
Palamu: जिले में जमीन विवाद का मामला कुछ इलाकों में नासूर बन गया है. पदाधिकारियों की सक्रियता नहीं रहने के कारण लटका पड़ा है. जिले के पंडवा प्रखंड के बटसारा में भी कुछ ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है. यहां के रहने वाले मुंद्रिका राम, सुमेर राम, परमेश्वर राम एवं सुदेश्वर राम 1976 से 5 एकड़ 69 डिसमिल जमीन पर अवैध डिमांड रद्द कराने की जद्दोजहद में हैं. 47 वर्ष बीत जाने के बाद भी उक्त जमीन का डिमांड रद्द नहीं किया गया है.
ऐसे नहीं है कि इस मामले में मुंद्रिका राम की ओर से कोई पहल नहीं की गई. अंचल कार्याल से लेकर हाईकोर्ट तक फरियाद कर चुके हैं. इस सिलसिले में पंडवा अंचलाधिकारी को कई स्तरों पर दिशा निर्देश मिला है, बावजूद अंचल कार्यालय जिला को जमीन का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट नहीं भेज रहा है. नतीजा मुंद्रिका राम समेत अन्य लोग परेशान हैं.
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मंगलवार को अपनी फरियाद सुनाते हुए मुन्द्रिका राम ने कहा कि खाता 2001 प्लॉट नंबर 143 में कुल जमीन 5.69 डिसमिल है. यह जमीन बिहार सरकार के समय से गैरमजरूआ है और इस पर उनके अलावा अन्य तीन लोगों का बाप-दादा के समय से दखल कब्जा है. इसी जमीन में से 2.69 डिसमिल को गांव के ही प्राणदेव सिंह, 0.89 डिसमिल एकबाल सिंह, 0.90 डिसमिल पुकार सिंह एवं 9.0 डिसमिल जगनारायण सिहं ने अवैध तरीके से बंदोबस्त करा लिया है. 10.10.1977 में उपायुक्त स्तर पर जांच के बाद पलामू के अपर समाहर्ता ने डिमांड को कैंसिल कर दिया था और मुन्द्रिका राम एवं अन्य के नाम से बंदोबस्ती करने के लिए पाटन अंचल को भेज दिया था, लेकिन सीओ ने सामंति लोगांे के बल पर भूमिहीन मुन्द्रिका राम एवं अन्य के दखल कब्जा में रहने के बावजूद जमीन की बंदोबस्ती नहीं की.
मामला टाइटल सूट में गया और मुंसफ कोर्ट से मुन्द्रिका राम के पक्ष में फैसला आ गया. पुनः जाली दस्तावेज के आधार पर प्राणदेव सिंह एवं अन्य ने मामले को जिला जज के यहां ले गए. यहां नोटिस दिए बगैर एकतरफा फैसला हुआ. इसके खिलाफ मुन्द्रिका राम एवं अन्य हाइकोर्ट चले गए. हाइकोर्ट ने मुन्द्रिका राम एवं अन्य को रैयत माना और लोवर कोर्ट को सुनवाई का निर्देश दिया.
वर्तमान में उपरोक्त जमीन पर विवाद की स्थिति बनी हुई है हिंसक घटना कभी भी हो स कती है. मामला डीसी के यहां डिमांड कैंसिलेशन के लिए सुनवाई मेें है. इस मामले में पंडवा सीओ को रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अंचल कार्यालय ने अपर समाहर्ता पलामू को अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी है. बता दें कि इस संबंध में 15.9.2022 को झारखंड सरकार के अवर सचिव राममूर्ति सिंह ने भी उपायुक्त पलामू को निर्देशित कर चुके हैं.




