
Ranchi : लॉकडाउन4.0 में ई-कॉमर्स से खरीदारी करने की जो छूट हेमंत सरकार ने दी थी, उसके वापस ले लिया गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि ई-कॉमर्स से खरीदारी की जो व्यवस्था पहले थी, वही चलती रहेगी.
प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंगलवार रात को झारखंड चेम्बर ऑफ कॉमर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर ई-कॉमर्स के तहत दिये निर्देश को वापस लेने की बात की थी. प्रतिनिधिमंडल की सलाह को स्वीकार करते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है.
बता दें कि लॉकडाउन 4.0 के पहले ई-कॉमर्स के तहत केवल जरूरी अनिवार्य सेवाओं की ही खरीदारी की छूट थी. हेमंत सरकार ने ई-कॉमर्स के तहत खरीदारी को लेकर छूट का दायरा बढ़ा दिया था. उसमें गैर जरूरी चीजों की भी करीदारी करने की छूट दी गयी थी.
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लॉकडाउन तक ई-कॉमर्स को चालू नहीं करने की हुई थी मांग
बता दें कि झाऱखंड फेडरेशन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी. सभी सदस्यों ने मुख्यमंत्री से लॉक डाउन जारी रहने तक ई-कॉमर्स को चालू नहीं करने और कपड़ा दुकानों को खोलने की अनुमति देने का आग्रह किया था. इसके साथ ही शून्य अथवा कम ब्याज दर पर व्यावसायिक लोन देने और लॉक डाउन की पूरी अवधि का बिजली तथा टेलीफोन आदि का फिक्स चार्ज नहीं लेने की भी मांग भी सीएम हेमंत सोरेन से की थी. प्रतिनिधिमंडल में चेंबर के अध्यक्ष कुणाल अजमानी, सचिव धीरज तनेजा, सदस्य अनिल जालान और पूर्व अध्यक्ष विनय अग्रवाल मौजूद थे.
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न्यूज विंग ने भी ई-कॉमर्स के शुरू होने से लोकल दुकानदारों की समस्या पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी. शीर्षक था “लोकल व्यापारियों की जगह ई-कॉमर्स को दी गयी छूट, सरकार के इस फैसले का क्या होगा बाजार पर असर ”
इससे पहले राज्य सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को छूट दी थी. कंटेनमेंट जोन छोड़ कर इसकी छूट दी गयी थी. जबकि राज्य के कुछ खुदरा व्यापारियों को कोई रियायत नहीं दी थी. जिसमें कपड़ा, जूता, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील एडं मैट्रेस आदि के दुकान शामिल हैं. ऐसे व्यवपारियों की संख्या राज्य में अधिक है. भले ही कुछ छोटे तो कुछ बड़े हैं. राज्य में लगभग 60 दिनों के लॉकडाउन के बाद राज्य सरकार ने ये रियायत दी थी. जो केंद्र के आदेश के बाद संभव हो पाया था. ई-कॉमर्स को पूरी तरह से लागू किये जाने के बाद राज्य के तमाम कपड़ा, जूता, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील एडं मैट्रेस आदि के कारोबारियों पर नकारात्मक असर पड़ता. ई-कामॅर्स को दी गयी छूट के कई साइड इफेक्ट्स होते. जो राज्य के लिये दूरगामी साबित हो सकते थे.
खुदरा व्यवसायियों के अलावा राज्य सरकार को भी घाटा
ई-कॉमर्स कंपनियों को भले राज्य में छूट दी गयी थी. लेकिन यहां यह जानना जरूरी है कि राज्य सरकार को आइजीएसटी के तहत कर का डायरेक्ट बेनिफिट नहीं मिलता है. ई-कार्मर्स से जुड़ी सारी कंपनियां आइजीएसटी के तहत सरकार को कर देती है. इसके फायदा सीधे केंद्र सरकार को होता है. क्योंकि यह कारोबार दो राज्यों या इससे अधिक के बीच होता है. सामान्य रूप से समझें तो ई कॉमर्स कंपनियों के वेयर हाउस और डीलर अलग-अलग राज्यों में होते हैं. जबकि इनके मुख्यालय मेट्रो सिटिज में ही हैं. ऐसे में ग्राहकों की ओर से ऑर्डर मिलने के बाद अलग-अलग डीलरों से सामान मुख्यालय पहुंचाया जाता है. जिसके बाद यह अलग अलग क्षेत्रों के वेयर हाउस में पहुंचता है.
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