
Anwar Hussain
Jamtara: झारखंड की सबसे लंबी ध्वस्त पुल को दोबारा बनाने को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है. यह पुल जामताड़ा व धनबाद जिले की दूरी को कम करने एवं राज्यो के मंत्रियों और पदाधिकारियों की सहुलियत के उद्देश्य से बनाया गया था. साथ ही मरीजों, छात्रों और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी ये पुल काफी महत्वपूर्ण है. इस पुल के बनने से लोगों को धनबाद से रांची की यात्रा को लेकर काफी आराम मिल गया था. लेकिन ध्वस्त पुल को दोबारा बनाने की दिशा में राज्य सरकार कोई दिलचस्पी नही दिखा रही है. स्थानीय लोगों को जान जोखिम में डाल कर नदी पार करना पड़ रहा है.

2009 से बंद है निर्माण कार्य
2009 में पुल निर्माण कार्य के दौरान ही पुल के पांच खंबे गिर गये थे. उसके बाद से निर्माण कार्य बंद है. बताया जा रहा है कि यह झारखंड राज्य की सबसे लंबी पुल बन रही थी. इस पुल की लंबाई लगभग डेढ़ किमी थी. निर्माण कार्य करने वाली एजेंसी पर भी सिर्फ कार्रवाई कर छोड़ दिया गया था.
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पुल निर्माण संघर्ष समिति ने डीसी और सीएम को सौंपा ज्ञापन
बरकार नदी पर पुल निर्माण के लिए बनी संघर्ष समिति ने बीते 2 जनवरी 2021 को डीसी को ज्ञापन सौंपा. इसके पहले सीएम को भी ज्ञापन सौंपा जा चुका है . उक्त विषय पर संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक महतो व सचिव कौरेश अंसारी ने कहा कि बरबेंडिया घाट पर पुल निर्माण के लिए कई बार सरकार के मंत्री, विधायक को लिखित आवेदन दिया गया है. चार महीने पहले कृषि मंत्री बादल पत्रलेख को भी ज्ञापन सौंपा गया था. उन्होंने पुल का कार्य 2021 में पूरा करने का आश्वासन दिया था. लेकिन उसके बाद कोई आदेश जारी नहीं हो सका है.
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ग्रामीणों को 60 किमी की दूरी तय कर जाना पड़ता है धनबाद
पुल निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक महतो ने कहा जामताड़ा व निरसा के बीच की दूरी नदी घाट होकर लगभग 25 किलोमीटर है. लेकिन पुल न होने की वजह से जामताड़ा क्षेत्र के वीरग्राम,श्यामपुर,नितायडीह, मेझिया, लाधना,सहरजोरी,धोबना, दुलाडीह, नावाडीह, चेंगायडीह सहित अन्य ग्रामीणों को 60 किलोमीटर दूरी तय कर निरसा जाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के किसानों के साथ ही मरीजों और छात्रों को भी काफी धनबाद तक जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
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