
Dhanbad : थानेदार की वर्दी फाड़ने के मामले में धनबाद के लोगों ने प्रतिक्रिया दी है. लोगों ने इस मामले में न्यायपालिका पर भरोसा जताया और सरकार की मनमानी को कम सजा मिलने का कारण बताया.
उन्होंने कहा कि भाजपा के राज में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गयी है. जिस कारण विधायक ढुल्लू महतो को अपेक्षा से कम सजा मिली है.
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इस तरह के मामले में झारखंड के अन्य दो विधायकों की कुर्सी जा चुकी है. और विधायक ढुल्लू महतो का इस मामले में बाल भी बांका नहीं हुआ.
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संबंधित पक्ष खटखटा सकते हैं ऊपरी अदालत का दरवाजा
न्यूज विंग से बात करते हुए अधिवक्ता सह कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ब्रजेंद्र सिंह ने कहा कि विधायक ढुल्लू महतो को डेढ़ साल की सजा सुनायी गयी है. यह एक न्यायिक प्रक्रिया है.
इस तरह के मामलों में तीन साल तक की सजा होती है. यह कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है. लेकिन न्यायालय को उनके बैकग्राउंड के बारे में भी सोचना चाहिए था, फिर सजा सुनानी चाहिए थी. अब संबंधित ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
सरकारी तंत्र ने केस को कमजोर बनाने की कोशिश की
वहीं समाजसेवी जेपी वालिया ने कहा कि भाजपा के राज में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गयी है. विधायक ढुल्लू महतो को सजा देकर न्यायपालिका ने अपना काम किया लेकिन सरकारी तंत्र ने इसको कमजोर बनाने की हर संभव कोशिश की.
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परिणाम यह हुआ है कि ढुल्लू महतो की विधायकी बची रह गयी है. उन्होंने कहा कि आम आदमी अगर ऐसी हिमाकत करता तो पुलिस उसे कहीं का नहीं छोड़ती. लेकिन ढुल्लू आम आदमी नहीं हैं.
सरकार के दबाव में आकर सुनाया गया फैसला
वहीं एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष प्रभाकर ने तो यहां तक कहा कि न्यायालय ने सरकार के दबाव में आकर यह फैसला सुनाया है. बात वही है कि सैंयां भयो कोतवाल तो अब डर काहे का.
उन्होंने कहा कि एक संगीन अपराध में विधायक को बेहद मामूली सजा सुनायी गयी है. उन्होंने बताया कि यह सजा एक डांट जैसी है. जैसे गलती करने पर अभिभावक अपने बच्चे को डांटते हैं.
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