
Ranchi : राज्य में बाघों की संख्या एक पहेली बन गयी है. वन विभाग के आला अफसरों को यह भी पता नहीं है कि प्रदेश में बाघों की संख्या कितनी है. डेढ़ सप्ताह पहले वन विभाग के द्वारा राजधानी के एक होटल में वर्ल्ड टाइगर डे मनाया गया. इसमें बाघों के संरक्षण का संकल्प लिया गया. इसके बाद अफसर बाघ के संरक्षण की बात ही भूल गये. 14 अगस्त को हाईकोर्ट ने कहा कि बाघों के संरक्षण को बढ़ावा देने से संबंधित कई आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया. ऐसे में लगता है कि आदेश नहीं मानने वाले अफसर ना तो मुख्यमंत्री का सम्मान करते हैं और ना ही हाईकोर्ट का. कर्त्तव्य के प्रति इस तरह के व्यवहार को बर्दास्त नहीं किया जा सकता.
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वन विभाग का दावा बाघों की संख्या है चार पर स्पष्ट नहीं
वन विभाग के पास बाघ का सही आंकड़ा नहीं है. विभाग ने दावा किया है कि बाघों की संख्या तीन से बढ़कर चार हो गयी है. जबकि देशभर में हुयी जनगणना के अनुसार झारखंड में बाघों की संख्या सिर्फ तीन बतायी गयी है. सही आंकड़ा नहीं होने के कारण अब तक बाघों की संख्या पहेली ही बनी हुई है.
वन विभाग का तर्क
वन विभाग ने तर्क दिया है कि टाइगर रिजर्व एरिया में पुलिस पिकेट स्थापित कर दिये गये हैं. नियमत: कोर एरिया में पुलिस पिकेट नहीं होना चाहिये. वर्तमान में बेतला, कुटकू, बरवाडीह, गारू, बारसेन, महुआटांड सहित अन्य इलाकों में एक दर्जन से अधिक पुलिस पिकेट हैं. नक्सलियों के खिलाफ गोलीबारी से जानवरों पर विपरित असर पड़ता है. इस कारण जंगली जानवर पड़ोस के जंगलों की ओर रूख करते हैं.
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टाइगर फाउंडेशन भी कारगर नहीं
राज्य में टाइगर फाउंडेशन का भी गठन किया जा चुका है. यह एक ऑटोनॉमस बॉडी है. इसमें दो इकाइयां गवर्निंग बॉडी और कार्यकारिणी समिति है. गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष विभाग के मंत्री होते हैं. फिलहाल मुख्यमंत्री के अधीन वन विभाग है. इस हिसाब से मुख्यमंत्री गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष हैं. जबकि कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष पीसीसीएफ वन्य प्राणी हैं. इसके बावजूद भी यह कारगर नहीं हो पाया है.
क्या है बाघों की जनगणना का फॉर्मूला
- बाघों के पंजों के निशान का अध्ययन किया जाता है.
- कैमर ट्रैप की जद में आये बाघों का विश्लेषण किया जाता है.
- बाघों के मल की जांच की जाती है.
- यह भी पता लगाया जाता है कि बाघ कितने बड़े क्षेत्र में भ्रमण करते हैं.
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क्या है वन मंत्रालय का निर्देश
वन मंत्रालय के निर्देशानुसार शेर, बाघ और हाथियों के लिये राज्यों में सुरक्षित क्षेत्र का विकास किया जाना है. जानवरों के शिकार और उसके व्यवसायिक शोषण के खिलाफ उच्चस्तरीय विधिक सुरक्षा उपलब्ध करायी गयी है. दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा के प्रावधान किये गये हैं. अभियोजन चलाने के लिये सीबीआई को पर्याप्त शक्ति भी दी गयी है.
साल दर साल घटती गयी बाघों की संख्या
साल बाघों की संख्या
1992 50
1993 44
1994 49
1995 50
1996 40
1997 44
1999 37
2000 37
2002 38
2003 36
2005 17
2007 15
2009 17
2011 07
2011 12 सिर्फ गिनती, स्पष्ट आंकड़ा नहीं.
2013 स्पष्ट आंकड़ा नहीं .
2016-17 03
2018 स्पष्ट आंकड़ा नहीं, विभाग का दावा चार से पांच बाघ हैं.
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