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Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहा महासंयोग, ऐसे करेंगे अभि‍षेक तो होगी मानोवांछित  फल की प्राप्ति, जानि‍ए शुभ मुहूर्त 

Jamshedpur:  इस वर्ष महाशिवरात्रि एक मार्च को मनाया जाएगा.महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त मंगलवार सुबह तीन बजकर 16 मिनट से शुरू होगा. चतुर्थी तिथि बुधवार 2 मार्च को सुबह 10:00 बजे समाप्त होगी, इस दिन भगवान की चारों प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए संपूर्ण भारत वर्ष में शिव भक्त व्रत रखते हैं.

पंडित विपिन कुमार झा ने बताया कि इस दिन रुद्राभिषेक करने से समस्त ग्रहों की शांति होती है एवं मनोवांछित फल प्राप्त होता है.  सोमवार के दिन शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से धन संपत्ति प्राप्त होती है, तिल चढ़ाने से समस्त पापों का नाश, जल चढ़ाने से लंबे समय से आ रही परेशानी दूर होती हैं और गेहूं चढ़ाने से सुयोग्य पुत्र की प्राप्ति होती है. जल चढ़ाने से परिवार के किसी सदस्य का तेज बुखार कम हो जाने की मान्यता है. दूध में चीनी मिलाकर चढ़ाने से बच्चों का मस्तिष्क तेज होता है, गन्ने का रस चढ़ाने से सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है. गंगाजल चढ़ाने से मनुष्य को भौतिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है. शहद अर्पित करने से टीवी या मधुमेह की समस्या से राहत मिलती है.

ऐसे करें अभिषेक 

इस दिन दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत, इत्र, चंदन, गुलाब जल से अभिषेक करें. गंगाजल से रुद्राष्टाध्याई का पाठ या ओम नमः शिवाय बोलते हुए जल चढ़ाएं. भगवान शिव को वस्त्र, पुष्पमाला, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि भी चढ़ाएं. भगवान भोलेनाथ को श्रद्धा भाव से रस, स्थिरता के लिए शहद या घी अर्पण करें, संतान प्राप्ति के लिए गौ रोग शांति के लिए गिलोय का रस या दुग्ध, लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने का जल में कुशा डालकर अभिषेक करें.

बन रहा पंचग्रही योग 

इस बार शिवरात्रि पर पांच ग्रह चंद्रमा, मंगल, बुध, शुक्र और शनि मकर राशि में एक साथ विद्यमान रहेंगे, जिस वजह से इस दिन पंचग्रही योग का निर्माण होगा. ऐसे में महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा अत्यंत मंगलकारी होगी. भगवान शिव को पंचानन भी कहा जाता है. ऐसे में पंचग्रही योग में भगवान पंचानन पूजा से प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोरथ को पूरा करेंगे. धर्म ग्रंथों के अनुसार शिवरात्रि के व्रत से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है. जो लोग पितृदोष, कालसर्प दोष के साथ किसी भी ग्रह दोष से परेशान हैं वे शिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करें. इस दिन व्रत और चार पहर की पूजा, अभिषेक करने से चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होगी.

पूजन का समय प्रथम चरण का

  • पूजन 6:30 से 9:27 तक

द्वितीय चरण की पूजा

 

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