
Jamshedpur : पूर्व सांसद व सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड से दिल्ली गई विभिन्न दलों की प्रतिनिधिमंडल ने 26 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर सरना धर्म कोड के मामले को नहीं उठाना भारत के प्रकृति पूजक 15 करोड आदिवासी समाज के साथ एक बड़ा धोखा है. जबकि पहले जाति जनगणना के साथ सरना धर्म कोड के मामले को उठाने की घोषणा की गई थी. हेमंत सरकार बारंबार आदिवासी समाज के साथ धोखा कर रही है. आज संविधान विरोधी टीएसी की बैठक भी एक धोखा है. टीएसी की नियमावली पर झारखंड के राज्यपाल को गौर करना चाहिए था. लगता है इसकी अवहेलना की गई है. बर्तमान टीएसी पांचवीं अनुसूची की धारा 4 (3) का उल्लंघन और अतिक्रमण है. हेमंत सरकार ने 23 मार्च 21 को झारखंड विधानसभा में लैंड पूल बिल पास कर सीएनटी/ एसपीटी कानून को छेद कर नगरों के चारों तरफ 10 किलोमीटर के रेडियस में जमीन लूट की छूट पूंजीपतियों को दे दिया है. जिनके साथ 27-28 अगस्त 2021 को दिल्ली में ₹10 हजार करोड़ का एमओयू कर लिया है. झारखंडी स्थानीयता नीति, नियोजन नीति और न्यायपूर्ण आरक्षण नीति आदि का मामला अब तक लंबित है. जो झारखंडी आत्मा की तरह हैं. आज बिन आत्मा के शरीर की तरह झारखंड भटक रहा है. आदिवासी सेंगेल अभियान अन्य संगठनों के साथ मिलकर 30 सितंबर 2021 को 5 प्रदेशों में उपरोक्त मुद्दों के लिये धरना प्रदर्शन करेगी.
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