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CM के विभाग में 32 करोड़ के TDS घोटाले के आरोपी उमेश कुमार को फिर बनाया गया JBVNL का CFO, राहुल पुरवार हैं MD

Ranchi: बहुमत की सरकार. स्थायी सरकार. जीरो टॉलरेंस. बेदाग सरकार. मुख्यमंत्री रघुवर दास अक्सर इन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. पर, क्या वह जो कहते हैं, वही सच है. शायद नहीं. घपले-घोटाले के आरोपियों पर उनके ही विभाग में कार्रवाई नहीं होती.

झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) एकबार फिर से चर्चा में है. इस विभाग के एमडी राहुल पुरवार हैं. पिछले साल इस विभाग में 32 करोड़ रुपये का टीडीएस घोटाले का खुलासा हुआ था. शुरू में यह घोटाला 15 करोड़ का होने की बात सामने आय़ी थी. बाद में बढ़ कर करीब 32 करोड़ का हो गया.

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इस घोटाले के मुख्य आरोपी जेबीवीएनएल चीफ फाइनांस अफसर उमेश कुमार हैं. उमेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गयी. जो अंजाम तक नहीं पहुंची. विभाग ने उन्हें दोबारा वित्तीय मामलों का मुख्य काम दे दिया.

टीडीएस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद जेबीवीएनएल के तत्कालीन एमडी नितिन मदन कुलकर्णी ने एक आदेश जारी किया था. जिसमें उन्होंने उमेश कुमार समेत तीन पदाधिकारियों को किसी भी प्रकार के भुगतान के कामों से अलग रखने का आदेश दिया था.

नितिन मदन कुलकर्णी आदेश में लिखा था- संपूर्ण प्रकरण में वित्त नियंत्रक उमेश कुमार, वित्त एवं लेखा विभाग के वरीय प्रबंधक जितेंद्र प्रसाद गुप्ता व प्रवीण कुमार की संलिप्तता रही है. यदि ऐसे पदाधिकारी सजगता बरतते तो राशि का भुगतान रोका जा सकता था. साथ ही भुगतान के बाद भी राशि की वसूली के लिये कार्रवाई की जा सकती थी. लेकिन इन पदाधिकारियों के द्वारा राशि की वसूली के लिये कोई प्रयास नहीं किया गया. एक एजेंसी को बिना उसके भुगतान किये गये राशि से कटौती कर टीडीएस प्रमाण पत्र भी निर्गत कर दिया गया.

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इस घटना से इन पदाधिकारियों द्वारा इस मामले में साजिश के तहत किया गया काम, गंभीर वित्तीय अनियमितता है. इसलिये तीनों पदाधिकारियों को लेखा शाखा में किसी भी ऐसे प्रभार का दायित्व नहीं दिया जाये, जिसमें भुगतान संबंधित कार्य होते हों. साथ ही तीनों का तबादला कर दिया जाये. श्री कुलकर्णी ने तीनों अफसरों पर विभागीय कार्रवाई चलाने का भी आदेश दिया था.

इसके बाद नितिन मदन कुलकर्णी का तबादला कर दिया गया. फिर महालेखाकार के यहां से आये एक पत्र के आधार पर टीडीएस घोटाला प्रकरण को ऑडिट रिपोर्ट से ही हटा दिया गया.

इसके बाद जेबीवीएनएल ने उमेश कुमार को विभाग का चीफ फाइनांस अफसर बना दिया. चीफ फाइनांस अफसर बनने के बाद 13 मार्च 2019 को उमेश कुमार ने कार्यालय के सभी अधिकारियों के लिये एक बफशीट लिखी.

जिसमें उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्चुअल मैटर (ठेका से संबंधित मामलों) और पेमेंट (भुगतान) से संबंधित किसी भी मामले की फाइल हर हाल में उनके पास भेजी जाये. इसके लिये उन्होंने कुछ नियमों का भी हवाला दिया.

साथ ही उन्होंने लिखा कि ठेका और भुगतान से संबंधित फाइलें किसी भी स्थिति में बिना उनके पास भेजे क्लीयर नहीं की जाये.

उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई को विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने जेबीवीएनल के एमडी राहुल पुरवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये हैं.

हेमंत सोरेन ने भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप मुख्यमंत्री रघुवर दास पर भी लगाये हैं. इस तरह समझा जा सकता है कि जेबीवीएनल में घोटालेबाजों को किस तरह संरक्षण दिया जा रहा है.

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