
Ranchi : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) अगले शैक्षणिक सत्र से आर्मी स्कूल की शुरुआत करने जा रही है. जहां बच्चों को आर्म्ड फोर्स में ऑफिसर बनने का प्रशिक्षण दिया जायेगा. इस स्कूल को आरएसएस की शैक्षणिक इकाई विद्या भारती संचालित करेगी. स्कूल का नाम आरएसएस के पूर्व सरसंघ संचालक राजेंद्र सिंह रज्जू भैया के नाम से संचालित होगी.
स्कूल दी रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर के नाम से जाना जायेगा. स्कूल उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के शिकारपुर में तैयार किया जा रहा है. इसी स्थान पर आरएसएस के पूर्व चीफ का जन्म 1922 में हुआ था.
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सीबीएसइ पैटर्न पर होगी पढ़ाई
इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, छात्रों के लिए यह आवासीय विद्यालय तैयार हो गया है. यहां सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के सिलेबस के अनुसार पढ़ाई करायी जायेगी. यहां कक्षा छह से 12 वीं तक की पढ़ाई होगी.
क्लासेस अगले शैक्षणिक सत्र में अप्रैल माह से प्रारंभ होगी. आरएसएस की शैक्षणिक इकाई विद्या भारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के रिजन कनविनर अजय गोयल बताते हैं कि देश में हमारी ओर से यह एक प्रयोग की तरह है. इसमें समय के साथ परिवर्तन किया जायेगा. गौरतलब है कि विद्या भारती की ओर से देशभर में 20 हजार से अधिक स्कूल संचालित किये जा रहे हैं.
वे बताते हैं कि पहले बैच के लिए प्रोसपेक्टस पूरी तरह से लगभग तैयार हो चुका है. नामांकन के लिए अगले महीने से आवेदन मिलने की लगेगा.
160 सीट से शुरू होगा बैच, 56 सीट शहीद परिवारों के लिए
जानकारी के मुताबिक, कक्षा छह में 160 विद्यार्थियों के नामांकन से स्कूल की शुरुआत की जायेगी. इसमें 56 सीट शहीद परिवार के बच्चों के लिए सुरक्षित होंगे. जिन्हें आरक्षण दिया जायेगा. आर्मी से रिटायर अधिकारी सितंबर माह तक अपनी सलाह दे सकते हैं.
अजय गोयल बताते हैं कि आर्मी के कई बड़े अधिकारी आरएसएस से संपर्क में हैं. आरएसएस आर्मी की शिक्षा स्कूल स्तर से ही देने को लेकर शुरू से गंभीर है. महत्वपूर्ण बात यह है कि नासिक में 1937 में शुरू किया गया भोंसले मिलिट्री स्कूल इसी मॉडल के तहत संचालित हो रहा है. इसकी स्थापना बीएस मूंजे ने की थी. बीएस मूंजे आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेबर के मार्गदर्शक रहे हैं.
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20 हजार स्क्वायर मीटर के निर्माण में खर्च होंगे 40 करोड़
आरएसएस के लोग यहां आते रहते हैं, लेकिन उनका स्कूल संचालन में सीधा हस्तक्षेप नहीं है. इस स्कूल के ब्रॉशर में बताया गया है कि आर्मी, नेवी व एयर फोर्स में अधिकारियों की काफी कमी है. इसके पीछे का कारण यह है कि देश के नौजवान ऑफिसर पद की योग्यता को पूरा नहीं कर पाते हैं. हालांकि देश के हर राज्य में एक सैनिक स्कूल है पर वे अधिकारी की मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
20 हजार स्क्वायर मीटर में तैयार हो रहे इस भवन के लिए आर्मी मैन व किसान राजपाल सिंह ने जमीन दान में दिया है. इसका निर्माण बीते 24 अगस्त से किया जा रहा है. जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वह राजपाल सिंह जनकल्याण सेवा समिति ट्रस्ट का हिस्सा है.
इस 20 हजार स्क्वायर मीटर में तैयार हो रहे भवन में एकेडमिक भवन तीन मंजिला होगा. यहां तीन मंजिला हॉस्टल के साथ, डिस्पेंसरी, बड़ा स्टेडियम व स्टॉफ क्वार्टर भी होंगे. इस पूरे निर्माण कार्य पर 40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
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