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तीन वर्षों से चल रहा है रांची, पलामू और गढ़वा जेल में खेल, नहीं हुआ जेल अधीक्षकों का तबादला

Ranchi :  राज्य के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार होटवार रांची, केंद्रीय कारा पलामू और मंडल कारा गढ़वा के जेल अधीक्षक तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही जेल में जमे हुए हैं. लेकिन इनका तबादला नहीं हो रहा है. सरकारी प्रावधान है कि किसी सरकारी पदाधिकारी और कर्मचारी का तबादला 3 वर्षों के पश्चात कर दिया जाना चाहिए.

लेकिन 3 वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी इन जेलों के जेल अधीक्षक का तबादला दूसरे जेलों में नहीं किया गया है. रांची जेल अधीक्षक 5 वर्षो से पलामू जेल अधीक्षक 4 वर्षो से और गढ़वा जेल अधीक्षक भी साढ़े तीन वर्षों से एक ही जेल में पदस्थापित हैं.

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18 वर्षो में सिर्फ तीन बार हुआ है जेल अधीक्षक का तबादला

जानकारी के अनुसार, झारखंड गठन के बाद पिछले 18 वर्षों में सूबे के जेलों में तैनात जेल अधीक्षकों का सिर्फ तीन बार ही तबादला हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक ही जेल में लंबे समय से जमे रहने वाले जेल अधीक्षक पैरवी और जेल में बंद पैसे और रसूखदार कैदियों की मदद से पदस्थापित हैं. इसके बदले रसूख वाले कैदियों से पैसे लेकर सभी सुख सुविधाएं भी उन्हें जेल के अंदर बड़े ही आराम से उपलब्ध करवायी जा रही है.

पिछले 2 वर्षों से नहीं हुई है स्थापना समिति की बैठक

वहीं पिछले दो वर्षों से स्थापना समिति की बैठक नहीं हुई है. सरकारी प्रावधान के अनुसार प्रत्येक वर्ष जून और जुलाई महीने के बीच स्थापना समिति की बैठक होती है. लेकिन हालात यह है कि जहां वर्ष 2018 में भी स्थापना समिति की बैठक नहीं हुई. वहीं वर्ष 2019 में जुलाई का महीना खत्म होने में सिर्फ जो दिन बचे हुए हैं, लेकिन अब तक स्थापना समिति की बैठक नहीं हुई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कुछ जेल अधीक्षक मैनेज करके स्थापना समिति की बैठक नहीं होने दे रहे हैं.

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रांची और हजारीबाग जेल में पैसे वाले कैदियों को मिलती है सारी सुविधाएं

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रांची के बिरसा मुंडा जेल और हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद पैसे वाले कैदियों को होटल की तरह तमाम सुविधाएं मिल रही हैं. इसके लिए कैदी जेल में भरपूर पैसे दे रहे हैं.

सूत्रों की मानें तो होटवार जेल और हजारीबाग जेल में कैदी जमकर रूपये खर्च कर रहे हैं और सुविधायें ले रहे हैं. हालांकि जेल प्रशासन इस बात से हमेशा इनकार करता रहा है. सूत्रों की माने तो जेल के एक वार्ड को वीआईपी वार्ड का दर्जा दिया गया है.

और यह अवैध कमाई का जरिया बना हुआ है. इस वार्ड में सारी सुविधाएं दी जाती हैं. जिसमें सिंगल बेड, बेहतरीन खाना, सिलिंग फैन और कैदियों द्वारा मसाज की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है. इससे भी ज्यादा मोबाइल फोन भी दिया जा रहा है. हालांकि इस वार्ड में रहने के बदले जेल प्रशासन हर महीने कीमत भी वसूलते हैं.

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विधानसभा में भी उठा था जेल अधीक्षक के तबादला का मुद्दा

विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान भी रांची, पलामू और गढ़वा जेल में जमे जेल अधीक्षक को लेकर 25 अगस्त 2019 को विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी द्वारा तारांकित प्रश्न पूछा गया था. कि सरकारी प्रावधान के अनुसार, किसी भी पदाधिकारी और कर्मचारी का स्थानांतरण 3 वर्षों के पश्चात कर दिया जाता है. लेकिन इन चारों जेल में जमे 3 वर्षों से अधिक समय से जेल अधीक्षक का तबादला क्यों नहीं हुआ है.

झारखंड में हैं कुल 29 जेल

झारखंड में 7 सेंट्रल जेल, 16 मंडल कारा, 5 उपकारा और एक ओपन जेल है. राज्य के 7 सेंट्रल जेल- रांची, हजारीबाग, जमशेदपुर, दुमका, डालटनगंज, गिरिडीह और देवघर हैं. वहीं 16 मंडल कारा- धनबाद, चाईबासा, सरायकेला, गढ़वा, लातेहार, चतरा, कोडरमा, बोकारो (चास), जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहेबगंज, सिमडेगा, लातेहार और गुमला जिले में है. 5 उपकारा – खूंटी, तेनुघाट, रामगढ़, राजमहल, मधुपुर में हैं और राज्य का एकमात्र ओपन जेल हजारीबाग में है.

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