि ,सरकारी भूमि के रूप में नियम-विरूद्ध उषा मार्टिन प्राइवेट लिमिटेड को कोयला उत्खनन के लिए आवंटित करने के मामले में सरकार ने तत्कालीन अपर समाहर्ता पलामू व झारखंड प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत पदाधिकारी कमल किशोर रवि को कड़ा दंड दिया है. पेंशन नियमावली के तहत उनके पेंशन से आजीवन 10 फीसदी राशि काटने का आदेश दिया गया है. राज्य सरकार की सहमति के बाद कार्मिक विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. कार्मिक विभाग ने जांच के बाद इनके उपर लगे आरोपों को प्रमाणित पाते हुए यह कार्रवाई की है. यह पूरा मामला 2015 का ही है जब नियम विरूद्ध कठौतिया मांइस के लिए उषा मार्टिन को जमीन आवंटित की गयी थी. पूरे मामले में काफी हंगामा भी हुआ था.
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जांच में साबित नहीं हुआ गैर मजरूआ जमीन
अभिलेख में संलग्न खतियानों की प्रमाणित प्रतिलिपि के अवलोकन से ज्ञात होता है कि वैसी •भूमि को भी गैरमजरूआ प्रतिवेदित किया गया,जो जंगल-झाड़ी थी. खतियानों की प्रमाणित प्रतिलिपि की छायाप्रति में TORN लिखा पाया गया है. खतियान की प्रमाणित प्रतिलिपि की छायाप्रति से TORN खतियान के आधार पर यह साबित नहीं किया जा सकता है कि उक्त भूमि गैरमजरूआ ही था. खेसरा पंजी एवं चेक स्लीप के अवलोकन से पता चलता है कि जंगल-झाड़ी की भूमि को गैरमजरूआ दिखा गया है.
स्पष्टीकरण का भी जवाब नहीं दिया
उक्त आरोपों के लिए विभाग ने 9 दिसंबर 2015 द्वारा श्री रवि से स्पष्टीकरण मांगा था. इनसे स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने पर विभाग ने आठ जनवरी 2016 को फिर से उन्हें स्मार पत्र दिया,परंतु इनका स्पष्टीकरण अप्राप्त ही रहा. रवि से स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने पर मामले की समीक्षा विभागीय संकल्प 11.6.2016 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी,जिसमें एहतेशामुल हक सेवानिवृत आइएएस अधिकारी को जांच संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया. बाद में एहतेशामुल हक के स्थान नौ सितंबर 2016 को रिटायर आइएएस विनोद चंद्र झा को विभागीय संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया. संचालन पदाधिकारी ने जांच रिपोर्ट दी.
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इस रिपोर्ट के बाद इनके समर्पित बचाव बयान,जांच रिपोर्ट की समीक्षा की गयी. इसके बाद इनके उपर पेंशन नियमावली के तहत दंड अधिरोपित करने के पहले इनसे सेंकेड़ शो-कॉज पूछा गया. पर इसका भी उन्होंने जवाब नहीं दिया. पूरे मामले पर झारखंड लोकसेवा आयोग व विधि विभाग से भी राय ली गयी. प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से भी उक्त सेवानिवृत अधिकारी से जवाब मांगा गया. अंतिम अवसर मिलने के बाद भी जवाब अप्राप्त रहने के कारण उनके उपर कड़ा दंड अधिरोपित किया गया है. लोकसेवा आयोग व विधि विभाग से भी राय ली गयी. प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से भी उक्त सेवानिवृत अधिकारी से जवाब मांगा गया. अंतिम अवसर मिलने के बाद भी जवाब अप्राप्त रहने के कारण उनके उपर कड़ा दंड अधिरोपित किया गया है.
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