
Dhanbad: झरिया कोयलांचल क्षेत्र के बागडिगी कोलियरी कार्यालय भू-धंसान की चपेट में आ गया है. सोमवार की रात बागडिगी कोलियरी कार्यालय, बत्ती घर सहित कई कार्यालयों में दरार पड़ने की घटना हुई है. जमीन भी धंसी हुई है. प्रबंधन ने दरार पड़ने वाली जगह की घेराबंदी कर दी है. कार्यालय से सटे करीब 400 आवास हैं. घटना के बाद से हड़कंप मचा है. मालूम हो कि कोलियरी का इलाका पूरी तरह से फायर क्षेत्र है. फायर होने के कारण ही 2012 में कोलियरी बंद कर दी गई थी. यहां बसे लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करने को लेकर प्रबंधन ने कई बार प्रयास किया, लेकिन लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जा सका है.
उल्लेखनीय है कि बड़ी खान दुर्घटनाओं की सूची में झरिया की बागडिगी कोलियरी भी शामिल है. वर्ष 2001 को दो फरवरी को हुई इस दुर्घटना में बागडिगी के 29 श्रमिक काल के गाल में समा गए थे. खदान हादसे के चलते विश्व के मानचित्र पर आई बागडिगी खदान अब भूमिगत आग के कारण बंद हो गई है. यहां की दोनों खदान की चानक की भराई हो चुकी है. आसपास चल रही परियोजना के कारण अब बस्ती के साथ शहीद स्थल पर भी खतरा मंडराने लगा है.
बता दें कि सितंबर-2022 में बीसीसीएल ने झरिया के फायर व भूधंसान एरिया में रहने वाले लोगों को जगह खाली करने का नोटिस जारी करते हुए कहा है कि झरिया का कतरास मोड़ सहित अन्य इलाके आग और भू-धंसान प्रभावित हैं. इस कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इसलिए जितनी जल्दी हो सके, लोग इलाके के खाली कर दें. बीसीसीएल की नोटिस में झरिया के कतरास मोड़ से लेकर कोईरीबांध, पोद्दारपाड़ा, चौथाई कुल्ही सहित कई इलाकों को भू-धंसान और आग प्रभावित क्षेत्र बताया गया है. झरिया की कोयला मंडी कतरास मोड़, बिहार टॉकिज, बीडीओ ऑफिस, सीओ ऑफिस, बाल विकास परियोजना कार्यालय, प्रखंड संसाधन केंद्र, राजबाड़ी, बकरीहाट, राजा तालाब आदि इलाके आग और भू-धंसान की जद में बताया गया है.
लिलोरीपथरा, दोबारी बालू गद्दा, मोहरी बांध सहित विभिन्न क्षेत्रों में भूधंसान और गैस रिसाव का खतरा बना हुआ है. कई बार बरसात के मौसम में इन क्षेत्रों में आवास जमींदोज जैसी घटनाएं भी घट चुकी हैं. कई लोगों को जान तक गंवानी पड़ी है. बरसात में जमींदोज होने का डर बना रहता है. गैस रिसाव तो आम बात है. परंतु कोई विकल्प भी तो नहीं है. विस्थापित जरेडा और बीसीसीएल की विस्थापन नीति के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं. जरेडा ( झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार ) और बीसीसीएल की धीमी पुनर्वास नीति के कारण क्षेत्र की बहुत बड़ी आबादी खतरों के बीच जिंदगी बिताने को विवश है.
इसे भी पढ़ें: सिमडेगा और रामगढ़ में पेयजल आपूर्ति योजनाओं को रफ्तार देने में लगा JUIDCO




