
Ranchi: झारखंड में पुलिस की कार्रवाई से नक्सली संगठन बैकफुट पर हैं. राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार पुलिसिया कार्रवाई से नक्सली संगठन काफी कमजोर हो गये हैं.
पुलिस एक ओर जहां नक्सली संगठन का नामोनिशान मिटाने में जुटी है. वहीं नक्सली अपना अस्तित्व बचाने की जुगत में लगे हैं. पिछले दो महीने के बात करें तो झारखंड के अलग-अलग जिलों में आठ नक्सली मारे गये. जिनमें चार पीएलएफआइ के और चार भाकपा माओवादी के हैं. इस वर्ष झारखंड पुलिस ने 22 बड़े नक्सलियों को गिरफ्तार किया है.
पुलिसिया कार्रवाई से नक्सली संगठन का जनाधार भी हुआ कम
नक्सलियों के खिलाफ इलाके में लगातार नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान, इनामी नक्सलियों की गिरफ्तारी और नक्सलियों की मांद से हथियार व विस्फोटक की बरामदगी से संगठन की कमर टूट गयी है. पुलिसिया कार्रवाई से नक्सली संगठन का जनाधार भी कम हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष अबतक तक नक्सल हिंसा के 38 मामले दर्ज किये गये थे.
साल 2019 में 134, 2018 में 118, 2017 में 186, 2016 व 2015 में 196 नक्सली घटनाएं हुई थीं. वहीं इस वर्ष पुलिस व नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की 16 वारदातें हुई हैं. साल 2019 में 38, 2018 में मुठभेड़ की 54 वारदातें हुई थीं. इस साल नक्सल हिंसा में किसी भी पुलिसकर्मी की शहादत नहीं हुई है.
जबकि बीते साल नक्सली हिंसा में 14 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे. वहीं 26 नक्सली पुलिस मुठभेड़ में मारे गये थे. नक्सल हिंसा में 11 आम लोग मारे गये हैं. अब तक सात नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है.
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लेवी में गिरावट आने से नक्सलियों में बौखलाहट
लॉकडाउन में निर्माण कार्य ठप होने के चलते लेवी में गिरावट आने से नक्सलियों में बौखलाहट बढ़ गयी है. उनका आर्थिक ढांचा चरमराने लगा है. साथ ही पुलिस की सख्ती बढ़ने से वे अपना दबदबा कायम रखने के लिए ग्रामीणों की लगातार हत्या कर रहे हैं. लॉकडाउन के कारण भाकपा माओवादियों सहित अन्य नक्सली संगठनों को लेवी नहीं मिल रही. ऐसे में आर्थिक तौर पर नक्सलियों की कमर टूट गयी है.
भाकपा माओवादी लेवी नहीं मिलने के कारण वाहनों में आगजनी की घटना को अंजाम दे रहे हैं. लॉकडाउन में लेवी नहीं मिलने पर नक्सलियों ने कई ठेकेदारों, सरकारी निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को फरमान भी जारी किया है. यही वजह भी है कि माओवादी वारदातों में लॉकडाउन के बाद भी औसत गिरावट नहीं आयी है. उधर, पुलिस ने भी नक्सलियों के खिलाफ सख्ती बढ़ायी है.
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