
Ranchi: झारखंड में पॉलिटिकल स्टंटबाजी लगातार जारी है. खासकर सत्ता पक्ष की ओर से. झामुमो विधायक बैजनाथ राम अपनी पार्टी और सरकार से अलग ही नाराज हैं. उन्हें मंत्री बनाया जाना था पर अंतिम समय में उनका नाम काटा गया. इसके अलावा, कांग्रेसी विधायक मंत्री पद और दूसरी शिकायतों को लेकर दिल्ली में जमे हुए थे. अब 18 फऱवरी की देर रात से उनके दिल्ली से कहीं और शिफ्ट होने की खबर उड़ रही है. जो भी विधायक पार्टी आलाकमान से मिलकर अपनी बात रखने को दिल्ली में पड़े थे, वे अब मीडिया से भी दूरी बनाते दिख रहे हैं. विधायकों के अपना ठिकाना बदले जाने की खबर से राज्य में अलग सियासी टेंशन भी पैदा हो गया है. कहा जा रहा है कि उन्होंने अपना लोकेशन रविवार की रात से चेंज कर लिया है. कहीं कोई कह रहा कि वे सब जयपुर निकल गये हैं तो कोई बेंगलुरू तो कोई कहीं और बता रहा. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक विधायक ने इतना ही कहा है कि वे सब अब दिल्ली से बाहर हैं, और कोई भी विधायक फोन तक नहीं ले रहे हैं. हालांकि इस संबंध में औपचारिक तौर पर कोई कुछ नहीं कह रहा. वैसे प्रदेश कांग्रेस के मुताबिक, कोई विधायक इधर उधर नहीं है, सब दिल्ली में ही हैं.
अबतक नहीं बनी बात
गौरतलब है कि विधायक अनूप जयमंगल सिंह, राजेश कच्छप, उमाशंकर अकेला, इरफान अंसारी, अम्बा प्रसाद, दीपिका पांडे सिंह, सोना राम सिंकु और भूषण बाड़ा जैसे विधायकों के दिल्ली में जमे होने की सूचना मीडिया के जरिये रविवार की शाम तक आ रही थी. वैसे कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को बदले जाने के मसले पर जब नाराज कांग्रेसी विधायकों की बैठक रांची में हुई थी तो उस दौरान उनकी संख्या 12 थी. शिल्पी नेहा तिर्की, रामचंद्र सिंह, नमन विक्सल कोंगाड़ी और पूर्णिमा नीरज सिंह का भी नाम इस लिस्ट में शामिल था. फिलहाल, इन चारों विधायकों को छोड़ बाकी 8 विधायक झारखंड से बाहर हैं.
गौरतलब यह भी है कि रविवार को प्रदेश प्रभारी (झारखंड) गुलाम अहमद मीर ने नाराज विधायकों से लंबी बात की थी. पर विधायक अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं. पूर्व प्रदेश प्रभारी उमंग सिंघार भी विधायकों से मिल चुके हैं. पर अबतक कोई ठोस बात नहीं बनी है. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि अगर विधायकों की नाराजगी समय रहते दूर नहीं हुई तो वे अगले कुछ दिनों में शुरू होने वाले झारखंड विधानसभा के बजट सत्र से भी दूरी बना सकते हैं. इस संबंध में नाराज विधायकों ने भी पूर्व में मीडिया के सामने यह बात कही थी. कांग्रेसी विधायक पुराने मंत्रियों को ही रिपीट किए जाने से प्रदेश नेतृत्व से भी नाराजा है. उन्हें हटाने और नए चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग कर रहे हैं जिसमें एक महिला मंत्री भी हो.
बैजनाथ ने अब बनायी दूरी
इधर, बैजनाथ राम अपनी सरकार से अलग ही नाराज हैं. मंत्रिमंडल की लिस्ट से आखिरी समय में नाम काटे जाने के बाद से वे खफा हैं. उन्होंने 16 फरवरी को चंपाई सोरेन सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही मीडिया के सामने नाराजगी जाहिर करते कहा था कि अगले दो दिनों के अंदर उन्हें अगर मंत्री नहीं बनाया गया तो वे पार्टी छोड़ देंगे. उन्होंने इस मामले को एससी वर्ग की उपेक्षा से भी जोड़ा था. अब सबकी नजरें उन पर हैं कि आखिर वे किस फॉर्मूले पर शांत होते हैं.
सब ठीकः कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सतीश पॉल मुंजनी के मुताबिक पार्टी विधायक दिल्ली में हैं. प्रदेश नेतृत्व के संपर्क में ही हैं. परिवार में थोड़ा मनमुटाव होता रहता है पर कहीं कोई दिक्कत नहीं है. सब जल्द ही रांची लौट आएंगे.
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