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तीन सजायाफ्ता ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए हाई कोर्ट का खटखटाया था दरवाजा, एक को मिली सफलता, दूसरे ने अपनी याचिका ली वापस, तो तीसरे को नहीं मिली अनुमति

पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, रामगढ़ पूर्व विधायक ममता देवी और कुख्यात अपराधी अमन साहू ने हाईकोर्ट से सजा पर रोक का किया था आग्रह

Rana Pratap Singh

Ranchi: झारखंड में विधानसभा चुनाव 2024 में अपनी किस्मत आजमाने के लिए अपराधी/राजनीतिज्ञ समेत तीन सजायफ्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसमें से सिर्फ एक पूर्व विधायक ममता देवी को ही हाई कोर्ट से राहत मिली है. शेष दो बंधु तिर्की एवं अमन साहू के हाथ सिर्फ मायूसी लगी. सबसे पहले बात करते हैं आय से अधिक संपत्ति मामले में सजायफ्ता पूर्व मंत्री बंधु तिर्की से.

बंधु तिर्की ने लंबी बहस के बाद वापस ली पिटीशन

बंधु तिर्की ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए सजा के खिलाफ अपनी क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप याचिका (आईए ) दाखिल कर सजा पर रोक  का आग्रह किया था. 2 घंटे इस पर लंबी बहस भी चली थी, हालांकि बंधु तिर्की ने अपनी सजा पर रोक संबंधी अपनी आईए को वापस ले लिया था. 28 मार्च 2022 को सीबीआई की विशेष कोर्ट ने तत्कालीन मांडर विधायक बंधु तिर्की को 3 साल की सजा एवं 3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के कार्यकाल में शिक्षामंत्री रह चुके बंधु तिर्की पर 6 लाख 28 हजार 698 रुपये आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था. साल 2010 में सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में कांड संख्या आरसी-5ए/10 के तहत केस दर्ज किया था.

कुख्यात अपराधी अमन साहू की पिटीशन खारिज

वहीं कुख्यात अपराधी अमन साहू ने भी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए हाईकोर्ट में दस्तक दी थी. लेकिन उन्हें भी हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली. उनके खिलाफ 100 से अधिक गंभीर अपराधों को देखते हुए हाईकोर्ट ने उसे अनुमति नहीं दी थी. अमन साहू की ओर से चुनाव लड़ने के लिए सजा पर रोक लगाने के आग्रह संबंधित हस्तक्षेप याचिका (आईए) को  हाइकोर्ट ने खारिज कर दी थी. आर्म्स एक्ट में रामगढ़ की निचली अदालत में अमन साहू को मई 2018 में 6 साल की सजा सुनाई थी. मामले को लेकर रामगढ़ के पतरातू थाना में कांड संख्या 273 /2015 दर्ज की गई थी.

पूर्व विधायक ममता देवी को दोषी ठहराए जाने के बिंदु पर लगी रोक

दूसरी ओर हजारीबाग की निचली अदालत से सजा पाई रामगढ़ की पूर्व विधायक ममता देवी ने भी चुनाव लड़ने के लिए हाई कोर्ट से अनुमति मांगी थी. हाई कोर्ट ने ममता देवी को दो अलग-अलग मामले में हजारीबाग की निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बिंदु पर रोक लगा दी है. इससे ममता देवी का चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया था. जिन दो मामलों में ममता देवी को दोषी ठहराते हुए सजा मिली थी उनमें से एक रजरप्पा थाना कांड संख्या 79/2016 में 13 दिसंबर 2022 को ममता देवी को 5 साल की सजा मिली थी.

वहीं 4 जनवरी 2023 को गोला गोली कांड के चौथे मामले गोला थाना कांड संख्या 65/2016 में हजारीबाग की विशेष कोर्ट ने ममता देवी  को 2 साल की सजा दी थी और उन पर 5  हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था. 29 अगस्त 2016 को रामगढ़ के गोला थाना क्षेत्र में आइपीएल कंपनी को बंद कराने को लेकर कंपनी के सामने ममता देवी के नेतृत्व नागरिक चेतना मंच के बैनर तले 150-200 संख्या में ग्रामीण धरना पर बैठे थे. इस दौरान ग्रामीण उग्र हो गये थे. पुलिस को आत्मरक्षा और बचाव को लेकर फायरिंग करनी पड़ी थी. इस घटना में कुछ लोगों की मौत और दो से तीन दर्जन लोग घायल भी हो गये थे.

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