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विराट कोहली से प्रदूषण के खिलाफ अभियान चलवाइए! सुप्रीम कोर्ट की सरकार को बड़ी सलाह, कहा- हर साल आदेश देने से नहीं चलेगा काम

विराट कोहली से प्रदूषण के खिलाफ अभियान चलवाइए! सुप्रीम कोर्ट की सरकार को बड़ी सलाह, कहा- हर साल आदेश देने से नहीं चलेगा काम

 

 

 

 

 

नई दिल्ली: दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त नजर आ रहा है। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को शीर्ष अदालत ने सरकार को जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विराट कोहली जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों और अन्य मशहूर हस्तियों की मदद लेने की सलाह दी। कोर्ट का मानना है कि जब तक आम लोगों को इस समस्या के प्रति जागरूक नहीं किया जाएगा और उनका सहयोग नहीं मिलेगा, तब तक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण मुश्किल है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि हर साल प्रदूषण को लेकर आदेश जारी किए जाते हैं, लेकिन उनका असर केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। अधिकारियों को अब जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सभी पक्षों का सहयोग जरूरी है।

विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों की मदद लेने का सुझाव

सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि जागरूकता अभियान के लिए विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों की मदद क्यों नहीं ली जाती? अदालत ने कहा कि लोकप्रिय हस्तियों के माध्यम से लोगों तक प्रदूषण के दुष्प्रभावों और इससे बचाव के उपायों का संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।

कोर्ट ने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे केवल दफ्तरों में बैठकर स्थिति का आकलन न करें, बल्कि जमीनी स्तर पर मौजूद रहकर देखें कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों का कितना पालन हो रहा है।

दिल्ली सरकार ने बताया प्रदूषण से निपटने का प्लान

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है। इसमें पुराने वाहनों पर रोक, निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर प्रतिबंध और सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव जैसे उपाय शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, कई कदम नवंबर से लागू किए जाएंगे।

पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि हर साल आदेश जारी करने का कोई फायदा नहीं, अगर अधिकारी उन्हें जमीन पर लागू नहीं कराते। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अधिकारियों को इस मामले को गंभीरता से लेना होगा, वरना सख्त कदम उठाने की नौबत आ सकती है।

पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल पर केंद्र से मांगा गया समय

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे पर आंतरिक विचार-विमर्श जारी है। केंद्र ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह तीन सप्ताह बाद इस मुद्दे पर विचार करेगा।

सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश है कि प्रदूषण से लड़ाई केवल सरकारी आदेशों से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए प्रशासन की सक्रियता, आम जनता की भागीदारी और विराट कोहली जैसे लोकप्रिय चेहरों के जरिए व्यापक जनजागरूकता जरूरी है।

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