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हाइकोर्ट के नये भवन की अनियमितता मामले में हाइकोर्ट ने सरकार से पूछा- जब मामले की जांच एसीबी कर रही थी तो फिर सिंगल मेंबर ज्यूडिशियल कमेटी बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

Ranchi : धुर्वा स्थित झारखंड हाइकोर्ट के नये निर्माणाधीन भवन को लेकर दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में हुई. मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सिंगल मेंबर ज्यूडिशियल कमिटी क्यों बनाने का निर्णय लिया गया, जबकि एंटी करप्शन ब्यूरो( एसीबी) से इस मामले की जांच करायी जा रही थी. इससे पहले राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर कोर्ट को बताया गया कि हाइकोर्ट के नये भवन की अनियमितता मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट या हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता वाली सिंगल मेंबर ज्यूडिशियल कमिटी बनाई गई है. वहीं प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पहले आठ सदस्य वाली सीनियर आईएएस अधिकारियों की एक कमेटी ने हाइकोर्ट के नये भवन की अनियमितता की रिपोर्ट दी थी. इसके बाद यह मामला जांच के लिए एसीबी को दे दिया गया था. अब सरकार मामले की जांच को लेकर जुडिशल कमिशन बना रही है. जरेडा की ओर से कोर्ट को शपथ पत्र दाखिल बात कर बताया गया कि 400 किलोवाट रूफटॉप सोलर पावर ग्रिड निर्माण का कार्य प्रोग्रेस पर है. राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया हाइकोर्ट के नए बिल्डिंग के निर्माण का कार्य फाइनल स्टेज में है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई 3 मार्च निर्धारित की. हाइकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. दरअसल, पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मौखिक रूप से कोर्ट को बताया गया कि 15 मार्च 2023 तक झारखंड हाइकोर्ट का नया भवन पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा जिसे हाइकोर्ट को हस्तांतरित करा दिया जायेगा. सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि हाइकोर्ट के नए भवन में सोलर पैनल के अधिष्ठापन के लिए भवन निर्माण विभाग ने करीब 14 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है. सोलर पैनल 2000 किलो वाट का होगा.

क्या है मामला

प्रार्थी अधिवक्ता राजीव कुमार ने हाइकोर्ट के नये भवन मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की है. इसमें कहा गया है कि वर्ष 2015 में धुर्वा में हाइकोर्ट के बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ था. दिसंबर 2018 तक कार्य पूरा होना था, लेकिन आज भी अधूरा है. निर्माणाधीन बिल्डिंग में बाकी बचे काम को पूरा करने के लिए सरकार ने संशोधित डीपीआर के तहत कार्यादेश दिया है. संवेदक द्वारा निर्माण कार्य किया जा रहा है.

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