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मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों के हित पर ही बोर्ड बैठक में होती है बात, आम लोगों के मुद्दे हुए गौण

Ranchi : शहरी सुविधाओं के लिए काम कर रहे रांची नगर निगम बोर्ड की बैठक में केवल उन्हीं मुद्दों पर बात हो रही है, जिससे केवल मेयर, डिप्टी मेयर सहित पार्षदों को ही लाभ पहुंचे. लोगों की समस्याएं समाप्त हों, इसकी चिंता शायद निगम बोर्ड को तनिक भी नहीं है. ऐसा इसलिए, क्योंकि शहर में गंदगी जस की तस फैली है, चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारी से लोग परेशान हैं. मामला तीन दिनों पहले हुई बोर्ड बैठक में छाये मुद्दे से जुड़ा है. सफाई को लेकर बैठक में मेयर आशा लकड़ा ने रांची एमएसडब्ल्यू को पार्षदों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया था. लेकिन, बैठक हुई नहीं. वहीं, फॉगिंग में हुए घोटाले की जांच को लेकर भी कई पार्षदों ने मेयर से जांच करवाने की मांग की थी. यह भी नहीं हुआ. दूसरी ओर इसी बैठक में मेयर सहित पार्षदों के वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर दिया गया. इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि बोर्ड में केवल उन्हीं मुद्दों को स्वीकृति मिलती है, जिसपर बोर्ड के प्रतिनिधि को ही कोई लाभ पहुंचे, न कि आम जनता को.

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मेयर ने दिया निर्देश, पर पार्षदों ने नहीं की पहल

सबसे पहले बात, फॉगिंग में हुए घोटले की जांच करवाने की मांग पर करते हैं. बैठक में वार्ड नंबर 27 के पार्षद ओमप्रकाश ने मेयर आशा लकड़ा से फॉगिंग घोटाले की जांच करने की मांग की थी. कई पार्षदों ने उनकी इस मांग का समर्थन किया था. इसपर मेयर ने कहा था कि पांच पार्षद आपस में मिलकर एक जांच कमिटी बनायें. इसके बावजूद किसी पार्षद ने कोई पहल करना मुनासिब नहीं समझा. इस मामले पर पार्षद ओमप्रकाश से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गयी, तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि पार्षद मांग तो करते हैं, लेकिन जब उनकी मांग को किसी निष्कर्ष पर पहुंचाने की पहल की जाती है, तो वे पीछे हट जाते हैं.

मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों के हित पर ही बोर्ड बैठक में होती है बात, आम लोगों के मुद्दे हुए गौण

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मेयर के आदेश की रांची एमएसडब्ल्यू ने की अनदेखी

परिसीमन के बाद सफाई व्यवस्था हेतु श्रमिकों एवं संसाधन बढ़ाने की मांग विभिन्न पार्षदों द्वारा पहले से ही की जाती रही है. बोर्ड बैठक में इस पर सभी 53 वार्डों में कुल 1072 के स्थान पर 1322 (अतिरिक्त 250 सफाईकर्मियों को बढ़ाने) कर्मचारी रखने का प्रस्ताव पास किया गया था. इसके बाद भी बैठक में रेजाकर्मियों की संख्या बढ़ाने को लेकर पार्षदों ने हंगामा किया था. मेयर ने बोर्ड बैठक में उपस्थित रांची एमएसडब्ल्यू के अधिकारियों को सभी पार्षदों के साथ विशेष बैठक करने का निर्देश दिया था, लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला. यहां तक कि रांची एमएसडब्ल्यू के अधिकारियों ने मेयर के आदेश की भी पूरी तरह से अवहेलना कर दी.

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देर तक चली बैठक, पार्षद ही नहीं रुके : मेयर

आदेश के बाद भी किसी तरह की कोई बैठक नहीं होने के संबंध में मेयर आशा लकड़ा से बात की गयी. इस पर उन्होंने कहा कि बोर्ड की बैठक काफी देर तक चली. उसके बाद भी कोई पार्षद नहीं रुके, सभी घर चले गये. इसके बाद अगर बैठक नहीं हुई, तो समझ से परे है.

पार्षदों का आरोप- मेयर नहीं चाहतीं कि बैठक हो

पूरे मामले पर न्यूज विंग संवाददाता ने कई पार्षदों से बातचीत की. नाम नहीं लिखने की शर्त पर इन पार्षदों ने कहा कि बोर्ड बैठक में निगम ने तो सफाईकर्मी बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर दिया, लेकिन रांची एमएसडब्ल्यू से इस मुद्दे पर बातचीत नहीं की जा सकी. उन्होंने कहा कि सभी पार्षद जब भी बोर्ड बैठक में शहर की सफाई को लेकर कोई मांग उठाते हैं, तो मेयर आशा लकड़ा एक निर्देश देकर इस मांग पर रोक लगा देती हैं. ऐसे में यह बात कहने में भी परहेज नहीं कि मेयर ही नहीं चाहती हैं कि सफाई के मुद्दे पर पार्षद और रांची एमएसडब्ल्यू के बीच कोई आवश्यक बैठक हो

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पार्षदों ने खड़ा किया कन्फ्यूजन : MSW

इस मामले पर रांची एमएसडब्ल्यू के अधिकारी ओमकिशोर ने कहा कि अभी तक कुछ पार्षदों ने ही सफाई करने को लेकर एक विशेष बैठक करने की बात कही है. बैठक करने के पहले ही विभिन्न पार्षदों ने एक कन्फ्यूजन खड़ा कर दिया है. एग्रीमेंट के तहत कंपनी को शहर की सफाई के लिए जितने कर्मी को लगाना था, उससे अधिक कर्मी लगाये जा चुके हैं. जबकि, पार्षदों का कहना है कि विभिन्न वार्डों में सफाई के लिए और रेजा चाहिए. ओमकिशोर ने कहा कि बैठक नहीं होने के बावजूद शहर की साफ-सफाई को लेकर कंपनी के अधिकारी पार्षदों से मिलते रहते हैं.

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