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‘घरेलू कामगारों को मिले सम्मानजनक मजदूरी’

घरेलू कामगार यूनियन और राष्ट्रीय घरेलू कामगार संगठन ने मनाया अंतरराष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस

Ranchi: झारखंड घरेलू कामगार यूनियन और राष्ट्रीय घरेलू कामगार संगठन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर एक ऑनलाइन मीटिंग की गयी.

मीटिंग में श्रम विभाग के उमेश प्रसाद ने कहा कि घरेलू कामगारों के श्रम अधिकारों की रक्षा करने के लिए झारखण्ड श्रम विभाग निरंतर तत्पर है. विभाग ने घरेलू कामगारों को न्यूनतम मजदूरी की सूची में बहुत पहले ही शामिल कर चुका है.

इसके अलावा राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के अंर्तगत घरेलू कामगारों को मिलने वाले लाभ योजनाओं के बारे में बताया. उन्होंने अभी लागू न्यूनतम मजदूरी की दर के बारे में जानकारी दी.

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उन्होने श्रम विभाग की सार्थक पहल के बारे में बताते हुए कहा कि विभाग ने सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत मिलने वाली लाभ राशि की वृद्धि के लिए झारखण्ड श्रम मंत्रालय में पेशकश की है.

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, नई दिल्ली की सुश्री नेहा वाधवान ने कहा कि घरेलू कामगारों के लिए सिर्फ न्यूनतम मजदूरी काफी नहीं है. उनके लिए सम्मानजनक जीवन जीने के लायक मजदूरी को बात होनी चाहिए.

सरकार हमारी परेशानियों को समझे और घरेलू कामगारों के हित में नियम और कानून बनाये. घरेलू कामगारों को संदेश देते हुए उन्होने कहा कि घरेलू कामगारों को भी अपने काम, सोच और शैली में पेशेवर होना जरूरी है.

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अपने अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सभी घरेलू कामगारों को एकबद्ध होकर सागंठनिक नीति तैयार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए.

समाज सेवी राजन कुमार सिंह ने कहा कि घरेलू कामगारों को एकजुट हो कर नियोजन में जाना चाहिए. घरेलू कामगारों के साथ हो रहे विभिन्न प्रकार के शोषण के खिलाफ न्याय पाने के लिए महिला आयोग एवं अन्य सरकारी संस्थानों के साथ जुड़ना चाहिए.

सभी घरेलू कामगारों को एकजुट होकर सभी जानकारियों से लैस होकर समय-समय पर सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखना चाहिए.

झारखंड सांस्कृतिक संघ की डॉ सची कुमारी ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी बहुत ही कम है. उन्हें एक श्रमिक का सम्मान और दर्जा नहीं दिया जाता है. अकसर घरेलू कामगारों को शक की निगाहों से देखा जाता है. उन्होंने घरेलू कामगार संगठन पर जोर दिया.

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राष्ट्रीय घरेलू कामगार संगठन की राज्य संयोजक पूनम होरो ने कहा कि कोरोना काल में घरेलू कामगारों का कार्य छूट जाने के कारण झारखंड सरकार को बेरोजगारी भत्ता के रूप में 3 माह तक प्रतिमाह 10,000 रुपये देना चाहिए. साथ में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं सभी सांसदों को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दिया जायेगा.

इसके अलावा झारखण्ड घरेलू कामगार यूनियन की अध्यक्ष श्रीमती रेणु लिण्डा, जमशेदपुर से सरिता देवी और बोकारो से आरती देवी ने भी अपनी बातें रखी.

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