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जियो फाइबर के लिए बहुत चालाकी के साथ रास्ता साफ किया गया

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Girish Malviya

पिछले साल के आखिर में ट्राई ने एक ऐसा आदेश दिया, जिससे सालों से जमे जमाये केबल कारोबारियों का धंधा एक झटके में तबाही की कगार पर आ गया…बड़े स्तर की केबल टीवी कंपनी को इंडस्ट्री में एसएमओ कहा जाता था और वह ब्रॉडकास्टर्स के साथ कंटेंट और कैरिज डील साइन करके लोकल केबल ऑपरेटर्स (एलसीओ) को नियुक्त करके अपना बिजनेस चलाते रहते थे.

कई सालों से यह व्यवस्था चलती आ रही थी, इन चैनलों में बड़ी हिस्सेदारी फ्री टू एयर चैनलों की थी, तब औसत निम्न मध्यवर्गीय घरों में मासिक 200-300 रु के बीच और उच्च मध्यवर्गीय घरों में मासिक 400-600 रु के बीच सभी चैनल्स देखने को मिल जाते थे…

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ट्राई ने ऐसा नियम बनाया, जिसके अनुसार फ्री टू एयर चैनल लेने पर भी ग्राहकों को मिनिमम अब 154 रुपए चुकाने थे. ट्राई ने यह भी दावा किया कि नए नियम लागू होने के बाद ग्राहक सिर्फ उन्हीं चैनलों का पैसा देंगे, जिन्हें उन्होंने चुना है, लेकिन जीएसटी समेत कैपिसिटी फीस ही 153 हो रही है और ऐसे में चुनिंदा चैनल लेने पर ही बिल आसानी से 300 रुपये के पार कर जाता है.

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने ट्राई के प्लान के बाद की परिस्थितियों पर एक सर्वे किया तो सामने आया कि इससे ग्राहकों का बिल 25 फीसदी या उससे ज्यादा बढ़ गया है. और उच्च मध्यवर्गीय घरों में जहां 2 या 2 से अधिक टीवी थे, वहां तो यह बिल लगभग दोगुना आने लगा.

कमाल की बात यह है कि जिस कदम से सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलने वाला था, उसके बजाए फायदा लोकप्रिय चैनलों को मिला. अभी तक फ्री टू एयर चल रहे कई सारे टीवी चैनलों ने खुद को पेड चैनल में परिवर्तित कर लिया.

उनका मुनाफा 60-70 रुपये प्रति महीने से बढ़कर 94 रुपये प्रति महीने तक पहुंच गया. पिछले साल ही रिलायंस ने देश के 2 सबसे बड़े MSO डेन नेटवर्क्स में 66 पर्सेंट और हैथवे केबल्स में 51.3 हिस्सेदारी खरीद ली थी.

यानी वह केबल और डीटीएच बिजनेस में उतरने की पूरी तैयारी कर चुका था और इधर ट्राई के आदेश के कारण ग्राहकों को केबल/DTH का महंगी सर्विस लेने की आदत पड़ चुकी हैं… यानी सारी परिस्थितियां जियो फाइबर के अनुकूल हैं.

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जियो गीगा फाइबर, फाइबर टु द होम यानी एफटीटीएच पर आधारित है. यानी जियो फाइबर एक ही केबल से टीवी सेटअप बॉक्स के साथ-साथ इंटरनेट, टेलीफोन की भी सुविधा देगा.

यानी पहले लोग वाई-फाई, टीवी और लैंडलाइन के लिए अलग-अलग पैसे खर्च करते थे, वो अब नहीं करना पड़ेगा. एफटीटीएच की वजह से स्पीड भी मिलेगी. इस सर्विस के लिए यूज की जाने वाली केबल दूसरों के मुकाबले फास्ट कनेक्टिविटी देती है.

ये मौजूदा केबल के मुकाबले बेहतर होती है. और इससे हाई स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग-गेमिंग भी पहले से बेहतर होगी. इसके अलावा स्मार्ट होम डिवाइस भी कनेक्ट कर सकेंगे. इसे घर के हर सॉकेट को भी स्मार्ट सॉकेट में बदला जा सकेगा.

यानी इस तरह की सर्विसेज देने से डीटीएच कंपनियों के साथ-साथ बीएसएनएल एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियों को जो अब तक ब्रॉडबैंड और लैंडलाइन सुविधा उपलब्ध करा रही थी, उन जैसी कंपनियों को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

हालांकि अभी प्लान की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नवीनतम जानकारी के अनुसार जियो फाइबर के प्लान 700 रु से शुरू हो रहे हैं.

जिसमें सिर्फ ब्रॉडबैंड की सुविधा बतायी है, यानी आपको केबल वाली सुविधा वाला प्लान चाहिए तो शुरुआत में मिनिमम 1000-1200 तक के एक घर से वसूले जा सकते हैं…जो जियो प्रेमी हंसकर देने को तैयार हो जाएंगे…

यह देश को रिपब्लिक ऑफ रिलायंस बनाने की ओर सबसे बड़ा कदम साबित होगा, वह जो दिखाएगा वही आप देखेंगे, वह जो बताएगा वही आपको पता होगा. आप एक कंपनी के गुलाम बन जाएंगे यह व्यवस्था एक दलीय शासन को बहुत सूट करती है.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं)

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