
KHUNTI : कहते हैं दु:ख से बड़ा कोई टीचर नहीं होता़. इसी दु:ख ने खूंटी जिले के रनिया प्रखंड की गोसनाईन कुमारी को ऐसी शिक्षा दी कि मां-बाप के गुजर जाने के बाद उसने ना तो पढ़ाई की और ना ही अपनी शादी़. उसके ऊपर तीन भाई बहनों को जिम्मेदारी थी, इस कारण दु:खों के पहाड़ को माथे पर उठा कर हर झंझावतों से लड़ कर अपने तीन भाई-बहनों को भविष्य संवार दिया़ उनका घर बसाया और एक अच्छी जिंदगी देने में सफल रहीं.
45 वर्षीय गोसनाईन कुमारी के दो छोटे भाई और एक छोटी बहन है़. गोसनाईन जब छोटी थी, तब वह अपने माता-पिता को खेती करते देखती थी़. जब मां-बाप दोनों गुजर गए, तब वह स्वयं खेती-बारी करने लगीं. धान के साथ अपने पूर्वजों द्वारा बनाए गए कुंए के पानी से पटवन कर सब्जी की खेती करना भी प्रारंभ कर दिया़. स्वयं लट्ठा चला कर खेतों को पटातीं थीं. उसी सब्जी की कमाई से वह अपने भाई-बहनों का भरण-पोषण करने लगी़. लेकिन घर मुश्किल से चलता था़.
मिला महिला मंडल का साथ
कहते हैं जो स्वयं की मदद करता है, उसकी मदद भगवान भी करता है़. गोसाईन कुमारी कहतीं हैं कि एक दिन कुछ दीदियां उसके पास आईं और महिला मंडल से जुड़ने का प्रस्ताव रखा़. उनके प्रस्ताव को स्वीकारते हुए महिला मंडल से जुड़ गईं, जहां से उन्हें खेती-बारी के लिए ऋण उपलब्ध कराया गया़. जिसके बाद गोसनाईन के हौसलों को पंख लग गये. उनकी मेहनत को देख जिला प्रशासन ने उनके खेतों के बीच डीप बोरिंग कराया़, जिसके बाद वे सालों भर धान के साथ सब्जी की खेती करने लगीं. वे स्थानीय साप्ताहिक हाटों तपकरा, रनिया, टांगरकेला, लोहागड़ा में स्वयं सब्जी लेकर जातीं और बेचकर अच्छी कमाई कर घर आतीं. धीरे-धीरे उनकी आमदनी में इजाफा होने लगा़.
सभी भाई बहनों की शादी करायी
गोसनाईन कुमारी ने सब्जी बेच कर हुई कमाई से अपने सभी भाई-बहनों की शादी कराई़. अब उनके भाई-बहन खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं और गोसनाईन भी अपने संघर्ष, त्याग व सफलता से खुश हैं. अब वे सब्जी बेच कर साल में लाखों रुपए कमा लेतीं हैं. कभी घोर उग्रवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे रनिया के गांवों में गोसनाईन कुमार अन्य महिलाओं के साथ बेरोजगार युवकों के लिए प्रेरणा का श्रोत बन गई हैं.
अब पूरे गांव की महिलाएं करती हैं खेती
गोसनाईन द्वारा संघर्षों के बल पर सफलता पाने के बाद बनई गांव की अन्य महिलाएं भी सब्जी की खेती करने लगीं हैं. महिलाएं अपनी मेहनत की कमाई बच्चों की शिक्षा में खर्च कर रहीं हैं. अब बनई गांव सब्जी का हब बन गया है़.



