
जेसोवा दिवाली मेला के दूसरे दिन उमड़ी भीड़, खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

माधवी के भजन और सरायकेला छऊ नृत्य ने मोहा दर्शकों का मन, चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा; विभिन्न आयु वर्गों के विजेताओं को किया गया पुरस्कृत
रांची। जेसोवा दिवाली मेला के दूसरे दिन लोगों का खासा उत्साह देखने को मिला। मेले में सुबह से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई और विभिन्न स्टॉलों पर जमकर खरीदारी हुई। घर की सजावट के सामान, आकर्षक परिधान, पारंपरिक वस्तुएं और खान-पान के स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाएं, युवा और बच्चे सभी मेले का भरपूर आनंद लेते नजर आए।
इस वर्ष जेसोवा दिवाली मेला में खरीदारी के साथ मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष आयोजन किया गया है। मेले में आयोजित रंगारंग प्रस्तुतियों ने उत्सव की रौनक बढ़ाई। इसी क्रम में सांस्कृतिक मंच पर महात्मा गांधी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ की माधवी द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। इसके बाद झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता सरायकेला छऊ नृत्य प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति के माध्यम से झारखंड की लोककला और परंपरा की खूबसूरत झलक पेश की। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का निर्देशन संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित गुरु श्री तपन कुमार पटनायक ने किया।
छऊ नृत्य के अंतर्गत मंगलाचरण, आरती, हर-पार्वती, धीर और राधा-कृष्ण जैसे विभिन्न प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने सराहा।
चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
मेले में बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कक्षा दूसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता को अलग-अलग कक्षाओं और आयु वर्गों के अनुसार विभाजित किया गया था। कक्षा दूसरी से पांचवीं तक के बच्चों को किसी निर्धारित विषय की बाध्यता से मुक्त रखा गया था, ताकि वे अपनी स्वतंत्र कल्पना और रचनात्मक सोच के अनुसार चित्र बना सकें।
वहीं, कक्षा छठी से नौवीं तक के विद्यार्थियों के लिए किसी भी सामाजिक विषय पर चित्रांकन निर्धारित किया गया था, जबकि कक्षा दसवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को ‘सामाजिक बुराई’ विषय पर अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करनी थी।
बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया। उनकी कल्पनाशीलता और चित्रों में उभरे सामाजिक संदेशों ने आयोजकों का भी उत्साह बढ़ाया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कारों के लिए प्रतिभागियों की कलाकृतियों का मूल्यांकन जेसोवा अध्यक्ष प्रीति कुमारी, कोषाध्यक्ष शिवानी सिंह जेसोवा सदस्य नमिता सिहं, और ऋचा संचिता ने किया।
चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेता
7 से 10 वर्ष आयु वर्ग
प्रथम पुरस्कार:
– आद्याश्री – JVM सरला ग्लोबल
– अनुज – सरला ग्लोबल
– श्रेया तिवारी – JVM श्यामली
द्वितीय पुरस्कार:
– समृद्धि – DAV कपिल देव
– अर्क रंजन – केराली स्कूल
– ओजस पांडेय – DAV नंदराज
तृतीय पुरस्कार:
– अंशिका – गुरु नानक स्कूल
– रंजना शाह – DPS दुर्गापुर
– आयुष कुमार – DAV नंदराज
10 से 12 वर्ष आयु वर्ग
प्रथम पुरस्कार:
– सृष्टि
– आयुष आनंद – DAV कपिल देव
– जया संतोष – DPS रांची
द्वितीय पुरस्कार:
– सुधांशु कुमार – विवेकानंद स्कूल
– प्रिया अग्रवाल – JVM
– सौनेक – JVM
– अदिति – विवेकानंद स्कूल
तृतीय पुरस्कार:
– सुनैना कुमार – मॉडल स्कूल
– सक्षम प्रताप – केराली स्कूल
– अभिनूप सिन्हा – केराली स्कूल
– प्रियंका बेदिया – केराली स्कूल
– अमायरा ठाकुर – DAV कपिल देव
मेले के दूसरे दिन के प्रमुख आकर्षण
– विभिन्न स्टॉलों पर घर की सजावट, परिधान और खान-पान की वस्तुओं की जमकर खरीदारी।
– माधवी द्वारा महात्मा गांधी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ की प्रस्तुति।
– गुरु श्री तपन कुमार पटनायक के निर्देशन में सरायकेला छऊ नृत्य का मंचन।
– कक्षा दूसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन।
– विभिन्न आयु वर्गों में बच्चों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए।
जेसोवा दिवाली मेला का दूसरा दिन खरीदारी, कला, संस्कृति और बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा के नाम रहा। मेले में आयोजित गतिविधियों ने इसे केवल खरीदारी का केंद्र न बनाकर सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोरंजन का साझा मंच बनाया है। लोगों की बढ़ती भागीदारी और बच्चों के उत्साह ने आयोजन की रौनक को और बढ़ा दिया।




