Opinion

#Corona ने नहीं, मोदी सरकार की नोटबंदी व गलत आर्थिक नीतियों ने देश को कंगाल बना दिया है

Surjit Singh

सभी अखबारों में 30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेख छपा है. लेख में एक जगह लिखा हैः देश की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना वैश्विक महामारी ने भारत को भी घेर लिया. मोदी जी, यह झूठ है. यह सच है कि देश कंगाल हुआ है, लेकिन कोरोना की वजह से नहीं. कोरोना से पहले ही आपकी गलत नीतियों के कारण देश की आर्थिक स्थिति खराब हो गयी थी. कोरोना तो बाद में आया. जिसे आप संभालने में विफल रहे.

पहले आपकी गलत नीतियों के कारण कंगाल हुआ है. लोगों को चौंकाने वाले कदमों के कारण कंगाल हुआ है. कोरोना संकट तो बाद में आय़ा है. देश आपकी नाकामियों के कारण कंगाल हुआ. और भाजपा इसके लिये कोरोना संकट को जिम्मेदार ठहराने के रास्ते पर है.

संभव है मोदी और भाजपा के समर्थक इस झूठ को भी सच मान कर अपनी बर्बादी के लिये कोरोना को जिम्मेदार मानेंगे. पर यह सच नहीं है.

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29 मई को ही एक रिपोर्ट जारी हुई है. जिसके मुताबिक वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी 3.1 प्रतिशत पर आ गयी है. पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें, तो जीडीपी 4.1 प्रतिशत रही है. यह रिपोर्ट 1 अप्रैल 2019 से लेकर 31 मार्च 2020 के बीच की है. और भारत में तो कोरोना संकट मार्च में आया.

लॉकडाउन के बाद ही आर्थिक गतिविधियां ठप हुई. वर्ष 2019-20 का आंकड़ा पिछले वर्ष की तूलना में 2.0 प्रतिशत कम है. यह शर्मनाक है और देश की कंगाली का सबूत भी. इससे पहले वर्ष 2015-16 में भारत की विकास दर 8.2 प्रतिशत थी. वर्ष 2016-17 में घट कर 7.2 प्रतिशत पर पहुंच गई.

इसी दौरान देश को चौंकाते हुए, अर्थशास्त्रियों के तर्क को धत्ता बताते हुए, आरबीआइ को नजरअंदाज करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी कर दी. देश नोटबंदी से उबर पाता, इससे पहले ही मोदी सरकार ने देश को दूसरा झटका दे दिया. नोटबंदी के छह माह के बाद ही जीएसटी लागू कर दी गयी. जिसके बाद से देश की अर्थव्यवस्था कभी संभली ही नहीं.

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देश की अर्थव्यवस्था कैसे गर्त में जाती रही और भाजपा व मोदी सरकार बस चुनाव, हिन्दु-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान में खुद व्यस्त रही और देश को भी व्यस्त रखने में सफल रही. भारत सरकार का ही आंकड़ा कहता है वर्ष 2016-17 में विकास दर घट कर 7.2 प्रतिशत पर आ गया.

जीएसटी लागू होने के बाद वर्ष 2017-18 में विकास दर में और कमी आयी. 6.7 प्रतिशत रह गई. वर्ष 2018-19 में यह लुढ़क कर 6.1 प्रतिशत पर पहुंच गयी. और अब वर्ष 2019-20 में यह 4.2 प्रतिशत पर आ गई है. इस समय तक कोरोना संकट का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर बिल्कुल नहीं पड़ा था.

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