
Ranjit Singh
Dhanbad : यह आजादी कई वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहूति देकर हमें दिलायी है. आज भी इस आजादी को बरकरार रखने के लिए हमारे जाबांज अपनी जान की बाजी लगाते रहते हैं. चार अप्रैल 2019 को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में नक्सलियों से लोहा लेते हुए धनबाद के लाल इसरार खान शहीद हो गये थे. नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद बीएसएफ के चार जवानों में एक धनबाद के इसरार खान उर्फ टिंकू भी थे. इसरार खान 2013 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे. इसरार खान के शहीद होने की खबर मिलते ही झरिया के साउथ गोलकडीह तिसरा छह नंबर साइडिंग के समीप स्थित आवास पर कोहराम मच गया था. शहीद इसरार खान आरक्षी के पद पर छत्तीसगढ़ में तैनात थे. पहली पोस्टिंग 2013 में मालदा में हुई थी. 2017 में छत्तीसगढ़ में पोस्टिंग हुई थी. दिसम्बर 2018 में छुट्टी पर आये थे. दो जनवरी 2019 को वापस गये. जिसके बाद छत्तीसगढ़ में तैनात थे.
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जवान के शहीद होते ही केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जिला प्रसासन ने कई घोषणाएं कीं. इन घोषणाओं से शहीद के परिजनों को कुछ आस बंधी थी, लेकिन यह घोषणा अब तक हवा हवाई ही साबित हुई है.

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रघुवर सरकार ने 10 लाख रुपये और नियोजन देने का दिया था आश्वासन
नक्सली हमले में शहीद इसरार के परिजनों को राज्य सरकार ने सभी सुविधाएं देने की बात कही थी. राज्य के मुखिया रघुवर दास ने 10 लाख रुपये मुआवजा और आश्रित को नियोजन देने का आश्वासन दिया था. लेकिन कई माह बाद भी शहीद के परिजनों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी गयी है. नियोजन और मुआवजा को लेकर शहीद के परिजन दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. नियोजन और मुआवजे नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है.

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अपने घर का इकलौता कमानेवाला सदस्य था इसरार
शहीद इसरार खान अपने घर का इकलौता कमानेवाला सदस्य था. उसकी कमाई से पूरा घर चलता था. परिवार के सभी लोग इसरार की कमाई पर ही टिके थे लेकिन नक्सली हमले में मोहम्मद इसरार खान के शाहीद होते ही मानों पूरे परिवार पर पहाड़ टूट गया हो.
काम-धंधा छोड़ कर कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं इसरार के पिता
शहीद के पिता आजाद साइकिल से बिस्कुट बेचने का काम करते थे. वे अब राज्य सरकार द्वारा की गयी घोषणा की राशि लेने के लिए ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं. बड़ा भाई इकबाल और इमरान बैग मरम्मत का कार्य करते हैं. छोटा भाई इरफान अभी पढ़ाई कर रहा है. फिलहाल शहीद के परिजनों ने उपायुक्त से मुआवजा ओर नियोजन की घोषणा को जल्द दिलाने की मांग की है ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हो सके.
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