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झारखंड विस का बजट सत्र 25 से, हंगामेदार होने के आसार, भाषा विवाद, मॉब लिंचिंग, कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरने की तैयारी

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Ranchi: झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू होगा. 25 मार्च तक चलने वाले इस सत्र में 17 कार्यदिवस निर्धारित किये गये हैं. 25 फरवरी को राज्यपाल सदन को संबोधित करेंगे. तीन मार्च को राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2022-23 का बजट सदन में पेश करेगी. इसके बाद बजट और अनुदान मांगों पर चर्चा होगी. 24 और 25 मार्च को सरकार विधेयक लाएगी. शुक्रवार से शुरू होनेवाले झारखंड विधानसभा बजट सत्र के हंगामेदार होने की आशंका प्रबल है. हाल के दौरान घटी कई घटनाओं का प्रभाव सत्र पर पड़ेगा. भाषाई विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में रार है. भाजपा और आजसू पहले से इस मुद्दे पर मुखर थी अब कांग्रेस के भी तीखे बोल सामने आ रहे हैं. बरही रूपेश मॉब लिंचिंग और क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में सभी जिलों में उर्दू को शामिल करने के विरोध में भाजपा सरकार को घेरेगी.

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भाजपा ने किया विधायक दल के नेताओं की बैठक का वहिष्कार

सत्र के सफल संचालन को लेकर हर सत्र से पहले स्पीकर सभी दलों के विधायक दल के नेताओं के साथ बैठक करते हैं. भाजपा लगातार इसका विरोध कर रही है. बजट सत्र के सुचारू रूप से संचालन के लिए विधायक दल के नेताओं की बैठक काफी महत्वपूर्ण है, पर भाजपा ने कहा है कि वह इस बैठक का बहिष्कार करेगी. भाजपा के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि उनके पास विधानसभा अध्यक्ष का पत्र आया है, परंतु वे बैठक में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी हैं, पर एक साजिश के तहत विधानसभा अध्यक्ष उन्हें सर्वदलीय बैठक में नहीं बुलाते हैं. ऐसे में वे स्वयं उस बैठक में नहीं जाएंगे.

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4 दिन होंगे मुख्यमंत्री प्रश्नकाल

बजट सत्र में 17 कार्यदिवस निर्धारित हैं. इस दौरान 4 दिन मुख्यमंत्री प्रश्नकाल होंगे. हर सोमवार को प्रश्नकाल के बाद आधे घंटे के लिए मुख्यमंत्री प्रश्नकाल निर्धारित रहता है. विधायकों के लिए एक अच्छा मौका होता है कि वो सीधे नीतिगत मामले पर मुख्यमंत्री से सवाल कर सकते हैं. पिछले दो सत्र में मुख्यमंत्री प्रश्नकाल नहीं हुआ था.

सदन चले या नहीं, यह सरकार पर निर्भर : बिरंची

भाजपा के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि यह सरकार पर है कि वह सदन चलाना चाहती है या नहीं. मॉबलिंचिंग में रूपेश पांडेय की हत्या, जिला स्तरीय नियुक्तियों के लिए हर जिले में उर्दू को क्षेत्रीय भाषा में शामिल करना, विधि-व्यवस्था का लगातार खराब होते जाना, राज्य में बालू, पत्थर, कोयला समेत कई खनिजों की संगठित रूप से लूट, भ्रष्टाचार आदि अनेक विषय हैं, जो सदन में उठाए जाएंगे और इस पर सरकार से जवाब भी मांगा जाएगा.

नई शराब नीति पर सत्ता पक्ष के विधायक हैं लाल

नई शराब नीति पर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी सरकार को घेर सकते हैं. झामुमो विधायक लोबिन हेंब्रम कई अवसरों पर सरकार की नई शराब नीति की आलोचना कर चुके हैं. उन्होंने झामुमो के विधायकों को पत्र लिखकर नयी शराब नीति का विरोध करने का आग्रह किया है. पिछले मॉनसून सत्र में भी शराब पर लोबिन के तीखे बोल सदन में गूंजे थे. उन्होंने कहा है कि पार्टी प्रमुख शिबू सोरेन शराब के विरोधी रहे हैं, ऐसे में सरकार को इस संबंध में फिर से विचार करना चाहिए.

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भाषा पर कांग्रेस का तेवर तल्ख़, सदन में दिखेगा असर

पारसनाथ में संपन्न कांग्रेस के चिंतन शिविर में सरकार के कई निर्णयों पर कांग्रेस के तेवर तल्ख़ थे. खासकर भाषा विवाद पर तो मंत्री ने इस्तीफा देने तक की बात कही थी. स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता समेत कई वरीय कांग्रेसियों ने सरकार और मुख्यमंत्री पर सीधा चोट किया है.ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सदन में इनकी आपस की केमिस्ट्री कैसी रहती है.

नई प्रमोशन नीति विधेयक सहित कई अन्य विधेयक लाने की तैयारी

बजट सत्र में सरकार राज्य कर्मियों के प्रमोशन पर लगी रोक को हटाने से पहले या उसी क्रम में प्रमोशन देने के लिए नई प्रमोशन नीति विधेयक लाने की तैयारी में है. इसके अलावा सरकार व्यापारियों पर बकाया करों की एकमुश्त वसूली के लिए कर समाधान विधेयक भी सदन में पेश कर सकती है. प्रमोशन को लेकर संविधान के 85वें संशोधन के माध्यम से बनी व्यवस्था को लागू करने के लिए अब झारखंड सरकार कानून बनाने जा रही है. अगर यह कानून लागू हुआ तो परिणामी वरीयता के आधार पर लोगों को प्रमोशन मिल सकेगा.

परिणामी वरीयता से प्रमोशन मिलने पर आरक्षित श्रेणी के जिस कर्मचारी को प्रमोशन मिलेगा वह वरीयता सूची में जनरल श्रेणी के ऊपर हो जाएगा. इसका फायदा यह होगा कि आरक्षित श्रेणी के कर्मचारी भविष्य में जनरल कैटेगरी के चिन्हित पदों पर प्रमोशन पा सकेंगे.मालूम हो कि विधायक दीपक बिरुआ की अध्यक्षता में बनी विशेष कमिटी की रिपोर्ट के बाद सरकार ने प्रोन्नति पर रोक लगा दी थी.

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