
Ranchi : राज्य के 38 हजार से भी ज्यादा केंद्रों में लाखों गर्भवतियों और बच्चों को किस व्यवस्था से पोषाहार मिलेगा इस पर असमंजस अभी भी बरकारार है. समाज कल्याण विभाग के लोग चाहते हैं कि पोषाहार पुरानी व्यवस्था से मिले, जिसमें सेविकाओ को पैसे दिये जायें. विभाग को इस व्यवस्था में दो फायदा दिखता है एक तो इसमें कोई कंपनी बीच मे नहीं आयेगी और जिससे मिसमैनेजमेंट की शिकायत विभाग को नहीं झेलनी होगी.
सेविकाएं अपने केंद्र में पोषाहार तैयार करेंगी तो लाभुकों को साफ-सुथरा और गर्म खाना मिलेगा. जो बच्चों को खूब पसंद आयेगा. रेडी टु इट का नुकसान यह है कि खाना गर्म नहीं होता. ठंडा और देर तक पैकेट बंद रहने से स्वाद बिगड़ जाता है जिसे बच्चे पसंद नही करते और आध-अधूरा खाकर या तो फेंक देते है या किसी दूसरे को दे देते हैं.
लाभुकों को रोज का पोषाहार गर्म और ताजा मिले
विभाग के लोगों का मानना है कि रेडी टु ईट के लिए जिस हिसाब से सप्लाई चेन और संसाधन की जरूरत होगी वो राज्य के किसी भी सेल्फ हेल्प ग्रुप के बस की बात नहीं. ऐसे में पैकेट फुड की सप्लाई में हमेशापरेशानियों का सामना करना पड़ेगा. समाज कल्याण विभाग की दलील है कि सभी दिनो के पोषाहार की एक लिस्ट बना ली जाये और अंगनवाड़ी केंद्रों को दे दी जाये इसके साथ ही सेविकाओं को पैसें दिये जायें, ताकि लिस्ट के हिसाब से लाभुकों को रोज का पोषाहार गर्म और ताजा मिल सके..
पोषाहार पर सीएम की अलग राय
आंगनबाड़ी केद्रों में बच्चों को पोषाहार कैसे मिले, इसपर सीएम अपनी अलग राय रखे हुए है.सीएम चाहते हैं कि पोषाहार सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए मिले जैसा कि इस वक्त केरल और महाराष्ट्र में हो रहा है लेकिन वहां की तुलना में यहां के सेल्फ हेल्प ग्रुप उतने सक्षम नहीं कि ये भार उठा सकें. सीएम दफ्तर से अड़ंगा लगने के बाद Ready to Eat का टेंडर वीच भंवर में है.
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