
Dhanbad: बीजेपी के लिए इस लोकसभा चुनाव में धनबाद सीट को जीतना जरूरी है. शायद यही कारण है कि उम्मीदवारों की दावेदारी में बड़े नेताओं के नाम लगातार सामने आने के बाद भी सांसद पीएन सिंह का टिकट नहीं कटा.
बीजेपी ने रिस्क नहीं उठाया और पशुपतिनाथ सिंह पर भाजपा ने फिर भरोसा जताया. धनबाद लोकसभा क्षेत्र के अबतक के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि दो वर्तमान सांसदों के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है.
महागठबंधन से कांग्रेस के उम्मीदवार कीर्ति आजाद भाजपा उम्मीदवार पीएन सिंह पर संसद में निष्क्रिय रहने समेत अन्य आरोप लगा रहे हैं. वहीं भाजपा उम्मीदवार पशुपतिनाथ सिंह कीर्ति आजाद को बोरो प्लेयर बताते हुए वार पर वार कर रहे हैं. वार-पलटवार के दौर में मतदाताओं के रुझान जानना दिलचस्प होगा. आइये देखते हैं क्या है सूरत-ए-हाल.
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किस आयु वर्ग के कितने मतदाता
लोकसभा चुनाव के दौरान धनबाद लोकसभा की सभी छह विधानसभा क्षेत्रों के युवा मतदाताओं का वोट निर्णायक साबित होगा. कारण, धनबाद लोकसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से युवा मतदाताओं की संख्या 63.41 प्रतिशत है.
जिसमें 20-29 साल के युवा मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक 32.39 फीसदी है. वहीं 30-39 साल के युवा की भागेदारी 26.35 प्रतिशत है. 18-19 साल के बीच के मतदाताओं की संख्या 4.67 प्रतिशत है.
इस हिसाब से देखें तो कुल युवा मतदाता 63.41 प्रतिशत है. आंकड़ो से साफ है कि 18-39 साल तक के युवा को लुभाने की भरपूर कोशिश सभी राजनीतिक दलों को करनी होगी.
20-29 साल के युवा किंग मेकर की भूमिका निभायेंगे. लोकसभा प्रत्याशी के जीत-हार का फैसला 20-29 साल के युवाओं पर निर्भर होगा.
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इस चुनाव में 23 हजार नये मतदाता करेंगे मतदान
धनबाद लोकसभा क्षेत्र में 20 लाख 49 हजार 181 वोटर है. जिसमें 11 लाख 9 हजार 541 पुरुष, 9 लाख 35 हजार 234 महिला, 27 अन्य तथा 4379 सर्विस वोटर हैं. सर्विस वोटर में पुरुष की संख्या 4187 तथा महिलाओं की संख्या 192 है. इस वर्ष 23000 नए वोटरों का नाम मतदाता सूची में जोड़ा गया है. कुल मतदाताओं में तीसरे तीसरे नंबर पर 40-49 साल के मतदाता है, इनकी संख्या 17.31 प्रतिशत हैं.
वहीं चौथे स्थान पर 50-59 साल के मतदाता हैं, इनकी संख्या 11.40 प्रतिशत है. 60-69 साल के मतदाताओं की संख्या 05.66 प्रतिशत और 70-79 साल के मतदाताओं की संख्या 01.83 प्रतिशत है. 80 से उपर मतदाताओं की 0.38 प्रतिशत है.
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युवा और ग्रामीण मतदाता किसका साथ देंगे
आम जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दे जैसे नौकरियां, व्यापार के अवसरों की कमी, जीएसटी से होने वाली दिक्कतें, महंगाई के फ्रंट पर भाजपा सरकार ज्यादा कुछ करने में कामयाब नहीं होना सभी के सामने है. छोटे ठेकेदारों का काम बंद करके उसे बड़ी कंपनियों को देने से भी असंतोष बढ़ा है. इन मुद्दों पर सरकार का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा. किसानों के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां कर्ज माफी जैसे लुभावने वादे और उन्हें पूरा करने के दावे लेकर खड़ी हैं. किसानों की आत्महत्या भी एक मुद्दा है. इस बीच भाजपा के पास भावनात्मक मुद्दे हैं. जैसे मंदिर, राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति आदि. ये मुद्दे उस वर्ग पर असर डालने में नाकाम रहे हैं, जो सोशल मीडिया से दूर हैं. ऐसे में सवाल लाजमी है कि धनबाद लोकसभा के युवा और ग्रामीण किसका साथ देंगे?
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