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6OOO से भी अधिक सरकारी स्कूलों में धरातल पर RTE नहीं, एक टीचर के भरोसे लाखों नौनिहालों का भविष्य

Principal Correspondent

Ranchi: राज्य के 6000 से अधिक स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून का मजाक बना हुआ है. इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों स्टूडेंट्स का भविष्य खतरे में है. लातेहार समेत राज्य के दूसरे जिलों में स्थिति यह है कि महज एक टीचर के भरोसे ऐसे स्कूलों में औसतन सौ से डेढ़ सौ छात्र अपने सपने को गढ़ने का जतन कर रहे हैं.

RTE कहता है कि हर स्कूल में कम से कम दो टीचर हों. हर 30 बच्चे पर एक टीचर की उपलब्धता हो. पर गारू (लातेहार) समेत तमाम ऐसे इलाके हैं जहां हकीकत कुछ और है. अब गारू ब्लॉक के संयुक्त ग्राम सभा मंच और ग्रामीणों ने अपनी भावनाओं को सीएम हेमंत सोरेन को लेटर लिखकर जारी किया है. सरकार से एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर करने और अतिरिक्त टीचर दिए जाने की गुहार लगायी है.
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किन जिलों में क्या है हाल

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई स्कूल ऐसे हैं जहां मात्र एक ही टीचर कार्यरत हैं. एक टीचर के ही भरोसे क्वालिटी एजुकेशन दिए जाने की कोशिश आधी अधूरी लगती है. इनमें सबसे टॉप पर दुमका जिला है, जहां 699 स्कूलों में मात्र एक शिक्षक पर ही सारे स्टूडेंट्स का जिम्मा है. इस मामले में सबसे निचले पायदान पर रामगढ़ जिला है जहां 73 स्कूलों में एक ही टीचर सेवा दे रहे हैं.

जिलों में सिंगल टीचर वाले स्कूलों की संख्या

दुमका: 699
पश्चिमी सिंहभूम: 581
रांची: 520
गिरिडीह: 518
साहेबगंज: 419
पलामू: 412
गोड्डा: 407
देवघर: 375
गढ़वा: 312
बोकारो: 276
सरायकेला खरसावां: 269
चतरा: 258
धनबाद: 252
लातेहार: 249
पाकुड़: 222
हजारीबाग: 175
पूर्वी सिंहभूम: 173
गुमला: 171
खूंटी: 153
सिमडेगा: 115
लोहरदगा: 106
कोडरमा: 94
जामताड़ा: 75
रामगढ़: 73

क्या हैं हालात

संयुक्त ग्राम सभा मंच, गारू (लातेहार) और ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड ने सोमवार को रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एकल टीचर की व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जाहिर की. समिति के विश्वनाथ सिंह, रवि सिंह ने अपील करते कहा कि राज्य में एक भी एकल-शिक्षक स्कूल नहीं होने चाहिये. राज्य में देश की तुलना में शिक्षक-स्टूडेंट्स के बीच भारी गैप है. शिक्षकों की भारी कमी से स्कूलों का यहां हाल बुरा है. इससे राज्य में एकल-शिक्षक स्कूलों के अनुपात से समझा जा सकता है.

शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली के अनुसार (यूडीआईएसई) एकल-शिक्षक स्कूलों में नामांकित छात्रों के अनुपात के मामले में 22 अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड टॉप पर है. राज्य में हर पांचवां स्टूडेंट एकल शिक्षक स्कूल में पढ़ता है. राज्य के सभी प्राइमरी स्कूलों में से एक-तिहाई केवल एक टीचर के भरोसे चलाये जा रहे हैं. यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम का भी खुला उल्लंघन है.

विश्वनाथ सिंह के मुताबिक एकल शिक्षक वाले स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन संभव नहीं. जब वे टीचर अनुपस्थित रहते हैं या किसी और काम के लिए ड्यूटी में लगाए जाते हैं तो बच्चों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है. जब टीचर रहते भी हैं तो वे अपने दम पर पांच अलग-अलग ग्रेड के बच्चों को कैसे पढ़ा सकते हैं. ऐसे में राज्यभर में मौजूद इस समस्या का निदान त्वरित स्तर पर हो.

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