
Khunti: जिला प्रशासन, सेवा वेलफेयर सोसाइटी व क्षेत्र के ग्रामसभाओं के सामुदायिक प्रयास से जिले में जल संचयन के लिए चल रहे नदी बचाओ अभियान के तहत मंगलवार को मुरहू प्रखंड अंतर्गत जामटोली, माहिल में बनई नदी पर 200 फीट लंबा बोरीबांध बनाकर जल संचयन किया गया. इसके लिए ग्रामीणों ने सुबह आठ बजे से अपराह्न दो बजे तक तपती धूप में पसीने से तर-ब-तर होकर श्रमदान किया. जिस जगह नदी में बोरी बांध बनाया गया है वहां अभी एक पतली सी धार बह रही थी, जो अगले सप्ताह भर ते अंदर थम जाती लेकिन बोरीबांध बनने के बाद काफी बड़े क्षेत्र में लबालब पानी भर गया.
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बोरी बांध बनने से ग्रामीण बेहद खुश
श्रमदान करने वालों में महिलाएं व युवतियां भी शामिल थीं. पानी की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद में श्रमदान करने वालों में काफी उत्साह था. बोरीबांध बनने के बाद जामटोली में सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया. इस दौरान बोरीबांध निर्माण में श्रमदान करने वाले जामटोली निवासी समाजसेवी सुखदेव मुंडा ने कहा कि बोरीबांध बनने से काफी अच्छा जल संचयन हुआ है. इससे गांव में महिलाओं को नहाने-धोने, खेतों के पटवन करने और मवेशियों पिलाने के लिए पानी मिलेगा. सुखदेव मुंडा ने कहा कि अगले 48 घंटे के अंदर बोरीबांध में काफी पानी भर जाएगा और नदी के बंद हुए श्रोतों से भी पानी बहने लगेगा. उन्होंने कहा कि उनके गांव के पास जल्द ही एक और बोरीबांध का निर्माण कराया जाएगा.

बोरी बांध बनने से अवैध बालू उठाव पर लगेगी रोक
गांव के एक बुजुर्ग ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बनई नदी में घाघरा से लेकर गानालोया तक बालू माफियाओं के लिए सेफ जोन है. सालों से यहां इस नदी से प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर बालू का खनन होता है. जिसका परिणाम है कि बनई नदी अपनी सतह से दस फीट नीचे चली गई है और अब नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. उन्होंने कहा कि बोरीबांध बनने से अवैध बालू का उठाव रूकेगा. जिन लोगों के द्वारा श्रमदान कर बोरीबांध बनाए जाते है वे बांध के आसपास से बालू का उठाव नहीं होने देते. इस कारण नदी पर बोरीबांध बनने से नदी का संरक्षण भी होता है.

श्रमदान करने वालों रहे मौजूद
बोरीबांध निर्माण में श्रमदान करने वालों में सुखदेव मुंडा, सेवा वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधि, राहुल महतो, जगन्नाथ मुंडा, मागो मुंडा, महेंद्र मुंडा, नयन सोय, रवि प्रधान, सूरज नाथ कर, सुखराम मुंडा, गानू मुंडा, सुसारी देवी, लखीमनी देवी, एतवारी देवी, चमनी देवी, सुनीता देवी, दसमी देवी समेत जामटोली, घाघरा व आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने श्रमदान किया.





